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कलमी में 10 लाख से बन रहा पहला गौ दर्शन परिसर, गायों को मिलेगा सुरक्षित आवास

गोवंश के सरंक्षण एवं पशुपालन व्यवसाय को आयमूलक बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा की गई गो दर्शन परिसर की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:45 AM IST

कलमी में 10 लाख से बन रहा पहला गौ दर्शन परिसर, गायों को मिलेगा सुरक्षित आवास
गोवंश के सरंक्षण एवं पशुपालन व्यवसाय को आयमूलक बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा की गई गो दर्शन परिसर की परिकल्पना आकार लेने लगी है। जिले का पहला गो दर्शन परिसर कराहल ब्लॉक के ग्राम कलमी में बन रहा है। इसमें एक साथ 1 हजार गायों को सुरक्षित छायादार आवास के साथ पानी की व्यवस्था की जा रही है। दरअसल मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा श्योपुर जिले में 5 लाख 54 हजार से अधिक पालतू पशु है, इनमेंं 2 लाख 44 हजार गोवंश शामिल है। पशुओं की संख्या की तुलना में दूध का उत्पादन नहींं हो रहा है। इसकी वजह स्टॉल फीडिंग नहीं होना है। दूध का जितना उत्पादन होना चाहिए उतना नहीं हो रहा है।

क्योंकि गांवों में हजारों पशुपालक रोजाना सुबह-शाम दूध निकालने के बाद गायों को चरने के लिए जंगल में छोड़ देते हैं। जंगल में चराई से कई वनस्पतियां उजड़ रही है। पशुपालक व्यवसाय को आयमूलक बनाने एवं चराई के कारण जंगल को नुकसान से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने गो दर्शन पपरिसर की अभिनव योजना बनाई है। मुख्यमंत्री ने गत दिसंबर माह में इसकी घोषणा की थी। शासन द्वारा 10 लाख रुपए की राशि जारी कर ग्राम कलमी में गो दर्शन प रिसर का निर्माण कार्य शुरू कराया है। वनांचल में गौवंश की ज्यादा संख्या वाले ग्रामों में गो दर्शन परिसर का निर्माण प्रस्तावित है। वहीं जिले में पशुपालकों द्वारा स्टॉल फीडिंग कराने के बजाय दूध निकालने के बाद पशुओं को चरने के लिए जंगल में छोडऩे की प्रवृत्ति वनों के विकास में बाधक बन रही है। दिनरात जंगल में खुले घूमने वाले पशु पेड़- पौधों की कोपलें और जड़ चरकर नष्ट कर देते हैं। जिससे वन तुलसी, सतावर, सलाई, गुड़मार, पमार आदि वनस्पतियों की प्रजाति लुप्त होने की कगार पर है। इन्हीं वनोपज के संग्रहण से हजारों वनवासी परिवारों की आजीविका चलती है। चराई से जंगल का दायरा सिमटने के कारण सहरिया समुदाय के जीवन स्तर पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।

कराहल ब्लॉक के ग्राम कलमी में गो दर्शन परिसर का गेट बनकर हुआ तैयार।

पशुपालकों की मांग पर कराहल में सीएम ने की थी घोषणा

गत वर्ष ग्राम गोरस में तीन दिवसीय गोरस महोत्सव के दौरान क्षेत्रभर से जुटे गोपालकों ने गौवंश के संरक्षण एवं संवर्धन की योजना बनाकर राज्य सरकार को भेजी थी। इसी सिलसिले में क्षेत्रीय पशुपालकों ने गौ यात्राएं भी निकाली।पशुधन के संरक्षण एवं पशुपालन व्यवसाय को आयमूलक बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा गौदर्शन परिसर की परिकल्पना की गई। गत 25 दिसंबर 2017 को कराहल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वनांचल में गौ दर्शन परिसर बनवाने की घोषणा की थी। पहला गौ दर्शन परिसर बनाने की शुरुआत ग्राम कलमी से की गई है।

पशुपालकों को फल रही हैं गिर एवं देसी नस्ल की गायें

घने वनों से आच्छादित कराहल क्षेत्र में भरपूर चारा एवं पानी की उपलब्धता पशुपालकों को आकर्षित करती है। राजस्थान के मारवाड़ से सैकड़ों परिवारों ने गोरस क्षेत्र को स्थायी डेरा बना लिया है। पशुगणना के अनुसार जिले में कुल 5 लाख 54 हजार 186 पालतू पशु हैं। इनमें 2 लाख 44 हजार 385 गौवंश है। क्षेत्र में ज्यादातर गिर एवं देसी नस्ल की गायें पाली जा रही है।

गो दर्शन परिसर बनने से फायदे ही फायदे

गो दर्शन परिसर बनाने की राज्य सरकार की योजना से सबको फायदे ही फायदे हैं। गायों को सुरक्षित आवास मिलेगा। स्टॉल फीडिंग से दूध उत्पादन में बढऩे से पशुपालकों की आमदनी में इजाफा होगा। सबसे ज्यादा फायदा वनों को होगा। अधिकांश पशुपालक दूध निकालने के बाद अपने मवेशियों को जंगल की ओर रवाना कर देते हैं। पशुओंं की चराई रुकने से वनोपज संग्रह पर निर्भर वनवासियों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा। सीएस निनामा, डीएफओ , सामान्य वन मंडल श्योपुर।

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