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10 ब्रह्मचारियों ने तोड़ा घर परिवार से रिश्ता-नाता, दिगंबरी दीक्षा लेकर वैराग्य पर निकले

3 वर्ष पहले
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संसार मार्ग से नाता तोड़कर वैराग्य मार्ग पर चलने 10 युवा ब्रह्मचारी निकल पड़े। जैनाचार्य विद्यासागर महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण कर इन युवाओं ने दीक्षा संस्कार ग्रहण किए और पल भर की देरी में तन पर पहने धोती दुपट्टे और लंगोटी को खोलकर दिगंबर वेष धारण कर लिया।

दरअसल जैन दर्शन में एक बार जो मुनि व्रत अंगीकार कर लेता है वह मोक्षमार्ग की साधना करते हुए जीवन भर इसी वेष में रहता है। इसीलिए इस अनमोल पल को देखने के लिए देश भर के जैन श्रद्धालु दर्शनार्थ उस स्थान पर पहुंचते है जहां दीक्षा हो रही है। यही कारण है कि ललितपुर में आयोजित दीक्षाओं में शामिल होने के लिए देशभर के लाखों लोगों ने ललितपुर का रुख किया और इस आयोजन में शिवपुरी से भी सैकडों श्रद्धालु दीक्षा महोत्सव देखने गए।

दीक्षार्थी में एक एमटेक डिग्रीधारी: राधौगढ़ निवासी अर्पित भैया ने जेपी कॉलेज से कंप्यूटर साइंस से बीटेक की डिग्री ली और इसके बाद एमटेक भी किया। भोपाल और इंदौर के कॉलेज में वह प्रोफ़ेसर भी रहे ।और उन्हें लाखों का पैकेज मिला। लेकिन भोपाल में आचार्य विद्यासागर महाराज के चतुर्मास के दौरान वह उनके संपर्क में आए और फिर संसार से नाता तोड़ वैराग्य की ओर कदम बढ़ाते हुए ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया ।इंदौर में समय सागर महाराज के चातुर्मास के दौरान वह उनके संपर्क में आए और फिर व्रतों को अंगीकार करते हुए उन्होंने मुनि दीक्षा के लिए आचार्य विद्यासागर महाराज के चरणो में निवेदन किया। और उनका निवेदन स्वीकार हो गया। और अब वह अर्पित भैया से मुनि निर्लेप सागर जी बन गए।

ललितपुर में आयोजित कार्यक्रम में ब्रह्मचारियों को दीक्षा देते जैनमुनि।

किसो को निर्भय सागर तो किसी को मिला निरंजन सागर नाम
जैन दर्शन में ऐसी व्यवस्था है कि घर गृहस्थी के साथ दीक्षार्थी का नाम भी बदल दिया जाता है।इसीलिए जैनाचार्य विद्यासागर महाराज ने दीक्षार्थियों के नाम में बदलाव करते हुए नवदीक्षित मुनि महाराजों के यह नाम दिए जिसमें ब्र.श्रेयांश भैया बुढ़ार को मुनि निर्ग्रन्थसागर महाराज, ब्र.मोनू भैया पनागर को मुनि निर्भ्रांतसागर महाराज, ब्र.मोनू भैया पथरिया मुनि निरालससागर महाराज,ब्र.नितेन्द्र भैया नरसिंहपुर मुनि निराश्रवसागर महाराज,ब्र.पिंकेश भैया हाटपिपल्या,मुनि निराकारसागर महाराज,ब्र.आकाश भैया सागर मुनि श्रीनिश्चिंतसागर महाराज, ब्र.दीपक भैया संदलपुर मुनि निर्माणसागर महाराज, ब्र.सतीश भैया खुरई मुनि निशंकसागर महाराज, ब्र.मनीष भैया इंदौर मुनि निरंजनसागर महाराज,ब्र.अर्पित भैया इंदौर मुनि निर्लेपसागर महाराज नाम दिया गया है।

भास्कर संवाददाता|शिवपुरी

संसार मार्ग से नाता तोड़कर वैराग्य मार्ग पर चलने 10 युवा ब्रह्मचारी निकल पड़े। जैनाचार्य विद्यासागर महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण कर इन युवाओं ने दीक्षा संस्कार ग्रहण किए और पल भर की देरी में तन पर पहने धोती दुपट्टे और लंगोटी को खोलकर दिगंबर वेष धारण कर लिया।

दरअसल जैन दर्शन में एक बार जो मुनि व्रत अंगीकार कर लेता है वह मोक्षमार्ग की साधना करते हुए जीवन भर इसी वेष में रहता है। इसीलिए इस अनमोल पल को देखने के लिए देश भर के जैन श्रद्धालु दर्शनार्थ उस स्थान पर पहुंचते है जहां दीक्षा हो रही है। यही कारण है कि ललितपुर में आयोजित दीक्षाओं में शामिल होने के लिए देशभर के लाखों लोगों ने ललितपुर का रुख किया और इस आयोजन में शिवपुरी से भी सैकडों श्रद्धालु दीक्षा महोत्सव देखने गए।

दीक्षार्थी में एक एमटेक डिग्रीधारी: राधौगढ़ निवासी अर्पित भैया ने जेपी कॉलेज से कंप्यूटर साइंस से बीटेक की डिग्री ली और इसके बाद एमटेक भी किया। भोपाल और इंदौर के कॉलेज में वह प्रोफ़ेसर भी रहे ।और उन्हें लाखों का पैकेज मिला। लेकिन भोपाल में आचार्य विद्यासागर महाराज के चतुर्मास के दौरान वह उनके संपर्क में आए और फिर संसार से नाता तोड़ वैराग्य की ओर कदम बढ़ाते हुए ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया ।इंदौर में समय सागर महाराज के चातुर्मास के दौरान वह उनके संपर्क में आए और फिर व्रतों को अंगीकार करते हुए उन्होंने मुनि दीक्षा के लिए आचार्य विद्यासागर महाराज के चरणो में निवेदन किया। और उनका निवेदन स्वीकार हो गया। और अब वह अर्पित भैया से मुनि निर्लेप सागर जी बन गए।

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