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रिश्तों को कायम रखना हो तो अपनों को भोजन कराओ

Shivpuri News - आपसी रिश्तों को कायम रखना चाहते हो तो अपनों के बीच की दूरी खत्म कर दो। रिश्तों को कायम रखने के लिए आवश्यक है कि...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 04:55 AM IST
रिश्तों को कायम रखना हो तो अपनों को भोजन कराओ
आपसी रिश्तों को कायम रखना चाहते हो तो अपनों के बीच की दूरी खत्म कर दो। रिश्तों को कायम रखने के लिए आवश्यक है कि हमारे अपने ने घर भले ही अलग बना लिए हों,पर रिश्तों में दूरियां न बनाएं। यदि हर 15 दिन या महीने में अपनों को खाने का निमंत्रण देकर घर पर बुलाएंगे तो इस प्रक्रिया से जो अपनत्व बढ़ेगा वह रिश्तों को मजबूत बनाने वाला होगा। यह विचार जैन मुनि प्रभाव सागर महाराज ने सोमवार सुबह 9 बजे छत्री जैन मंदिर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए जैनाचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के शिष्य मुनि प्रभाव सागर ने कहा कि पहले का जो परिवार होता था वह माता पिता के साथ दादा,दादी,बुआ,चाचा,ताऊ,भाई भतीजे से भरा रहता था। तब संस्कार देने की जरूरत नहीं पढ़ती थी,रिश्तों को निभाने की कला घर में ही एक दूसरे अपनत्व ओर आदर को देखकर बच्चे सीख जाते थे और फिर उन रिश्तों को ताउम्र निभाते थे। पर आजकल के हालात बदल गए है। हम दो और हमारे दो के रिश्ते में कैद परिवार हो गया है। न तो माता पिता की चिंता और न ही अन्य रिश्तों की । ऐसे में पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा को निभाने का चलन ही खत्म हो गया है। भाई भाई से अलग है,माता पिता से बेटे अलग है ऐसे में हम यही पैटर्न अपनाते रहे तो परिवार के संबंध ही खत्म हो जाएंगे। इसलिए जरुरी है कि रिश्तों को बनाएं रखें और हफ्ते,महीने या 15 दिन में एक दूसरे के घर जाकर हम पकवान के मीठेपन से रिश्तों में मिठास लाने का प्रयास करें। धर्मसभा के शुभारंभ में मंगलाचरण रामदयाल जैन मावा वालों ने किया जबकि धर्मसभा का संचालन पंडित सुगनचंद जैन ने किया,और विनयांजलि राजकुमार जैन जड़ी-बूटी वालों ने दी।

प्रवचन

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दो दोस्तों की कहानी से सुनाई बताई रिश्तों की हकीकत

उन्होंने दो दोस्तों की कहानी सुनाते हुए कहा कि दो दोस्त आपस में बात करते थे । एक बोला मेरा छोटा सा परिवार है,परिवार में प|ी ,दो बच्चे और मां बाप है। मां बाप भी हमारे साथ रहते हैं। जबकि दूसरे दोस्त ने कहा कि मेरा भी एक छोटा परिवार है,प|ी दो बच्चे और मां बाप है,हम अपने मां बाप के साथ रहते हैं। गौर कीजिए दोनों वाकयों का अर्थ एक ही है लेकिन दोनों के भावार्थों में फूल और पत्थर का अंतर है।

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