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हितग्राही बोले- कमीशन के बाद खातों में आई किस्त, इसलिए अधूरे रह गए आवास

एक वर्ष पहले
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खनियांधाना जनपद पंचायत की 12 ग्राम पंचायतों में शासन से हितग्राहियों को मिले प्रधानमंत्री आवास, इंदिरा व मुख्यमंत्री आवास को दस्तावेज में पूर्ण बताकर पूरी राशि निकाल ली गई है, जबकि हकीकत यह है कि अभी भी गांवों में 10 से 20 फीसदी आवास अधूर बनेे हुए हैं।

हितग्राहियों का आरोप है कि ग्राम पंचायतों के रोजगार सहायक व सचिवों ने आवास की प्रत्येक किस्त पर 2 से 5 हजार रुपए कमीशन लिया है इसलिए अब खाते से तो पूरी राशि निकल गई है और आवास बनाने के पैसे नहीं बचे हैं। इसके चलते अब अधूरे आवास में हम तो निवास नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन मवेशियों के बांधने में उपयोग कर रहे हैं। इतना ही नहीं कही हितग्राहियों का कहना है कि दूसरों के आवास का फोटो खिंचाकर आवास को पूर्ण दिखा दिया है। जबकि हमारे आवास आज भी अधूरे हुए हैं।

ग्राम पंचायतों के रोजगार सहायक व सचिवों का कहना है कि जनपद पंचायत के माध्यम से मिलने वाले प्रधानमंत्री सहित अन्य आवासों की 1 लाख 20 हजार व 15 रुपए की मजदूरी सहित कुल 1.35 लाख रुपए सीधे हितग्राही के खाते में आते हैं और हितग्राही अपने खाते में आने वाली राशि को दूसरे कार्यों में उठा देते हैं इसके बाद आरोप रोजगार सहायक व सचिव के अलावा सरपंचों पर कमीशन का किसी के भी बहकावे में आकर लगा देते हैं। इतना ही नहीं आवास से जुडे अन्य अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी ने कमीशन व रिश्वत ली है तो लेने वाले की बराबर ही देने वाला हितग्राही भी तो इतना दोषी है क्यों कि इसके खाते में राशि आने के बाद भी इन्होंने निकालकर किसी को पैसा क्यों दिया। क्यों कि किसी दूसरे का पैसा उनके खाते में नहीं आता बल्कि उन्हीं का पैसा खाते में आता है।

कमीशन लेने के कारण कम हो गई राशि

बद्री आदिवासी, हिताग्रही

कमीशन लेने के कारण कम हो गई राशि


इन ग्राम पंचायतों में अधूरे हैं आवास

हितग्राहियों का कहना है कि जब पूरी राशि हमें मिली ही नहीं है तो आवास पूरे कहां से होंगे। वहीं रोजगार सहायक व सचिवों का कहना है कि खाते में ही राशि आई है इनके आरोप निराधार हैं। इसमें अधूरे आवास में ग्राम पंचायत घिलौन्द्रा, नदनवारा, रिछाई, सिनावलकला, गाजौरा, वीरपुर, मानपुर, भौड़न, देवरी, पोठयाई, महुआ, मुहारीखुर्द सहित अन्य खबरें शामिल हैं। इनमें आवास अधूरे होने के कारण कही हितग्राही उनका उपयोग मवेशी बांधने व कंडे लकडियां रखने के लिए उपयोग में ले रहे हैं।

फैक्ट फाइल

{ जनपद में कुल स्वीकृत 971 आवास हैं।

{ इनमें से निर्मित हुए आवास की संख्या 806 है।

{ वहीं निर्माणाधीन आवास-165 हैं, जिनके खाते में ही पैसा आया है।

हितग्राहियों ने दूसरे कार्य में खर्च कर दी राशि

नीलम सिंह यादव, रोजगार सहायक

आवासों का मवेशी बांधने में किया जा रहा है उपयोग

ग्राम पंचायत रिछाई की हितग्राही शांति आदिवासी, ग्राम पंचायत भौडन की हितग्राही रतिया आदिवासी, रिछाई निवासी मिथिला आदिवासी, मानपुर दसिया आदिवासी, गजौरा निवासी रामकुंअर आदिवासी, बद्री आदिवासी सहित अन्य हितग्राहियों ने बताया है कि आवास अधूरे रहने के कारण आवासों का उपयोग मवेशी बांधने व कंडे लकड़ी रखने के रूप में उपयोग कर रहे हैं।

जागरूकता की है कमी

आरएस करोले,जनपद सीईओ खनियांधाना

खनियांधाना में अधूरा आवास बताता हितग्राही।
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