• Home
  • Madhya Pradesh News
  • Shivpuri
  • कम बारिश से गिर गया उत्पादन, अब जंगली जानवरों ने किया 20% नुकसान
--Advertisement--

कम बारिश से गिर गया उत्पादन, अब जंगली जानवरों ने किया 20% नुकसान

शिवपुरी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले आधा दर्जन गांव के किसान ओलावृष्टि व सूखाग्रस्त से हुई फसल बर्बाद की मार से उभरे...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 05:35 AM IST
शिवपुरी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले आधा दर्जन गांव के किसान ओलावृष्टि व सूखाग्रस्त से हुई फसल बर्बाद की मार से उभरे ही नहीं है,कि अब गांवों के किसानों को तीसरी मार जंगली सूअरों व हिरणों के द्वारा होने लगी है। स्थिति यह है कि रबी की फसल चना, गेंहूं सहित अन्य फसलों में ये जानवर दिन व रात कभी भी अपनी आमद दर्ज कराकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिससे किसानों की चना व गेहूं में 10 से 20 फीसदी नुकसान होने का किसान दावा कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि हम पहले से ही ओलावृष्टि व सूखा के चलते परेशान चल रहे थे। लेकिन अब सुअरों व हिरणों के द्वारा हमारी रबी की फसलों को बड़ी संख्या में आकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। किसानों ने बताया है कि इस संबंध में हमने जनसुनवाई से लेकर सीएम हेल्प लाइन तक शिकायतें दर्ज करा चुके हैं। इसके बाद भी हमारी समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा है। वन अफसरों को कहना है कि किसान 48 घंटे में इसकी सूचना राजस्व विभाग को करें। सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें न दर्ज कराएं।

इन गांव के किसानों की फसलों को किया नुकसान

सतनवाड़ा . परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आधा दर्जन से अधिक गांव जो नेशनल पार्क सीमा से लगे हुए हैं। इन गांवों में दिन में हिरण तो रात में जंगली सुआरों व हिरणों द्वारा किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जिसमें ग्राम चिटौरा, सेमरी, चिटोरी, महतपुरा, चंदनपुरा, अमरखोआ सहित वन क्षेत्र से सटे अन्य गांवों के किसानों की चना, गेंहूं के साथ-साथ अन्य फसलें को भी जंगली जानवर खा रहे है।

रखवाली करने के बाद भी चर रहे है फसलें।

सूअरों से फसलें बचाने के लिए किसान अपनी फसलों की की रात-दिन रखवाली कर रहे है। फिर भी जंगली हिरण व सुअरों कुछ ही समय के लिए खाना या कुछ अन्य काम से खेत को सूना छोड़ा तो तत्काल ये जानवर खेतों में प्रवेश कर आते हैं और खड़ी फसल को कर बर्बाद कर जाते हैं।

हिंसक हुए सूअरों से डरे सहमे रहते हैं किसान

किसानों का कहना है कि रात्रि में अपनी फसलों की रखवाली करने जाते है। यदि बिना लाठी या टार्च के सुअरों को फसल से भगाने का प्रयास किया तो कभी-कभी सूअर इतने हिंसक हो जाते है,कि सूअर किसानों के पीछे पड़ जाते है। इससे डेरे सहमे किसान लाठी,टॉर्च और पटाखे लेकर रखवाली कर रहे है।

सूअर भगाने लिया तांत्रिकों का सहारा

जंगली सुअरों से अपनी चना की फसल को बचाने के लिए ग्रामीणों ने कई तरीके अपना रहें है। जिनमें कुछ ग्रामीण तो सुअरों से फसल को बचाने व फसल में सूअर ने आने के लिए ग्रामीण इलाकों के तांत्रिकों से खेम में शराब का छिड़काव करवा रहे है। या फिर खेत में सिंदूर सहित अगरबत्ती लगाई जा रही है।

दर्जनों के झुंड में आ रहे हंै सूअर

किसानों ने बताया है कि सूअर शाम होते ही रात के अंधेरे में 8 से 10 की संख्या में सूअर आते है। जहां और किसान के खेत में चना, गेंहूं की फसल को नष्ट कर जाते है। सुअरों से बचाने के लिए किसान खेतों पर रात भर कंडे जला कर रखते है। सूअर ने केवल चना गेहूं की दाने को खा रहे हैं। बल्कि सूअर कई- कई तो पेड़ों सहित फसल को खा जाते है।

राजस्व विभाग से मिलती है आर्थिक सहायता

जंगली जानवरों द्वारा किसानों की फसलों को पहुंचाई जा रही क्षति से परेशान किसान सीएम हेल्प लाइन सहित अन्य अफसरों से शिकायत कर रहे हैं। इस संबंध में डीएफओ ललित भारती ने बताया है कि किसान फसल नष्ट होने के 48 घंटे में राजस्व विभाग के अधिकारियों सूचना दे। जिससे उसका तत्काल सर्वे हो सके। ज्यादातर किसान सीएम हेल्प लाइन पर शिकायत करते हैं। इससे उन्हें कुछ ज्यादा मिलने वाला नहीं है। उन्हें हम समझाते हैं कि वे राजस्व विभाग में लोक सेवा गांरटी के तहत आर्थिक सहायता के लिए अपना आवेदन कर सकते हैं।

जंगली जानवरों ने फसल को नष्ट कर दिया है


नुकसान की 48 घंटे में दें सूचना