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अंचल में 4 घंटे मिल रही बिजली, खेतों में पलेवा के लिए जद्दोजहद कर रहे किसान

मध्य क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी की उदासीनता के चलते कराहल ब्लॉक में कमजोर बिजली आपूर्ति तंत्र ने रबी सीजन की...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 02:31 AM IST
Karhal - 4 hours of electricity in the zone farmers struggling for plaques in the fields
मध्य क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी की उदासीनता के चलते कराहल ब्लॉक में कमजोर बिजली आपूर्ति तंत्र ने रबी सीजन की शुरुआत में ही 132 गांव के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। किसानों को 10 घंटे बिजली देने का शैड्यूल लागू है, लेकिन आदिवासी अंचल में इस समय किसानों को 4 घंटे बिजली भी लॉ वोल्टेज पर मिलती है। कम वोल्टेज से ट्यूबवेल में मोटर पानी नहीं उठा पाती है। कभी बिजली आने तो कभी वोल्टेज बढऩे के इंतजार में किसान खेतों पर दिन और रात बिता रहे हैं। बिजली नहीं मिलने के कारण इलाके में अभी तक लगभग 60 हजार बीघा रकबे में पलेवा के लिए किसान जद्दोजहद कर रहे हैं।

कराहल ब्लॉक में सिर्फ आवदा बांध तथा तालाब से सिंचित होने वाले क्षेत्र किसान पलेवा कर पाए हैं। जबकि सिंचाई के लिए पूरी तरह बिजली पर निर्भर 80 गांव में अभी तक अधिकांश खेत खाली नजर आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि बिजली के कारण गेहूं, चना, जौ एवं अलसी की बोवनी का काम दिनोंदिन पिछड़ रहा है। बोवनी में लेट होने के अलावा किसानों में इस बात को लेकर भी घबराहट है कि बरसों पुरानी बिजली सप्लाई लाइन कमजोर होने की वजह से खेतों में उगाई गई फसल को सींचने की वक्त पर बिजली नहीं मिली तो वे बर्बाद हो जाएंगे। क्योंकि इस बार खरीफ फसल में भी किसानों को ज्यादा मुनाफा नहीं मिल पाया था। पिछले दो साल से विपरीत मौसम के चलते कर्ज में डूबा क्षेत्र का आम किसान घाटे से उबरने के लिए छटपटा रहा है, लेकिन बिजली संकट के आगे बेबस है। कृषि विभाग के अधिकारी भी ब्लॉक में लक्ष्य से बोवनी का रकबा घटने का अंदेशा जता रहे हैं। बिजली कंपनी द्वारा प्रस्ताव बनाने के बाद भी बरसों पुरानी बिजली लाइन नहीं बदले जाने की वजह से फाल्ट और ट्रिपिंग की समस्या बार बार पैदा हो रही है। क्षेत्रीय किसान बिजली घर पर विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं। बिजली समस्या को लेकर शनिवार को जेई दफ्तर पर कई किसान पहुंचे। परेशान किसानों ने अफसरों से बिजली सप्लाई सुधारने की मांग की। उधर बिजली कंपनी के अधिकारियों का तर्क है कि 50 किलोमीटर से भी अधिक लंबी दूरी के अलावा बिजली लाइन पर अधिक लोड के कारण कम वोल्टेज और फाल्ट की समस्या पैदा हो रही है। वहीं बिजली वितरण कंपनी द्वारा कृषि के लिए 10 घंटे बिजली सप्लाई का शैड्यूल तय कर कराहल, बरगंवा और सूंसवाड़ा लाइन पर रोटेशन प्रणाली से बिजली दी जा रही है। किसानों का कहना है कि बिजली की मांग बढ़ते ही आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है। 24 घंटे में 4 घंटे भी लगातार बिजली नहीं आती है। किसानों का कहना है कि उन्हें 10 घंटे के बजाय सिर्फ 5 घंटे ही पर्याप्त वोल्टेज के साथ बिजली मिल जाए तो भी बोवनी का काम चल सकता है। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो हजारों बीघा जमीन पड़त रह जाएगी।

वहीं कृषि विभाग द्वारा कराहल ब्लॉक में चालू रबी सीजन के लिए कुल 26 हजार हेक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य रखा गया है। बोवनी का उपयुक्त समय 15 अक्टूबर से 15 नवंबर माना जाता है। लेकिन अभी तक क्षेत्र के किसान 9900 हेक्टेयर में ही बोवनी कर पाए हैं। कृषि विभाग के अनुसार किसानों द्वारा 1595 हेक्टेयर में गेहूं, 870 में चना, 6250 हेक्टेयर में सरसों, 24 हेक्टेयर में मसूर, 61 हेक्टेयर में जौ तथा 69 हेक्टेयर में मटर की बोवनी कर दी गई है। जिन इलाके में बोवनी हुई है उनमें असिंचित के अलावा आवदा बांध तथा तालाब से सिंचित एरिया शामिल है। जबकि सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर 60 फीसदी क्षेत्र के 16 हजार 100 हेक्टेयर यानी 60 हजार बीघा से ज्यादा रकबे में अभी तक बोवनी नहीं हो पाई है।

अपने खेत में पलेवा करता किसान।

ब्लॉक में 10 हजार कनेक्शनधारी उपभोक्ता परेशान

बिजली सप्लाई में बार बार व्यवधान और लॉ वोल्टेज की समस्या से 10 हजार उपभोक्ता परेशान हैं। मध्य क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी की ओर से कराहल ब्लॉक में 8500 घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शनधारी उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। जबकि ब्लॉक में 1550 किसानों ने खेतों पर कृषि पंप कनेक्शन लगा रखे हैं। इसके अलावा लगभग 250 किसानों ने बिजलीकर्मियों की मिलीभगत से अवैध कनेक्शन लगा रखे हैं। पहले अवैध कनेक्शन की संख्या 550 से अधिक थी। कंपनी द्वारा चलाई गई स्कीम के तहत300 कनेक्शन वैध कराए गए हैं।

इन गांव में बिजली ने रोकी फसलों की बोवनी

कराहल, करियादेह, चकरामपुरा,लुहारी, कूंड, खेरी, खिरखिरी, बाढ़, मोराई, निमानिया, बांकुरी, घोंटूपुरा, मेहरबानी, रानीपुरा,सोनीपुरा, लहरौनी, कुरकुटा, सेमरा, कानरखेड़ा, जाखदा, सरारी, बरगंवा, पालमपुर, हसनपुर, चितारा, मदनपुर सहित 80 गांव में बिजली नहीं मिलने के कारण रबी फसलों की बोवनी का काम प्रभावित हो रहा है।

बिजली के कारण पिछड़ रहा बोवनी का काम


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