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बच्चे स्कूल नहीं गए तो आदिवासी परिवार पर होगा जुर्माना

अब तक आदिवासी पंचायतों ने महिलाओं को लेकर कई तुगलकी फरमान सुनाए है, लेकिन पंचायत ने एक अच्छी पहल करते हुए नया...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:45 AM IST

अब तक आदिवासी पंचायतों ने महिलाओं को लेकर कई तुगलकी फरमान सुनाए है, लेकिन पंचायत ने एक अच्छी पहल करते हुए नया निर्णय लिया है। जिसमें हर आदिवासी समाज का बच्चा अब स्कूल जाएगा।

अगर कोई परिवार अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजता है तो उस पर पंचायत के पंच व प्रधान जुर्माने की कार्रवाई करेंगे। जिसे परिवार को मानना होगा और इसके साथ ही बच्चे को स्कूल भेजना होगा। श्योपुर जिले में आदिवासी समाज शिक्षा के क्षेत्र में काफी हद से पिछड़ा हुआ है, सरकारी आंकड़े के मुताबिक आदिवासियों में सिर्फ 5 प्रतिशत तक ही बच्चे 10वीं व 12वीं तक पढ़ पाए है। जबकि वर्तमान में बच्चों के नाम स्कूलों में तो लिखे है, लेकिन वह पढ़ाई करने स्कूल ही नहीं जाते है। ऐसे में बच्चों को स्कूल में पढ़ाने के लिए आदिवासी पंचायत ने ठहराव कर नया निर्णय लिया है। जिसमें बच्चों को स्कूल भेजना जरूरी कर दिया गया है। किसी भी आदिवासी परिवार का बच्चा स्कूल में दाखिल होने के बाद भी स्कूल नहीं गया तो पहले तो उसके परिवार को पंच व प्रधान द्वारा समझाइश दी जाएगी। अगर इसके बाद भी वह स्कूल नहीं गया तो फिर पंच व प्रधान उस परिवार पर 100 रुपए से लेकर 500 रुपए तक का जुर्माना करेगा। जिसके बाद परिवार के बच्चे को स्कूल भी भेजा जाएगा। समाज में शिक्षा स्तर बढ़ाने के लिए पंचायत ने यह फैसला लिया है।

फैसला

आदिवासी पंचायत ने की अच्छी पहल, शिक्षा की अलख जगाने जुर्माने के अलावा चलाएंगे जागरूकता अभियान

पंच गांवों में शिक्षा के लिए करेंगे जागरूक

बच्चों को स्कूल भेजने की जिम्मेदारी पंचायत ने माता-पिता को ही नहीं बल्कि, गांव के पंच यानी प्रधान व पटेल को भी दी है। जिसमें वह अपने-अपने गांवों में यह निगरानी करेंगे कि, उनके गांव के सभी बच्चे स्कूल जाए। अगर कोई बच्चा स्कूल नहीं जाता है तो जुर्माने की कार्रवाई जाएगी। लेकिन इसके बाद गांवों में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। जिसमें गांव का पंच व प्रधान सहित पटेल घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए माता-पिता को प्रेरित करेंगे। साथ ही अपने गांव के हर बच्चे को स्कूल भिजवाने की पूरी जिम्मेदारी भी संभालेंगे।

यह कदम उठाया है

आदिवासी समाज शिक्षा में बहुत पिछड़ा हुआ है, इसे आगे बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। जिससे हर बच्चा स्कूल जाकर पढ़ाई कर सके और समाज का नाम ऊंचा कर सके। बच्चों को स्कूल भिजवाने की जिम्मेदारी गांवों के पंचों को दी गई है। टुंडाराम आदिवासी, अध्यक्ष, 84 गांवों की समाज सुधार समिति

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