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आदिवासी-दलितों की जमीन छुड़ाने न बैठकें की न कार्रवाई

एक वर्ष पहले
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आदिवासी व दलितों की जमीन छुड़ाने के लिए हाईकोर्ट ने दिए थे आदेश

एकता परिषद के द्वारा लगाई गई याचिका पर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को जिला व तहसील स्तर पर बैठक कर दलित और आदिवासियों की जमीनों से कब्जे छुड़ाने और जमीन पर काबिज कराने के आदेश दिए थे। लेकिन न तो इस पर जिला स्तर पर बैठकें की जा रही है और नही तहसील स्तर पर।

गौरतलब है कि एकता परिषद की याचिका पर हाईकोर्ट ने 2008 में आदेश दिए कि एससी-एसटी वर्ग को उनकी जमीनों पर काबिज करने के लिए प्रदेश स्तर, जिला स्तर व तहसील स्तर पर समिति गठित की जाए और हर माह की 30 तारीख को बैठक करने के साथ प्रकरण चिह्नित करते हुए कब्जे दिलाए जाए। जबकि मामले में तीन महीने तक निगरानी की जाए और इससे भी हाईकोर्ट को अवगत कराया जाए। इस आदेश पर प्रशासन की ओर से जिला स्तर व तहसील स्तर पर कमेटी तो गठित की गई, पर इन पर कार्रवाई के लिए बैठकें नहीं की गई। जिससे पट्टेधारियों की सूची बन सके, उनकी जमीनों पर हुए अतिक्रमण व अन्य लोगों को हटाया जा सके। इस पर एकता परिषद ने हाईकोर्ट के आदेश की पालना न होने पर अवमानना दायर कर दी। जबकि पूर्व में अवमानना का जवाब देते हुए 85 एससी-एसटी वर्ग के लोगों को जमीनों पर कब्जे दिलाने का जवाब दिया गया।

इस मामले में एसडीएम सरूपेश उपाध्याय ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के पालन में हर माह तहसील स्तर पर बैठकें की जा रही है और मामले में कब्जे दिलाने की कार्रवाई भी की जा रही है।

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