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लैब की जांच में फेल सैंपल की रिपोर्ट समय पर भेजी फिर भी व्यापारियों पर केस दर्ज कराने में कर रहे देरी

Shajapur News - शादी-ब्याह व तीज-त्योहार के सीजन में जांच-सैंपलिंग कार्रवाई के नाम पर कई बार औपचारिकता निभाने वाले जिले के खाद्य...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:51 AM IST
Shajapur News - report of fails sent to the lab on time delays in filing of cases against traders
शादी-ब्याह व तीज-त्योहार के सीजन में जांच-सैंपलिंग कार्रवाई के नाम पर कई बार औपचारिकता निभाने वाले जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर फिर अंगुली उठी है। इसलिए कि गुणवत्ताहीन सामग्री बेचने वालों के चेहरे पूरे सबूत के साथ सामने आने पर भी अधिकारी इन लोगों पर सख्ती बरतने में लेतलाली कर रहे हैं। इसे उदासीनता कहें या विभाग से जुड़े नियम-कायदों की उलझन कि पहले तो एफएसओ द्वारा स्थानीय कार्रवाई से लिए गए विभिन्न खाद्य सामग्रियों के सैंपल ही भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला में फेल निकले। लेब प्रबंधन ने रिपोर्ट समय पर जिले के अधिकारियों को पहुंचा दी, फिर भी जिम्मेदारों ने नियमों को ताक पर रख किराना दुकान व होटल चलाने वाले ऐसे 9 व्यापारियों पर अभी तक एडीएम कोर्ट में केस दायर नहीं कराए। कुछ फेल सैंपल की रिपोर्ट तो अप्रैल महीने में ही मिल चुकी है। भास्कर ने ऐसे ही कुछ मामले खंगाले तो ये हकीकत सामने आई। 8-10 सैंपल की रिपोर्ट तो अभी आना ही बाकी है।

कहां से लिया सैंपल किस तरह फेल निकला

अकोदिया के एक किराना स्टोर से पैक्ड नमकीन सेंव पैकेट का 8 फरवरी को लिया सैंपल मित्थ्याछाप निकला। लेब से भेजी रिपोर्ट 24 अप्रैल को ही मिल गई। अवंतिपुर बड़ोदिया स्थित किराना दुकान से 12 जून को लिया गया खुले जीरे का सेंपल अवमानक निकला। इसकी रिपोर्ट 5 जुलाई को ही प्राप्त हो गई। 30 जून को एम.जी. रोड स्थित शाजापुर की एक प्रतिष्ठित किराना दुकान से लिए चना व तुअर की खुली दाल के सैंपल अवमानक निकले। एफएसओ को दोनों की रिपोर्ट 23 जुलाई को मिली। कालापीपल की किराना दुकान से 4 जुलाई को लिया खुले हल्दी पाउडर का नमूना जांच में अवमानक निकला व यह रिपोर्ट एफएसओ तक 23 जुलाई को ही भेज दी गई। पोलायकलां होटल से 26 जुलाई को लिया मावा बरफी का सैंपल मित्थ्याछाप निकला व इसकी रिपोर्ट 14 अगस्त को स्थानीय विभाग को मिली। 24 अगस्त को मक्सी की किराना दुकान से लिए पैक्ड हल्दी पाउडर का नमूना भोपाल लेब की जांच में मित्थ्याछाप निकला व रिपोर्ट जिला विभाग तक 24 सितंबर को ही पहुंच गई। 23 अक्टूबर के ही दिन एफएसओ ने शाजापुर के एक रेस्टारेंट से तैयार सेंव व एक मिष्ठान्न भंडार सह दूध डेयरी से मावा बरफी के सैंपल लिए। दोनों ही लेब की जांच में मित्थ्याछाप रहे व इनकी रिपोर्ट 19 नवंबर तक मिल भी गई।

(नोट: खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा जुटाई गई रिपोर्ट)

जिम्मेदार बोले- चुनावी ड्यूटी की वजह से लेट हुए

जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी आर.के. कांबले व एस.एस. खत्री से भास्कर ने चर्चा की तो पहले उन्होंने नियम बताते हुए कहा कि विभाग के काम स्टेप से होते हैं। कई बार सैंपल रिपोर्ट लेब से आने में समय लगता है। रिपोर्ट निगेटिव निकलने पर संबंधित व्यापारी को डेढ़-दो महीने नोटिस पीरियड समय दिया जाता है। इसके बाद पूरी केस स्टडी कर एप्लीकेशंस तैयार होती है और एडीएम कोर्ट में निगेटिव सैंपल के दायरे में आई खाद्य सामग्री बेचने वाले पर केस लगता है। इसलिए देरी जैसी कोई बात नहीं। चुनावी ड्यूटियों में भी हम व्यस्त थे। रिपोर्ट मिलने के बाद सालभर में केस करना होता है, इसलिए अब जल्द ही संबंधितों पर प्रकरण दायर करवा देंगे।

1 रुपए से 5 लाख तक जुर्माना लगता है

खाद्य सुरक्षा अधिकारी आर.के. कांबले बताते हैं भोपाल लेब से जिन सैंपलों की निगेटिव रिपोर्ट मिली है, उनमें से कुछ सैंपल अमानक व कुछ मित्थ्याछाप श्रेणी के हैं। विभागीय नियम के हिसाब से मित्थ्याछाप श्रेणी के मामलों में व्यापारी पर 1 से 3 लाख रुपए एवं अमानक श्रेणी के प्रकरण में 1 से 5 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगता है। जेल होने का प्रावधान भी है। हालांकि यह निर्णय करने वाले पर ही तय करते हैं कि जुर्माने की राशि कितनी होगी।

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