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अब मजदूरी का भी दो माह नहीं होगा भुगतान, गांवों से पलायन की आशंका
सरपंच-सचिव के हस्ताक्षर से नहीं हों सकेंगे भुगतान
पंचायतों के बजट वितरण और संवितरण पर रोक लगाई जा रही है, जिसके आदेश भी शासन ने जिला पंचायत को दे दिए है। यानी यहां जिन मजदूरों को भुगतान धीरे-धीरे कर किया जा रहा था, उन्हें अब भुगतान नहीं मिलेगा। ऐसे में पंचायतों में काम-काज बंद हो जाएंगे। जिसके चलते गांवों से मजदूरों का पलायन बढ़ जाएगा। 14 मार्च को पंचायतों में सरपंचों ने कार्यभार संभाला था, यह तारीख 6 दिन बाद आ रही है। जिसके आने के साथ ही सरकार बजट न तो जारी करेगी और न ही पूर्व में आए बजट से सरपंच-सचिवों के हस्ताक्षर पर पंचायतों के भुगतान हो सकेंगे। क्योंकि इस पर सरकार प्रदेशभर में 12 मार्च से रोक लगाने जा रही है। जिसके चलते जिले की 225 पंचायतों में नरेगा के मजदूरों के भुगतान भी नहीं होंगे।
वर्तमान में 81 हजार जॉबकार्डधारी मजदूरों का 1 करोड़ 5 लाख 63 हजार रुपए का भुगतान होना, जिसे पंचायत के सरपंच-सचिवों द्वारा जिला पंचायत को भुगतान के लिए मस्टररोल बनाकर दे दिए गए है। जिसमें धीरे-धीरे उक्त भुगतान किया जा रहा था। लेकिन अब यह भुगतान पूरी तरह से सरकार की रोक के चलते अटक जाएगा। ऐसे में गांवों में जब मजदूरों को न तो काम मिलेगा और न ही नरेगा का भुगतान। जिसके फेर में विजयपुर, कराहल सहित जिले के अन्य गांवों से मजदूरों का पलायन बढ़ जाएगा और मजदूर मजदूरी की तलाश में दूसरे शहर व प्रदेश के बाहर चले जाएंगे।
क्यों लगाई जा रही भुगतान पर रोक?
पंचायतों चुनावों के तहत सरपंचों के कार्यकाल की समय-सीमा समाप्त होने जा रही है। ऐसे में अब शासन ने इन सरपंचों व सचिवों के हस्ताक्षर से होने वाले पंचायत भुगतानों पर रोक लगाने का फैसला लिया है। यहां भी पंचायतों में प्रशासक बैठाए जाएंगे। इसके बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। यानी गरीब मजदूरों को फिर से मजदूरी भुगतान के लिए करीब 2 माह का इंतजार करना होगा। ऐसे में गांवों से मजदूरी के फेर में पलायन की नौबत आ जाएगी।
लगाई जा रही भुगतान पर रोक
पूर्व में सामग्री भुगतान की राशि भी रुकी, अब मजदूरों का भुगतान भी अटेगा, अब प्रशासक की नियुक्ति के बाद हो सकेंगे भुगतान
छह माह से भुगतान नहीं वर्तमान में 7913 काम रुके
वर्तमान में 7913 काम लंबित बने हुए है। इस वर्ष 2019-20 में सरकार ने 2643 निर्माण कार्य स्वीकृत किए, जिनमें से भी 2575 काम अधूरे बने हुए है। जबकि पूर्व से चल रहे कामों की रफ्तार बजट के फेर में धीमी पड़ गई है। जिनमें भुगतान न होने के चलते बीच-बीच में रुकावट पैदा हो रही है। 6 माह पूर्व से मनरेगा में सामग्री भुगतान नही हो रहा है।
मजदूरी भुगतान व किस्त न मिलने के फेर अधूरा पड़ा पीएम अावास।
भुगतान रुकने पर यह होगा काम पर असर
पंचायतों में हर तरह का भुगतान पर पूर्ण तरह से रोक लग जाएगी। इसके चलते नरेगा के पीएम आवास, पशुशेड, गौशाला निर्माण, सीसी रोड निर्माण, बोर खनन सहित अन्य निर्माण कार्य रुक जाएंगे। ऐसे में जिले में स्वीकृत करीब 3 हजार पीएम आवास हितग्राहियों को भी यहां करीब दो महीने से ज्यादा समय तक भुगतान के फेर में न तो मजदूरी मिलेगी और न ही भवन निर्माण के लिए किस्तें। गांवों में पंचायत के सरपंच हैंडपंप खनन तक की अनुमति नहीं दे सकेंगे, जिससे गांवों में पेयजल का संकट भी बढ़ जाएगा।