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पानी के लिए रोज दो घंटे कतार में लगते हैं 80 परिवार

ट्राइबल ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम झरेर में पानी भरने के लिए स्कीमबाेर पर लगी भीड़। सहरिया एवं गुर्जर मारवाड़ी समाज...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 05:06 AM IST
ट्राइबल ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम झरेर में पानी भरने के लिए स्कीमबाेर पर लगी भीड़।

सहरिया एवं गुर्जर मारवाड़ी समाज के लोग बोले- श्योपुर जाकर कलेक्टर से करेंगे शिकायत

भास्कर संवाददाता | गिरधरपुर

ट्राइबल ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम झरेर में पीएचई विभाग एवं ग्राम पंचायत की अनदेखी से ग्रामीणों काे बरसात में भी पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही हैं।। दो महीने से जल संकट से त्रस्त झरेर के ग्रामीणों ने अब श्योपुर जाकर कलेक्टर मिलने की बात कही है।

आदिवासी और मारवाड़ी गुर्जर जाति बाहुल्य ग्राम झरेर में पंचायत की स्कीमबोर जनरेटर के अभाव में लोगों को पानी देने में फेल है। 80 घरों की बस्ती के बीच 4 हैंडपंप लगे हैं। गिरते भूजल स्तर और तकनीकी खामी आने के कारण 20 दिन की अवधि में एक के बाद एक 3 हैंडपंप खराब हो गए थे। पूरा गांव पानी के लिए पिछले दो माह से आदिवासी बस्ती मेंं स्कीमबोर पर निर्भर हैं। स्थानीय निवासी मोती आदिवासी, लड्डूलाल, रामस्वरूप, भोला गुर्जर आदि लोगों का कहना है कि सूचना देने के 24 घंटे में हैंडपंप सुधारने का दावा पीएचई के अधिकारी करते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि झरेर में 65 दिन बीतने के बावजूद विभाग ने खराब हैंडपंपों की सुध नहीं ली है।

विभागीय लापरवाही के चलते ग्रामवासी भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। पानी भरने को लेकर लोगों के बीच आपसी झगड़े और मनमुटाव से बचने के लिए आदिवासी बस्ती और गुर्जर मारवाड़ी बस्ती के लोगों ने मिलकर नंबर से पानी भरने की व्यवस्था कर रखी है। पुरुष, महिलाओं को कतार में अपने बर्तन रखने के बाद डेढ़ से 2 घंटे तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। हर परिवार एक बार में ही अपनी घरेलू जरूरत के लिहाज से पीने का पानी भरते हैं। जबकि नहाने और कपड़े धोने के लिए गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर तालाब पर जाते हैं।