वासनाओं का त्याग करके ही प्रभु से मिलना होता है संभव: शास्त्री

Sheopur News - नारायण की भक्ति में करने में ही परम आनंद आता है। उसकी वाणी में सागर के मोती समान भाषा आती है। वह ईश्वर के रस में डूब...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:50 AM IST
Virpur News - mp news the desire to meet the lord by sacrificing desires is possible shastri
नारायण की भक्ति में करने में ही परम आनंद आता है। उसकी वाणी में सागर के मोती समान भाषा आती है। वह ईश्वर के रस में डूब जाता है। भगवान तो प्रेम के भूख होते हैं। जो व्यक्ति अपनी वासनाओं को त्यागकर ईश्वर से प्रेम करने लगते है उसका ईश्वर से मिलन हो सकता है इसलिए वासना को वस्त्र की भांति त्याग देना चाहिए। भागवत कथा का जो श्रवण करता है उस पर ईश्वर का आर्शीवाद बना रहता है। जो भगवान में भाव रखता है और अपने माता पिता की सेवा करता है उस पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है। यह प्रवचन वीरपुर में बहेड़ी वाले हनुमान मंदिर पर चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक श्याम सुंदर शास्त्री ने कही।

उन्होंने कहा माता पिता का स्थान इस संसार में प्रत्यक्ष देवता से कहीं बढ़कर होता है। उनकी सेवा ही भगवान की सच्ची सेवा होती है। आप भगवान का भजन न करें, मंदिर में भगवान के दर्शन करने न जाएं, भगवान की कथा नहीं सुनें तो भी चलेगा लेकिन माता पिता की सेवा जरूर करें। जो अपने माता पिता की सेवा नहीं करत है उसे नरक में भी स्थान नहीं मिलता है।

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