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सामुदायिक अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं, गंभीर झुलसे मरीजों को समय पर नहीं मिल रहा इलाज

Sheopur News - विजयपुर और कराहल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बर्न यूनिट नहीं होने से आगजनी में झुलसे मरीजों को ग्वालियर और...

Dec 04, 2019, 10:37 AM IST
विजयपुर और कराहल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बर्न यूनिट नहीं होने से आगजनी में झुलसे मरीजों को ग्वालियर और कोटा रैफर करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा समस्या विजयपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आग से झुलसे हुए मरीजों को आती है। यहां मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर और कोटा रैफर कर दिया जाता है। आगजनी में झुलसे मरीजों को कई बार इलाज में देरी होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बर्न यूनिट खोलने के लिए अस्पताल प्रबंधन पत्राचार कर चुका है। लेकिन नियमों के फेर में मामला अटका हुआ है।

कराहल और विजयपुर क्षेत्र में मिलाकर करीब एक महीने में 120 से 150 तक बर्निंग केस आते हैं। लेकिन इन केंद्रों पर वर्न वार्ड नहीं होने से मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल रैफर कर दिया जाता है। कराहल और बड़ौदा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रैफर होने वाले मरीजों को 50 से 60 किमी दूर श्योपुर रैफर कर दिया जाता है। लेकिन सबसे ज्यादा समस्या विजयपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले मरीजों को होती है। यहां आने वाले 50 प्रतिशत झुलसे मरीजों को 120 किमी दूर सीधा ग्वालियर रैफर कर दिया जाता है। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को देरी होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही मरीजों को कई बार जान पर भी बन आती है। विजयपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ ने बताया कि उन्होंने अस्पातल में नेत्र विभाग और बर्न यूनिट खोलने की मांग रखी थी। लेकिन नियमों के फेर में यह मांग अटक गई।

विजयपुर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जहां नहीं है बर्न यूनिट।

100 से 150 गांव तक निर्भर होता है सीएचसी

जिले में बने तीन सीएचसी केंद्र 100 से लेकर 150 गांव तक निर्भर बने हुए है। शहर से 30 किमी दूर बड़ौदा में 98 गांव के लोग सीएचसी पर इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। तो वहीं जिले से 55 किमी दूर कराहल में तकरीबन 150 गांव के लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। सबसे ज्यादा समस्या विजयपुर के लिए लोगों के लिए होती है। जिले से 170 किमी दूर बसे विजयपुर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर करीब 110 गांव के लोग इलाज कराने के लिए आते हैं। ऐसे में विजयपुर से ग्वालियर तक की दूरी करीब 120 किमी है। ऐसे में यहां आने वाले बर्निंग केस को ग्वालियर रैफर कर देते हैं।

नियमों के फेर में अटका रहता है मामला

सीएचसी केंद्र पर बर्न वार्ड बनाए जाने का नियम नहीं है। ऐसे में किसी भी सीएचसी केंद्र पर बर्न वार्ड नहीं खोला गया है। सीएचसी केंद्र से कई बार बर्न वार्ड खोलने की डिमांड अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। लेकिन नियमों के फेर में हर बार डिमांड अटक जाती है। इस वजह से लोगों को बर्न वार्ड की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

गंभीर झुलसे लोगों को समय पर नहीं मिल पा रहा इलाज

कराहल में 11-12 सितंबर की रात में कराहल क्षेत्र में लाइट नहीं होने के चलते गीता आदिवासी के ऊपर जलती हुई चिमनी गिर गई थी। उन्हंे कराहल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर जाया गया। जहां से उसे तत्काल श्योपुर के जिला अस्पताल में रैफर कर दिया गया। तो वहीं विजयपुर के इकलौद में गौमती आदिवासी का अपने पति से पैसों को लेकर 26 सितंबर को विवाद हो गया था। जिसको लेकर गौमती ने अपने ऊपर केरोसिन डालकर आग लगा ली। उसे तत्काल विजयपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भेजा गया। जहां से उसे ग्वालियर रैफर कर दिया गया।

अस्पताल में बर्न यूनिट शुरू हो, इसके लिए प्रस्ताव भेजेंगे

पूर्व में शासन को बीएमओ ने विजयपुर में बर्निंग केस की जानकारी देते हुए यहां बर्न यूनिट खोलने की मांग की थी। साथ ही प्रस्ताव भी बनाकर भेजा था। लेकिन अभी तक यहां बर्न यूनिट बनाने के लिए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया है। इस वजह से हमें मरीजों को रैफर करना पड़ जाता है। हम दोबारा प्रस्ताव बनाकर भेंजेंगे। डॉ. केएल पचौरिया, बीएमओ, विजयपुर

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