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प्रतिबंध के बाद भी उपयोग हो रहीं अमानक थैलियां, जिम्मेदार हैं मौन

2 वर्ष पहले
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शासन द्वारा पूरे प्रदेश में अमानक प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लेकिन इसके बावजूद भी नगर में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है और न ही जिम्मेदार अधिकारी उसका पालन कराने के लिए सजग दिख रहे हैं। ऐसे में हर जगह पॉलीथीन का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। किराना, होटल, सब्जी व्यापारी सहित फलों के ठेले वाले भी 40 माइक्रॉन से कम मोटाई वाली थैली का उपयोग कर रहे है। वहीं व्यापारियों का कहना है कि कुछ ग्राहक थैली लेकर नहीं आते हैं तो हमें पॉलीथीन को अपनी दुकान पर रखना पड़ता है।

साल 2011 में केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर 40 माइक्रॉन से कम मोटाई वाली प्लास्टिक थैली (पॉलीथीन) के उपयोग पर रोक लगा रखी है। इसके बाद शहर में कुछ दिनों तक अभियान चलाकर भी दुकानों पर से पॉलीथीन जब्त करने की कार्रवाई की गई थी लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद साल 2017 में भी 1 मई को एक बार फिर मप्र शासन द्वारा प्लास्टिक थैली के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगाने की घोषणा की गई थी। लेकिन वर्तमान में पॉलीथीन पर रोक लगाए जाने को लेकर कोई मुहिम शुरू होती दिखाई नहीं दे रही है। जिस वजह से इन अमानक थैलियों का उपयोग दुकानदार करते दिखाई दे रहे हैं। 40 माइक्रॉन से कम मानक की थैलियों का उपयोग पर्यावरण और मवेशियों के लिए हानिकारक होता है। साथ ही इन थैलियों की वजह से नालियां भी चौक हो जाती हैं। जिस वजह से नालियों का पानी सड़क पर बहने लगता है। ये हालात अकेले विजयपुर के नहीं है। बल्कि पूरे श्योपुर अंचल में ऐसी थैलियों का उपयोग किया जा रहा है।

विजयपुर में दुकान पर रखीं अमानक थैलियाें का हाे रहा धड़ल्ले से उपयाेग।

सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से चलाए अभियान

केंद्र सरकार ने पॉलीथिन के दुष्परिणामों को देखते हुए 1 फरवरी 2011 से इसके उपयोग पर रोक लगाई थी। जिला प्रशासन को समय-समय पर निर्देश जारी किए गए। सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से नपा और नप में कई बार पॉलिथिन उपयोग के खिलाफ अभियान चलाकर जनजागरण कर चुकी है। दुकानदारों को पॉलीथिन के उपयोग न करने की चेतावनी भी दी जा चुकी है। इसके बाद पॉलीथिन के उपयोग पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा सका है। लगातार बढ़ रहे प्लास्टिक थैली का उपयोग गली-गली में दिखाई दे रहा है। बाजार में अमानक स्तर के पॉलीथिन की भरमार है। छोटे से लेकर बड़े व्यापारी तक इन पॉलीथिन का उपयोग कर रहे हैं। शहर और गांवों में कई बड़े सामाजिक संगठन पॉलीथीन के उपयोग को कम करने के लिए जन जागरण अभियान चला चुके हैं। लेकिन कार्रवाई के अभाव में इनका उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है।

जीव-जंतुओं के लिए हंै हानिकारक

अमानक थैली के उपयोग न करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा कई नियम बनाए गए हैं। भारत सरकार के ठोस अपशिष्ट निवारण अधिनियम के तहत 40 माइक्रॉन से कम के मानक की थैली पर्यावरण को प्रदूषित करती है। जानकारों का कहना है कि इस पॉलीथीन को रिसाइकल नहीं किया जा सकता है। जिससे यह प्रदूषण का कारण बनती है। सबसे ज्यादा नुकसान आवारा मवेशियों और जीव-जंतुओं को उठाना पड़ता है। पॉलीथिन में खाद्य सामाग्री ले जाने के बाद उसे सड़कों पर फेंक दिया जाता है। जिस वजह से उसे आवारा मवेशी खा लेते हैं। जो कि नुकसानदायक होता है।

सफाई में 60 फीसदी तक निकल रही पॉलीथीन

शहर और अंचल में सबसे ज्यादा इन अमानक थैलियों का उपयोग किया जा रहा है। पॉलीथिन के कारण नालियां जाम हो रही हैं। इससे गंदा पानी सड़कों तक आ जाता है। जो राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। शहर में सफाई के दौरान नालियों से 60 फीसदी तक नालियों में से पॉलीथीन निकल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ लोग पॉलीथीन को कचरे में ने फेंकते हुए नालियों में फेंक देते हैं। जिस वजह से नालियों का पानी सड़क पर बहने लगता है। जिस वजह से नालियों में पॉलीथिन फंस जाती है और सड़क पर पानी बहने लगता है।

जो भी गलत करेगा, उस पर कार्रवाई होगी

अमानक पॉलीथीन उपयोग करने वाले लोगों पर की जाएगी कार्रवाई

अमानक पॉलीथीन का उपयोग पर रोक लगाई गई है। जो लोग भी शहर में अमानक थैली का उपयोग कर रहे हैं उन पर कार्रवाई की जाएगी साथ ही 40 माइक्रॉन से कम की थैली का न रखने के लिए हिदायत भी दी जाएगी। अजीज खान, सीएमओ, विजयपुर

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