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त्रिवेणी संगम तट पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब हजारों भक्तों ने लगाई डुबकी, किए दान-धर्म

वैशाख मास में 10 साल के बाद सोमवार को सर्वाद्ध सिद्धि योग एवं अश्विनी नक्षत्र के विशेष संयोग में पड़ी सोमवती...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 04:50 AM IST
त्रिवेणी संगम तट पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब हजारों भक्तों ने लगाई डुबकी, किए दान-धर्म
वैशाख मास में 10 साल के बाद सोमवार को सर्वाद्ध सिद्धि योग एवं अश्विनी नक्षत्र के विशेष संयोग में पड़ी सोमवती अमावस्या पर जिले के सभी पवित्र जलाशयों में स्नान और प्रमुख मंदिरों में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। रामेश्वर धाम त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाने के लिए हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए मध्यप्रदेश सीमा में दो थानों की पुलिस लगानी पड़ी।

उधर राजस्थान सीमा में भी स्नान घाट और श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर पर सुरक्षा व्यवस्था खंडार थाना पुलिस ने संभाली। बड़ौदा क्षेत्र के उतनवाड़ ध्रुवकुंड , विजयपुर के छिमछिमा हनुमान मंदिर और कराहल क्षेत्र के ग्राम पनवाड़ा स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर पर विशेष चहल पहल रही। इस पर्व को लेकर शहर से गांवों तक महिला समुदाय में खास उत्साह दिखा। अखंड सुहाग की कामना को लेकर महिलाओं ने व्रत रखकर फल और अन्न का दान किया। शहर के सभी प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना एवं दान- धर्म के लिए श्रद्धालुओंं का तांता लगा रहा। सनातन हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार इस दिन पवित्र जलाशयों में स्नान व दान का कई गुना फल मिलता है। वैशाख में सोमवती अमावस्या का संयोग 10 वर्ष बाद बनने के साथ ही इस दिन सर्वाद्ध सिद्धि व अस्विनी नक्षत्र के संयोग से श्रद्धालुओं के लिए सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व और बढ़ गया। जिला मुख्यालय से 39 किमी दूर भगवान परशुराम की तपोस्थली एवं चंबल, सीप और बनास नदियों के त्रिवेणी संगम के लिए विख्यात रामेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। सूर्योदय से पहले ही त्रिवेणी संगम तट पर हर-हर गंगे के उद्घोष गूंजने लगे। स्नान व दान-पुण्य का सिलसिला शाम तक चलता रहा। इस बीच पुलिस प्रशासन का अनुमान है कि मप्र और राजस्थान सीमा में करीब श्रद्धालुओं की संख्या लगभग 75 हजार तक पहुंची। हजारों श्रद्धालुओं ने नाव से उस पार जाकर परशुराम घाट पर स्नान किए। भोगीका रामेश्वर मेगा हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव रहा। सैकड़ों कार, ट्रैक्टर-ट्रॉली और मोटरसाइकिल के अलावा आसपास गांव से लोग पदयात्रा करते हुए जा रहे थे। त्रिवेणी संगम में स्नान के बाद रामेश्वर महादेव का अभिषेक किया, श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर मेंं दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ती रही।

सोमवती अमावस्या पर त्रिवेणी संगम पर पौराणिक महत्व के परशुराम घाट पर स्नान करते श्रद्धालु।

भीड़ बढ़ी तो सुरक्षा व्यवस्था में दो थानों का पुलिस बल भी कम पड़ा

रामेश्वर धाम में सोमवती अमावस्या पर स्नान के लिए सुबह दिन चढऩे के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। सुबह आठ बजे स्थिति यह हो गई कि नाव के किनारे लगने से पहले ही इसमें सवार होने के लिए लोगों के बीच धक्कामुक्की की नौबत आ गई। पुलिस प्रशासन की ओर से मानपुर थाने के साथ ही ढोढर थाने से पुलिस बल लगाया गया। मानपुर थाना प्रभारी मनोज झा के साथ पुलिसकर्मियों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। जबकि रामेश्वर महादेव एवं लक्ष्मीनारायण मंदिर में भीड़ उमडऩे के बावजूद पूजा अर्चना एवं दर्शन का सिलसिला शांतिपूर्ण माहौल में जारी रहा।

सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर सुनी कथा

सुहागिन महिलाओं ने सोमवती अमावस्या पर पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखकर इस पर्व से जुड़ी कथा कही और सुनी गई। शहर के रामजानकी मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, सतसई मंदिर, अग्रवाल समाज के श्री गोविंददेव मंदिर, अटलबिहारी मंदिर, चंबल कॉलोनी स्थित बांकेबिहारी मंदिर , श्री राघव जी मंदिर एवं पंडित पाड़ा स्थित गीता- रामायण सत्संग भवन में महिलाओं ने अन्न, वस्त्र, फल चढ़ाए। सुहागिन महिलाओं ने इस पर्व पर सुहाग सामग्री का दान किया। वहीं प्राचीन काल में राजा उत्तानपाद की राजधानी कहे जाने वाले बड़ौदा क्षेत्र के ग्राम उतनवाड़ में सोमवती अमावस्या पर भक्तों का मेला लगा। श्रद्धालुओं ने पौराणिक महत्व के ध्रुवकुंड में स्नान के बाद शिवालय में पूजा- अर्चना की। बड़ी संख्या में चर्मरोग से पीडि़त लोगों ने कुंड में डुबकी लगाई। मान्यता है कि कुंड में नहाने से लोगों को त्वचा संबंधी बीमारियों से निजात मिल जाती है। कुंड के पानी की जांच में सल्फर की मात्रा पाई गई है और सल्फरयुक्त पानी के प्रभाव से चर्मरोग में फायदा मिलता है।

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