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बन संवर कर रोशनी के सामने आएगा कौन...

फोटो-06, भास्कर संवाददाता | श्योपुर बन संवर कर रोशनी के सामने आएगा कौन, आईना हूं मैं मुझे आईना दिखाएगा कौन...। यह...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 05:30 AM IST
फोटो-06, भास्कर संवाददाता | श्योपुर

बन संवर कर रोशनी के सामने आएगा कौन, आईना हूं मैं मुझे आईना दिखाएगा कौन...। यह शायरी बुधवार की देर रात मेला ग्राउंड स्थित राजीव गांधी सभागार में गूंजी। जिसमें शायरी और गीत सुनने आए श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। शायरों के कलाम पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यअतिथि नगर पालिका अध्यक्ष दौलतराम गुप्ता ने किया।

राजीव गांधी सभागार में आयोजित हुए मुशायरे में आईने का कलाम डॉ. कौशल ने पढ़ा। जिन्होंने एक के बाद एक शायरी और गीतों से श्रोताओं को देर रात तक अखिल भारतीय मुशायरे में बैठे रहने पर मजबूर कर दिया। मुशायरे की सदारत अय्यूब कुरैशी ने की। संचालन की बागडोर बुजुर्ग शायर डॉ. सागर रहमानी के बाद नौजवान शायर रियाज तारिक ने संभाली। आगरा से आए अनवर अमान के नातिया कलाम की तरह खूबसूरत गजलों और बेहतरीन आवाज का जादू महफिल में जमकर चला।

उन्होंने फरमाइशों को पूरा करते हुए एक के बाद एक कई गजलें पेश कीं और मुशायरे को कामयाब बना दिया। इसके अलावा डॉ. कौशल ने मोहब्बत का ठिकाना हो गया है, ये दिल उनका निशाना हो गया है। वो कागज भी पुराना हो गया है, जैसी शायरी पढ़कर श्रोताओं की जमकर तालियां बटोरीं। वहीं शहर के प्रख्यात शायर और साहित्यकार प्रभात प्रणय ने भी अखिल भारतीय मुशायरे में अपनी गीत और गजलें पेश की। जिसमें लोगों ने उनकी गजलों और शायरी को जमकर सराहा। उन्होंने एक नाशाद को फिर शाद कर दिया मैने, कल उसे कैद से आजाद कर दिया मैने, ख्वाब में शोर मचाती थी याद की चिड़िया, हार कर नींद को सैयाद कर दिया मैनें शायरी पढ़कर श्रोताओं की जमकर तालियां बटोरी। जबकि शुरूआती दौर में नौजवान शायर अनवर गाफिल ने लगभग उखड़ी सी महफिल को देशप्रेम की आवाज के साथ सांसें दी। जिसमें उन्होंने शहीदों व देश की सुरक्षा में तैनात जवानों पर एक से बढ़कर एक शायरी पढ़ी।

मुशायरा

राजीव गांधी सभागार में हुआ अखिल भारतीय मुशायरा, नपा अध्यक्ष ने किया मुशायरे का शुभारंभ

इन्होंने भी किए कलाम पेश

मुशायरे में डॉ. अय्यूब गाजी, इमरान मांगरोलवी, अशफाक सफदर, डॉ. आरिफ छबड़ा, रिहान फारूकी, इरफान अख्तर कनापुरी, रजा बारांनवी, शरीफ अहमद, तालिब तूफानी, मजीद सफदर आदि ने अपना कलाम पेश किया। अलसुबह 3 बजे तक चले मुशायरे के दौरान सभागार वाह-वाह की आवाजें गूंजती रहीं। इस दौरान अदब के कद्रदान शायरों को फूलों के हार पहनाकर दाद और मुबारकबाद भी देते रहे।