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बारिश का पानी सहेजकर भू-जलस्तर बढ़ाने जिले में 125 करोड़ से बनेंगे 21 हजार तालाब

भीषण जलसंकट से जूझ रहे शिवपुरी जिले में अब बारिश का पानी सहेजकर भू-जलस्तर बढ़ाने के प्रयास शुरू हुए हैं। जलाभिषेक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:50 AM IST

बारिश का पानी सहेजकर भू-जलस्तर बढ़ाने जिले में 125 करोड़ से बनेंगे 21 हजार तालाब
भीषण जलसंकट से जूझ रहे शिवपुरी जिले में अब बारिश का पानी सहेजकर भू-जलस्तर बढ़ाने के प्रयास शुरू हुए हैं। जलाभिषेक अभियान के तहत तीन महीने में 125 करोड़ रुपए खर्च कर जिलेभर में खेत तालाब बनाए जाएंगे, सैकड़ों पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार होगा, नए तालाब खुदेंगे। इसके लिए प्रस्ताव स्वीकृत होकर बजट भी मिल चुका है। जल्द ही काम शुरू होगा। यहां बता दें कि अभी जिले में भू-जलस्तर एक हजार फीट तक चला गया है। कई जगह तो धरती का सीना छलनी होने के बाद भी पानी नहीं निकल रहा है। शनिवार को इसी श्रंखला में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पोहरी के किलागेट के पास 30 लाख रुपए के 550 मीटर लंबे, 3 मीटर चौड़े व 4 मीटर गहरे तालाब का भूमिपूजन कर जलाभिषेक अभियान की शुरुआत की गई। इस तालाब में 30 मीटर लंबे घाटों को बनाए जाने की भी योजना है ताकि यहां भरा जाना वाला पानी मवेशी खराब न कर दें।

हालात...1000 फीट तक पहुंचा जलस्तर, कई जगह फिर भी नहीं निकल रहा पानी

जानिए...शिवपुरी में क्यों है जल संरचनाओं की जरूरत

शिवपुरी जिले में सिंध नदी और सांख्य सागर डैम के अतिरिक्त कोई भी बड़ी जल संरचना नहीं है, जिसमें बारिश के पानी को बड़े स्तर पर स्टोर किया जा सके।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सीसी सड़कों के निर्माण से बारिश का पानी जमीन के अंदर नहीं पहुंच पा रहा।

पथरीला इलाका होने की वजह से बरसात के पानी को रोके जाने का रास्ता नहीं है और बारिश का पानी नदी, नालों में बह जाता है।

खेत तलाब, चेकडैम, वाटरशेड संरचनाएं पानी सहेजने के लिए न के बराबर हैं।

जलाभिषेक अभियान: यह काम होंगे

20 हजार खेत तालाब बनेंगे: इसके लिए प्रति तालाब करीब डेढ़ लाख खर्च होंगे।

840 पुराने तालाबों व 600 नए तालाबों का जीर्णोद्धार। प्रति तालाब करीब 50 हजार रुपए की राशि खर्च होगी।

मनरेगा, वॉटरशेड, सहित अन्य मदों में आए बजट को मिलाकर पूरी योजना तैयार की गई है।

आगे क्या: इतना करने के बाद भी जिले को 1000 एमएम बारिश की जरूरत

जिला पंचायत एसीओ ब्रहमेंद्र गुप्ता का कहना है कि अगर इन सभी परियोजनाओं पर ईमानदारी से 100 प्रतिशत अमल हो जाए। फिर भी जिले में औसतन एक हजार एमएम बारिश की जरूरत है। जबकि इस समय जिले में बारिश का औसत 816 एमएम है।

हमने शुरुआत की है, लोग भी आगे आएं

जिले में इस साल जलाभिषेक के तहत यह कोशिश की जा रही है कि छोटी-छोटी जल संरचनाएं विकसित की जाएं जिसमें अधिक से अधिक बारिश का पानी सहेजा जा सके। आम जनता को भी इसमें अब भागीदारी उठानी पड़ेगी। आगे आना होगा। राजेश जैन, सीईओ जिला पंचायत शिवपुरी

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