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66 में से सिर्फ एक नल-जल याेजना पीएचई अफसरों ने बंद बताई, भास्कर पड़ताल... बीस से ज्यादा बंद

एक वर्ष पहले
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टंकियाें के घटिया निर्माण अाैर पाइप लाइन फूटी हाेने से पंचायताें ने हैंडओवर ही नहीं ली

मार्च के साथ ही गांवों में पेयजल संकट होने लगेगा। इसका सबसे ज्यादा असर कराहल क्षेत्र में होता है, क्योंकि न तो यहां पीएचई के कर्मचारी हैंडपंप व ट्यूबवेलों को दुरुस्त करने पहुंचते हैं और न ही इनकी शिकायतें सुनी जाती हैं। जब कलेक्टर ने गर्मी के सीजन में पेयजल को लेकर समीक्षा बैठक बुलाई तो इसमें उन्हें 66 में से 65 नल-जल योजनाएं चालू बता दीं। सिर्फ नयागांव तेखंड की नल-जल योजना बिजली के कारण बंद होना बताई। जबकि हकीकत यह है कि 20 नल-जल योजनाएं साल 2007-2008 से बंद पड़ी हैं।

जिले में नलजल योजना के तहत स्थल जल योजना भी गांवों में शुरू की गई, जहां पानी की टंकी बनाकर उक्त स्थान से पानी दिनभर ले जाने के बोर कराई गई लेकिन गांवों में यह योजनाएं बनने के साथ ही बंद पड़ी हैं।

कलेक्टर के सामने पीएचई अफसराें का झूठ; कहीं टेस्टिंग में ही फूटी निकली पाइप लाइन, कहीं टैंक के किए गए घटिया निर्माण


1. मेवाड़ा: यहां भी 2007 में ही नल-जल योजना की शुरुआत की गई और ओवरहैड टैंक का निर्माण कराते हुए पाइप लाइन बिछाई गई। लेकिन यह नल-जल योजना कभी चालू ही नहीं हुई, क्योंकि इसकी आधी से ज्यादा पाइप लाइन टेस्टिंग में ही फूटी निकली, जिसका सुधार पीएचई ने दोबारा कराया ही नहीं और पंचायत ने इसे अपने जिम्मे लेने से इनकार कर दिया।

2. गुरुनावदा: पंचायत के भीखापुर इलाके में नल-जल योजना के तहत ओवरहैड टैंक बनाया गया और पानी की पाइप लाइन बिछाई गई। इस योजना से ग्रामीणों को सिर्फ 15 दिन ही पानी मिल सका, जबकि टेस्टिंग के बाद ओवरहैड टैंक के घटिया निर्माण की बात कहते हुए पंचायत ने इसे चलाने से इनकार कर दिया। बावजूद इसके इस योजना को भी विभाग चालू बता रहा है।

3. सामरसा: कीर गांव पंचायत में नल-जल योजना की शुरुआत की गई, लेकिन यहां भी ग्रामीणों को घर-घर टंकी से पानी सप्लाई नहीं की गई। यह योजना भी विभाग ने अपने रिकॉर्ड में चालू बताई है, जबकि मौके पर इस योजना से ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा। यहां ग्रामीण खुद के निजी ट्यूबवेलों से पानी की व्यवस्था करते हैं। इसके अलावा चंबल नदी से पानी लाने का जोखिम भी उठाते हैं।

4. हीरापुरा: विजयपुर विकासखंड के हीरापुरा में काम पूरा होने के बाद भी नल-जल याेजना पीएचई ने चालू नहीं कराई। जबकि पंचायत ने इस पर ठहराव-प्रस्ताव तक किया कि उक्त ओवरहैड टैंक का निर्माण घटिया कराया गया, क्योंकि टंकी तिरछी बनाई गई है। इसलिए पंचायत ने इसे लेने से ही इनकार कर दिया, नतीजा यहां गांव में नल-जल योजना बंद है।

लापरवाही: जिन नल-जल याेजनाअाें से कभी पानी मिला ही नहीं, उन्हें भी पीएचई ने चालू बता दिया


जिले में नल-जल योजनाओं ने तोड़ा दम, फिर भी चालू बता रहे पीएचई अफसर

जिले में नल-जल योजना के तहत स्थल जल योजना भी गांवों में शुरु की गई, जहां पानी की टंकी बनाकर उक्त स्थान से पानी दिनभर ले जाने के बोर कराई गई। लेकिन गांवों में यह योजनाएं बनने के साथ ही बंद पड़ी हुई है। कराहल के आमेठ, बनार, तसावनी, डोब, बीलडबरा सहित अन्य गांवों में स्थल जल योजना बनने के साथ ही बंद है। जिन्हें चालू कराने की जिम्मेदारी विभाग ने दोबारा कभी ली ही नहीं। जबकि इसे लेकर लगातार शिकायतें की गई, गांव की महिलाएं दूर-दराज इलाकों से जाकर पानी लाती हैं। इसके अलावा कलमी गांव में भी स्थल जल योजना सड़क किनारे होने के बाद भी बंद है, जबकि यहां से कई अफसर रोजाना गुजरते हैं।

पंचायतों में जाकर करेंगे बात

संतोष श्रीवास्तव, ईई, पीएचई

नहीं होने देंगे पेयजल संकट, चालू कराएंगे योजना


हीरापुरा में बंद नल-जल योजना का ओवरहैड टैंक।
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