ब्राडगेज: वन विभाग तीन माह बाद करेगा अधिग्रहण जिनकी भूमि अधिग्रहित हुई, उन्हें नहीं मिला मुअावजा

Sheopur News - ब्रॉडगेज का जमीन अधिग्रहण का मामला अब एक बार फिर अटकता नजर अा रहा है। वन विभाग की जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव नहीं बन...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 04:51 AM IST
Sheour News - mp news broadgase forest department will take three months after acquisition whose land was acquired they did not get compensation
ब्रॉडगेज का जमीन अधिग्रहण का मामला अब एक बार फिर अटकता नजर अा रहा है। वन विभाग की जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव नहीं बन सका है। अब अफसर लोस चुनाव की तैयारियों में जुट गए है। इन प्रस्तावों को अब लोस चुनाव के बाद ही भोपाल भेजा जाएगा, ताकि इस पर केबिनेट की मंजूरी मिल सके और जमीन अधिग्रहण के तहत मुआवजा स्वीकृत हो सके।

लोकसभा चुनाव के चलते जिले में निर्माण व विकास कार्य लगातार ठप होते जा रहे हैं। जिले की सबसे बड़ी ब्रॉडगेज परियोजना भी अटक गई है। प्रशासन ने यहां सर्वे करते हुए अधिग्रहित की जाने वाली जमीनें तो चिह्नित कर ली हैं, लेकिन अब मुआवजा वितरण प्रस्ताव और वन भूमि अधिग्रहण के प्रस्ताव ही नहीं बन सके। इन प्रस्तावों को तहसील स्तर से पटवारी व तहसीलदारों द्वारा बनाया जाना है। लेकिन अफसरों की अदला-बदली और अन्य कामों के फेर में ब्रॉडगेज परियोजना फिर अटकती दिखाई दे रही है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद इस परियोजना पर अफसरों के काम की रफ्तार और धीमी हो गई है। इसमें न तो प्रस्ताव तैयार हो सके और न ही वन भूमि अधिग्रहण फाइल आगे बढ़ पाई है। नतीजा रेलवे को अधिग्रहण के लिए चिह्नित की गई जमीन का आवंटन नहीं हो सका है।

अभी नैरोगेज की धीमी रफ्तार के कारण यात्रियों को होती है परेशानी।

अभी प्रस्ताव ही नहीं बने


अब मई के बाद ही हो सकेगा काम

रेलवे को जमीन देने का काम जिला स्तर पर अब मई के बाद ही हो सकेगा, क्योंकि लोकसभा चुनाव के चलते अफसरों की ड्यूटी लगाई जा रही है। पटवारी व कर्मचारियों का चुनावी प्रशिक्षण शुरु हो गया है। ऐसे में अाचार संहिता अाैर चुनावी माहाैल के कारण इस काम काे गति नहीं मिल पाएगी।

एक साल से लटकी है अधिग्रहण की कार्रवाई

रेलवे का प्रोजेक्ट शुरु हुए पांच साल से ज्यादा हो गए हैं। कभी बजट के फेर में यह प्रोजेक्ट अटका तो कभी रेलवे ने इस पर देरी की। बीते एक साल से यह प्रोजेक्ट जमीन अधिग्रहण के फेर में अटका रहा। जिसे भास्कर ने प्रमुखता से प्रकाशित किया और तब जाकर प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण पर कार्रवाई शुरु की। लेकिन अब यह प्रोजेक्ट फिर से लटक रहा है, जिसमें प्रस्ताव तैयार न होने से देरी हो रही है।

तहसीलों में मुआवजे के प्रस्ताव ही नहीं बने

रेलवे और राजस्व विभाग की टीमों ने 30 जनवरी से लेकर 15 फरवरी तक जमीन अधिग्रहण को लेकर सर्वे किया। इसमें 300 हेक्टयर जमीन चिह्नित की गई। इसमें करीब 30 हेक्टयर से ज्यादा जमीन वन विभाग की थी, जिसे जमीन के बदले जमीन के तहत अधिग्रहित किया जाना था। लेकिन इस पर भी कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया। इसके अलावा निजी जमीन अधिग्रहण के तहत जमीन के बदले मुआवजे के प्रस्तावों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। तहसील स्तर पर जमीनों के अलग-अलग मुआवजा प्रस्ताव बनने थे, ताकि लोगों को मुआवजा देकर जमीनों का अधिग्रहण करने के साथ जमीनें रेलवे के सुपुर्द की जा सके।

नैरोगेज में यात्रियों को नहीं मिल रहीं सुविधाएं

वर्तमान श्योपुर से ग्वालियर व सबलगढ़ के लिए चार नैरोगेज ट्रेनें संचालित हैं, जिससे श्योपुर के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग रोजाना आते-जाते हैं। हजारों की संख्या में आने जाने वाले यात्री उस समय बेहद परेशान होते हैं, जब ट्रेन का इंजन बीच रास्ते में फेल हो जाता है। यहां तक की ट्रेन की बोगियों में भी सीटें टूटी हुईं हैं और पानी व पंखे के भी कोई इंतजामात नहीं हैं। इसके अलावा कई बार ट्रेन बीच जंगल में भी कई बार खड़ी हो जाती है जिससे परेशान होकर ग्रामीण ट्रेन से उतरकर ही अपने रास्ते पर पैदल ही निकल जाते हैं। वहीं ट्रेनों में शीशे भी नहीं लगे हुए हैं जिससे बारिश होने पर पूरा पानी ट्रेन के अंदर ही आ जाता है। ऐसे में यात्री बारिश में ट्रेन में भीग जाते हैं। बावजूद इसके यात्रियों की परेशानी अधिकारियों द्वारा देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है और न ही ट्रेन का मेंटेनेंस कराया जा रहा है।

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