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आदिवासी बस्ती में सफाई करने नहीं पहुंचते कर्मचारी, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

एक वर्ष पहले
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ग्राम पंचायत पांच साल में भी तय नहीं कर पाई कस्बे के 20 वार्डों में कचरा स्थल

ट्राइबल मुख्यालय कराहल कस्बे में बरसों से आदिवासी बस्तियों में सफाई नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 20 वार्डों में विभाजित कस्बे की सफाई व्यवस्था पंचायत के 20 सफाई कर्मियों के हवाले होने के बावजूद सफाई की तस्वीर नहीं बदल पा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि स्वच्छता मिशन के बावजूद कस्बे के 20 से ज्यादा मोहल्लों में ग्राम पंचायत की ओर से सफाई की व्यवस्था नहीं है, कस्बे में सिर्फ चार मोहल्लों में ही नियमित साफ सफाई होती है कस्बे की सभी आदिवासी और दलित बस्तियों में सफाई का कोई इंतजाम नहीं है। घरों के आगे गंदगी के ढेरों से इन दिनों लोगों को खासी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत पंचायत व प्रशासन के अधिकारियों से की है। लोगों का कहना है कि उनके मोहल्लों में सफाईकर्मी नही आते हैं। जिम्मेदार अधिकारी भी अनसुनी कर रहे हैं। वहीं इस संबंध में पंचायत सचिव का कहना है कि उन्होंने हाल ही में जोइन किया है, वे जल्द इस ओर पहल करेंगे।

कहने को तो पूरे देश में स्वच्छ भारत मिशन चल रहा है लेकिन सफाई हकीकत देखनी हो तो कराहल के आदिवासी बस्तियों की तस्वीर भी देख लीजिए। यहां के 20 वार्डों में हर बार्ड में 1-1 सफाई कर्मी नियुक्त है, बावजूद इसके यहां 16 वार्ड गंदगी से भरे पड़े हुए हैं। गली मोहल्लों में सफाई नहीं होने से जगह जगह कूड़े के ढेर और रास्तों पर कीचड़ ही दिखाई देता है। वर्तमान में संजय कॉलोनी, बड़ी आदिवासी कॉलोनी, अचार वाला सहराना में हालात खराब हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यहां पंचायत में साल भर पहले सफाई का मुद्दा उठा था। तब सरपंच नंदकिशोर आदिवासी ने गांव की बस्तियों में सफाई कराने की बात कही थी। साथ ही कुछ दिनों तक यहां सफाई कर्मी सफाई करने के लिए पहुंचे थे। लेकिन पिछले कई महीनों से पंचायत का कोई भी सफाईकर्मी यहां सफाई करने के लिए नहीं पहुंच रहा है।

सरपंच के ही गांव में 5 साल से नहीं हुई सफाई

कराहल पंचायत क्षेत्र के ग्राम सोनीपुरा कभी भी पंचायत द्वारा सफाई नहीं कराई जाती है। जबकि सरपंच नंदकिशोर आदिवासी इसी गांव में निवास करते हैं। सरपंच द्वारा स्वयं प्रयास करने के बावजूद भी सफाई व्यवस्था चालू नहीं हो पाई है।

सिर्फ चार मोहल्लों में होती है सफाई

नगर के पालीवाल चौक, ब्राह्मण मोहल्ला, मैन बाजार, करिया देह तिराहे सफाई कर्मी सफाई करते देखे जा सकते हैं। पूरे गांव में सफाई यहीं होती है। जबकि आदिवासी बस्ती में निवास करने वाले लोगों का कहना है कि जहां सरपंच रहते हैं वहीं गंदगी के ढेर लग रहे हैं। पंचायत द्वारा हमारे लिए सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं हमारे बच्चे भी संक्रमित बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।

आदिवासी बस्तियों में कभी नहीं होती सफाई

कस्बे में अधिकांश आबादी आदिवासी और दलित समाज की है। आदिवासी एवं दलित बाहुल्य बस्तियों में सफाई नहीं होती है। जबकि ग्राम पंचायत द्वारा मैन रोड और मैन बाजार क्षेत्र में सफाई कराई जा रही है। रामविलास आदिवासी ने बताया कि अचार वाला सहराना में हमने कभी भी सफाईकर्मी आते नहीं देखे हैं।

अब हम आदिवासी बस्तियों में कर्मचारी भेजकर शुरू कराएंगे सफाई, लोगों को नहीं होगी परेशानी

पूरनचंद्र मीणा, सचिव ग्राम पंचायत कराहल

कराहल कस्बे के अचार वाला सहराना मेंं नाली व सफाई का प्रबंध न होने से बने गंदगी के हालात।
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