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यूरिया कालाबाजारी छह दिन बाद भी अधिकारी रिपोर्ट तैयार नहीं कर पाए

3 वर्ष पहले
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अभयपुर सोसायटी में पिछले दिनों किसानों को बंटने वाले यूरिया वितरण में उजागर हुई गड़बड़ी के मामले में अब तक जांच रिपोर्ट नहीं बन पाई। जिम्मेदार अधिकारियों और जांच दल रिपोर्ट नहीं बनने के पीछे चुनाव ड्यूटी में व्यस्तता होने का हवाला दे रहे हैं। लेकिन जिस सोसायटी के प्रबंधक पर गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, उसी अभयपुर सोसायटी में वर्ष 2017 में सोसायटी से भ्रष्टाचार के ऐसे ही एक मामले में कर्मचारी मुकेश पाटीदार को हटा दिया गया था। इतना ही नहीं वर्ष 2010 में घासलेट की कालाबाजारी करने पर भी मामला चल रहा है। बावजूद इसके बैंक और सहकारी समितियों के जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से सांठगांठ कर अब तक उसे वहां से हटाया नहीं जा सका।

ज्ञात रहे 28 दिसंबर 2016 को इसी सोसायटी के शाखा प्रबंधक मुकेश पाटीदार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में सोसायटी के सात गांव के 300 से ज्यादा किसानों खाद के नाम रुपए ऐंठने का आरोप लगाया था। अभयपुर के दिलीप पाटीदार के अनुसार तत्कालीन सीईओ जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाजापुर एनयू सिद्दिकी ने जांच दल गठित कर 16 जनवरी को उक्त शाखा प्रबंधक को हटाने के निर्देश दे दिए थे। लेकिन इसके बाद कुछ समय दूसरी सोसायटियों में रहने के बाद मुकेश पाटीदार एक बार फिर यहीं के प्रबंधक बन गए।

मूल स्थापना अभयपुर में : बताया जा रहा है कि पाटीदार की मूल स्थापना भी अभयपुर सोसायटी नहीं है। ऐसे में बैंक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

अभयपुर सोसायटी के कर्मचारी पर केरोसिन, खाद वितरण में गड़बड़ी करने पर हुई थी जांच, 2017 में हटा दिया था
जिम्मेदार बोले- चुनावी ड्यूटी के कारण मामला अटक
सोसायटी में यूरिया स्टाक को लेकर सामने आए गड़बड़ी का मामला कलेक्टर श्रीकांत बनोठ के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने तक के निर्देश दे दिए थे। इसके बाद भी जिला सहकारी बैंक सहित अन्य जिम्मेदार जांच शुरू नहीं करा सके। जबकि इसके लिए तीन-चार कर्मचारियों का एक दल अलग से बनाया गया था। जिला सहकारी बैंक के सीईओ डीआर सरोठिया ने भास्कर को बताया कि मामले की जांच की जा रही है। लेकिन चुनावी ड्यूटी के कारण मामला बीच में अटक गया। पुराने मामले की फाइल भी निकाली जाएगी।

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