हार्वेस्टर से फसल काटने के बाद खेतों में नरवाई जलाने से गर्मी में 5 लाख पशुओं के लिए बढ़ा चारे का संकट

Sheopur News - इस बार जिले में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होने के बावजूद अभी से पशुपालकों के सामने भूसे की उपलब्धता का संकट पैदा हो...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:21 AM IST
Sheour News - mp news after harvesting harvesters harvesting of fields in the fields by the harvesting
इस बार जिले में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होने के बावजूद अभी से पशुपालकों के सामने भूसे की उपलब्धता का संकट पैदा हो गया है। पिछले दिनों बिगड़ते मौसम के मिजाज को देखते हुए ज्यादातर किसानों ने हार्वेस्टर से गेहूं की फसल कटा ली । फसल काटने के बाद खेतों में खड़ी नरवाई में आग लगाने के कारण पशुओं के लिए चारे की किल्लत हो गई है। दुधारू पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने में ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। भूसे के भाव अभी से बढ़ गए हैं। पशुपालकों को मजबूरी में महंगा चारा खरीदना पड़ रहा है। गत वर्ष इस सीजन में एक बिट ट्रॉली भूसा की रेट 3500 रुपए थी । इस बार एक बिट ट्रॉली भूसा 4200 रुपए में बिक रहा है। आने वाले दिनों में भूसे के भाव और भी बढ़ सकते हैं। क्योंकि सीमावर्ती राजस्थान से भूसे के खरीदार श्योपुर क्षेत्र में आने लगे हैं। ऐसे में चारा महंगा होने के आसार देखते हुए पशुपालकों की चिंताएं बढ़ने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि चारे के साथ ही पानी की किल्लत दिनोंदिन गहराने से गोवंश का पालन करना मुश्किल हो रहा है। जिले में पालतू पशुओं की संख्या 5 लाख है। इनमें 1 लाख 87 हजार गायें है। दूर-दराज के गांवों में हालात विकट हो चुके हैं।

ग्राम गोरस के पास चारा चरते पशु।

पशुओं को खुला छोड़ने पर मजबूर पशुपालक

चारा एवं पानी का इंतजाम मुश्किल होने से ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालक व किसान अपने पशुओं को खुला छोडऩे पर मजबूर हो रहे है। ग्राम गोरस में किसान फूलाजी मारवाड़ी ने बताया कि ज्यादा पशु होने के कारण चारे-पानी की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। किसान अपने दुधारू पशुओं को औने-पौने दामों में बेच रहे है। जबकि बूढी गायों को खुला छोड़ना पड़ रहा है। इससे उन्हें काफी नुकसान भी हो रहा है। बड़ौदा, प्रेमसर, मानपुर , ढोढर जैसे मैदानी इलाके में किसानों द्वारा हार्वेस्टर से गेहूं कटाने के बाद नरवाई भी जलाने के कारण पशुओं को चारे के लिए भटकना पड़ रहा है। चरवाहों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। भूसा भी महंगा होने से जितना फायदा नहीं हो पाता है, उतना तो पशुओं के लिए चारा खरीदने में खर्च हो जाता है। ऐसे हालात में पशुपालकों के सामने विकट समस्या पैदा हो गई है।

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