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50 गांवों से पलायन जारी, कलेक्टर बोले-मनरेगा से दिला रहे रोजगार, सरपंचों ने कहा-बंद हैं काम

जिले की आदिवासी बहुल पंचायत कराहल का बांकुरी गांव। 150 घरों की बस्ती में चारों तरफ एक अजीब सी खामोशी व सन्नाटा था।...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 05:30 AM IST
जिले की आदिवासी बहुल पंचायत कराहल का बांकुरी गांव। 150 घरों की बस्ती में चारों तरफ एक अजीब सी खामोशी व सन्नाटा था। थोड़ा और आगे बढ़ने पर देखा कि कई घरों के बाहर दरवाजों पर ताले लटके हैं। कूड़े-कचरे के ढेर लगे हैं मानों महीनों से वहां सफाई नहीं हुई। गांव के बीच पेड़ की नीचे बैठे एक बुजुर्ग से पूछा तो उसने इशारा कर दिया कि गांव के कुछ परिवार अभी थोड़ी देर पहले ही पोटली व बक्सों में सामान भरकर रोड की तरफ गए हैं। पूछा तो बुजुर्ग ने कहा कि-गांव में सूखे जैसे हालात हैं, खेतों में फसल हो नहीं रही और गांव में कोई काम भी नहीं है। इसलिए मोड़ा-मोड़ी और बहुएं बच्चों को लेकर (120 परिवार) शहर चले गए हैं। यह हालात अकेले बांकुरी नहीं बल्कि जाखदा, लहरौनी, गंवा, गढ़ला, बांकुरी, निमानिया, मेहरबानी, मोराई, भोटूपुरा, खिरखिरी, रामनगर, पटौदा, चकरामपुरा सहित 50 गांवों में हैं। जहां सूखे व कम बारिश से हालात खराब हैं और काम न मिलने से लोग लगातार पलायन कर रहे हैं।

सूखापीड़ित किसानों को नहीं मिली राहत

जिले को सूखाग्रस्त सरकार ने नवंबर माह में घोषित किया, जिसमें विजयपुर को अति गंभीर सूखा माना है। लेकिन सरकार ने अब तक सूखा राहत के लिए कोई राशि जारी नहीं की है।

कब सुनेगी सरकार

कम बारिश की वजह से गर्मी से पहले ही कुएं-तालाब सूखे और हैंडपंप बंद, खेत सूने, काम न मिलने से गांव छोड़कर जा रहे लोग, 50 गांवों में हालात ज्यादा खराब

1.80

लाख मजदूर हैं जिले में

1.20

लाख मजदूर हैं एक्टिव

7804

काम हैं 225 पंचायतों में

7804 काम सालों से लंबित

जनपद श्योपुर, कराहल और विजयपुर की पंचायतों में कामों की कोई कमी नहीं है, लेकिन उक्त कामों के लिए बजट नहीं मिल रहा है। जिलेभर में 7804 काम लंबित है, जिनमें श्योपुर में 2.5 हजार, कराहल में 2800 तो विजयपुर में 2.5 हजार काम शामिल है। जिनमें बीते साल ही 1.20 लाख मजदूरों में से 40 हजार मजदूरों को काम दिया गया है, जबकि वर्तमान में 60 हजार के करीब मजदूर काम की मांग जिपं से कर रहे है।

पंचायतों में मटेरियल का भुगतान नहीं हुआ, तीन साल में 7804 काम लंबित

हम तो पंचायतों में ही रहते हैं, नहीं चल रहे रोजगारमूलक काम

कलेक्टर श्री सोलंकी हर पंचायत में 25-25 काम चलने का दावा कर रहे है, जबकि विधायक रामनिवास रावत और सरपंच संघ के अध्यक्ष मुकेश सुमन मनरेगा के कामों को पंचायतों में बंद बता रहे है। सरपंच संघ के अध्यक्ष का कहना है कि, गांवों में कहीं भी रोजगार मूलक काम नहीं कराए जा रहे है। इसके अलावा पूर्व के कामों में अब तक पंचायतों को मटेरियल भुगतान नहीं हो सका है, जिसके चलते काम लंबित बने हुए है और मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। सरपंच संघ और विधायक गांवों में कामों की शुरूआत की मांग कर रहे है, ताकि मजदूरों का पलायन रूक सके और उन्हें गांव में ही काम मिल सके।

जानिए, कैसे पूरे मामले को झुठला रहे अफसर

हर पंचायत में हो रहे 25-25 काम


कहीं नहीं हो रहे मनरेगा के काम


इन 50 गांवों में हालात खराब

कराहल विकासखंड के 50 गांवों के करीब 50 हजार मजदूर परिवार पलायन कर चुके है, जो कि राजस्थान, गुजरात, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा में फसल कटाई के लिए निकल चुके है। यह मजदूर वर्ग अप्रैल माह के बाद काम कर लौटेगा। इनमें जाखदा, लहरौनी, गंवा, गढ़ला, बांकुरी, निमानिया, मेहरबानी, मोराई, भोटूपुरा, खिरखिरी, रामनगर, पटौदा, चकरामपुरा, करियादेह, सेसईपुरा, रानीपुरा, कटीला, अधवाड़ा, मोरावन, बासेड़, बाघचकराना, हथेड़ी, टिकटौली, नसीहर, सिलोरी, पनवाड़ा, आमेठ, खेरी, दांती, रींछी, पहेला, भूरवाड़ा, झिरन्या, सूंसवाड़ा, भंवरकुआं, गोरस, पिपरानी, कराई, बुढ़ेरा, डोब, धावा, पनार, कलमी, ककरधा, चकरामपुरा, भुखारी, बर्धा, सुबकरा, मूंझरी सहित 50 गांव शामिल है।