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कुपोषण प्रभावित परिवारों की महिलाएं बोली- पंचायत में पैसे मांगने गए तो मिली फटकार

तीन माह बाद भी नहीं हुई 60 परिवारों को एक हजार रुपए मिलने की शुरुआत भास्कर संवाददाता | बड़ौदा राज्य सरकार द्वारा...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 04:50 AM IST
कुपोषण प्रभावित परिवारों की महिलाएं बोली- पंचायत में पैसे मांगने गए तो मिली फटकार
तीन माह बाद भी नहीं हुई 60 परिवारों को एक हजार रुपए मिलने की शुरुआत

भास्कर संवाददाता | बड़ौदा

राज्य सरकार द्वारा कुपोषण को जड़ से मिटाने के लिए प्रभावित परिवारों के लिए जनवरी 2018 से हर माह एक हजार रुपए देने की योजना शुरू की गई है, लेकिन श्योपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत रतोदन में बसे 60 सहरिया परिवारों को तीन माह बाद भी यह राशि नहीं दी जा रही है।

ग्राम पंचायत में जरूरी दस्तावेज जमा कराने के बावजूद 70 में से 60 परिवारों को अभी तक एक पैसा नहीं मिला है। तीन माह से महिला हितग्राही पैसे के लिए ग्राम पंचायत दफ्तर के चक्कर काट रही है। वंचित महिलाओं का कहना है कि पैसे मांगने पर उनके साथ पंचायत सचिव द्वारा अभद्रता की जाती है।

ग्राम रतोदन निवासी जानकीबाई पूनीबाई, सरोबाई, केड़ाबाई, मुनेषी बाई, कैलाशी बाई, धोड़बाई, मीराबाई, कल्लोबाई ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के बाद हर माह एक हजार रुपए मिलने की उम्मीद से उन्होंने गत जनवरी माह में परिवार आईडी, आधार कार्ड और बैंक पास बुक की फोटो कॉपी ग्राम पंचायत कार्यालय में जमा करा दी थी। गांव में कुपोषण से प्रभावित 70 आदिवासी परिवारों को इस योजना का लाभ मिलना था। लेकिन ग्राम पंचायत द्वारा अभी तक महज 7 परिवारों को ही हर माह एक हजार रुपए दिए जा रहे हैं। जबकि 60 से अधिक परिवार आज तक योजना से वंचित है। उक्त महिलाओं ने बताया कि एक हजार रुपए महीने खाते में जमा कराने की मांग को लेकर जब ग्राम पंचायत कार्यालय जाती है तो पदस्थ महिला सहायक सचिव उनके साथ अभद्र बर्ताव करती है। सोमवार को भी जब महिलाएं ग्राम पंचायत दफ्तर गई तो सहायक सचिव ने फटकारते हुए बाहर निकाल दिया। पंचायत सचिव मीणा ने भी महिलाओं की कोई सुनवाई नहीं की है। वंचित हितग्राहियों का कहना है कि ग्राम पंचायत की ओर से अभी तक सिर्फ उन्हीं परिवार को एक हजार रुपए महीने दिए जा रहे है, जिन्होंने गत पंचायत चुनाव में सरपंच के पक्ष में मतदान किया था। जिन आदिवासियों ने सरपंच को वोट नहीं दिया था, उन्हें जानबूझ कर परेशान किया जा रहा है।

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