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अगर व्यापारी कारोबारी रिटर्न में 8 प्रतिशत मुनाफा बताएं तो नहीं देना होगा बहीखाते का विवरण

जिले के 2 करोड़ रुपए से कम टर्न ओवर वाले व्यापारी आठ प्रतिशत मुनाफा बताकर अपनी रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। ऑडिट कराने...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 05:05 AM IST
जिले के 2 करोड़ रुपए से कम टर्न ओवर वाले व्यापारी आठ प्रतिशत मुनाफा बताकर अपनी रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। ऑडिट कराने वाले कारोबारी 30 सितंबर तक अपनी रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इसमें उनको अपने बही खातों की पूरी डिटेल आईटी रिटर्न में देने की आवश्यकता नहीं होगी। वही टैक्स चोरी करने वाले कारोबारियों की पहचान के लिए आयकर विभाग ने वाणिज्यिक कर विभाग से हाथ मिलाया है। इसके तहत अब कारोबारियों को अपने जीएसटी रिटर्न से जुड़ी जानकारी अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में बतानी होगी। इस डिटेल के आधार पर दोनों विभाग डाटा शेयर कर संदिग्ध कारोबारियों की पहचान कर सकेंगे। जीएसटी में पंजीकरण कराने वाले कारोबारियों को जीएसटी से जुड़ी सारी जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न में देनी होगी। इसमें जीएसटी नंबर से लेकर जीएसटी में दाखिल की गई हर रिटर्न की पूरी जानकारी देनी पड़ेगी। इस पूरी कवायद का मकसद टैक्स चोरी को रोकना है।

जीएसटी रिटर्न व पैन नंबर के आधार पर दोनों विभाग इनकम टैक्स रिटर्न में दी गई जानकारी का जीएसटी डाटा से मिलान करेंगे। इसमें मैच नहीं होने पर कर चोरी आसानी से पकड़ी जाएगी। इसके साथ ही आयकर विभाग ने 2 करोड़ से कम टर्न ओवर वाले कारोबारियों को बड़ी राहत दी है। ये कारोबारी अपने टर्नओवर का आठ प्रतिशत प्रोफिट दिखाकर रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। रिटर्न में उनको अपने अकाउंट्स की डिटेल देने की बाध्यता नहीं होगी। वही यदि कोई कारोबारी अपना पूरा कारोबारी लेनदेन बैंकिंग के जरिए करता है तो वह अपना लाभ 6 प्रतिशत तक दिखा सकता है। उसे भी अपने अकाउंट्स की जानकारी नहीं देनी पड़ेगी। निर्धारित से कम प्रोफिट बताने वालों को बही खातों की तो जानकारी देनी ही पड़ेगी उसके साथ अपने बही खातों की सीए से ऑडिट भी करानी पड़ेगी। ऑडिट कराने वाले कारोबारी 30 सितंबर तक अपनी रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

वहीं पीएफ खाताधारकों को 2 अक्टूबर से पहले अपने एकाउंट को आधार से लिंक करवाना अनिवार्य होगा।

नियम

ऑडिट कराने वाले कारोबारी 30 सितंबर तक दाखिल कर सकते हैं रिटर्न

जिले में आडिट कराने वाले 600 व्यापारियों को मिलेगा फायदा

जिले में जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड कारोबारियों में दो करोड़ रुपए से अधिक सालाना टर्न ओवर वालों की संख्या सिर्फ 100 है। जबकि दो करोड़ से कम टर्न ओवर वाले 3000 कारोबारी रजिस्टर्ड है। लेकिन 600 व्यापारी ने ही आडिट कराया है। कर सलाहकार एडवोकेट नकुल जैन ने बताया कि 8 प्रतिशत प्रोफिट दिखाकर रिटर्न दाखिल कराते समय अकाउंट्स की डिटेल देने की बाध्यता समाप्त करने से आडिट कराने वाले कारोबारियों को राहत मिलेगी।