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सिंधिया के साथ फूल छाप कांग्रेसी गए: शर्मा
पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में चले जोन के साथ ही शिवपुरी जिले से अधिकतर कांग्रेस पदाधिकारियों ने भी पदों से इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में कांग्रेस नहीं छोड़ने वाले नेताओं ने पार्टी छोड़ने वाल नेताओं पर निशान साध रहे हैं। ऐसे में सिंधिया निष्ठ नेता भी उनकी पार्टी निष्ठा पर सवाल उठा रहे हैं। सेवादल प्रदेश सचिव अनिल शर्मा उत्साही ने प्रेस में शनिवार को बयान जारी किया है कि सेवादल प्रदेश सचिव का कहना है कि सिंधिया के साथ ‘फूल छाप कांग्रेसी’ गए, खाली पद जल्द भरे जाएंगे। वहीं सिंधिया निष्ठ एवं प्रदेश महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके हरवीर रघुवीर रघुवंशी ने पलटवार करते हुए कहा है कि पार्टी में रहकर कितना काम किया है, पहले गिरेबां में झांककर देखें।
मप्र कांग्रेस सेवादल प्रदेश सचिव अनिल उत्साही का कहना है कि सिंधिया जी के साथ जो नेता गए हैं उनका इतिहास कांग्रेसी नहीं हैं। वे अवसरवादी और भितरघाती व दल-बदलू रहे हैं। केवल लोकसभा में सिंधिया जी के लिए कांग्रेस में कार्य करते थे। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जड़ें खोदने का काम करते थे। जो कांग्रेसी नेता गए हैं, वे पार्टी निष्ठ ना होकर केवल व्यक्ति निष्ठा की राजनीति करते थे। इसलिए उनके जाने से कांग्रेस पर कोई असर नहीं पडे़गा। इधर प्रदेश महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले हरवीर रघुवंशी का कहना है कि सिंधिया के साथ निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ता गए हैं जो सभी पार्टी के प्रति वफादार और समर्पित रहे हैं। जब तक सिंधिया जी रहे, सभी ने जी जान से पार्टी के लिए काम किया और पार्टी में रहकर कभी गद्दारी नहीं की। स्टेटमेंट देने वाले पहले अपनी गिरेवां में झांकें कि उन्होंने पार्टी में रहकर पार्टी के लिए कितना काम किया है। यह बात वह लोग खुद जानते भी हैं। साथ ही महाराज पर जो हमला हुआ है, वो इनकी ओछी मानसिकता दिखाता है। यह घबराहट का प्रतीक है। इन्हें अपनी जमीन खिसकती दिख रही है।
सिंधिया के काफिले में गाड़ी पर पथराव छोटी मानसिकता : योगेंद्र सिंह
बदरवास ब्लॉक के सिंधिया समर्थन नेता योगेंद्र सिंह यादव ने मीडिया के सामने कहा कि भाजपा में शामिल होने से घबराए दिग्विजय सिंह और कमलनाथ समर्थकों ने भोपाल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के काफिले के दौरान गाड़ी पर पथराव कराया है। यह छोटी मानसिकता है जो ठीक नहीं है। क्योंकि राजनीति में मतभेद तो हो सकते हैं, लेकिन यह तो सीधे तौर पर मनभेद का प्रतीक है। यह कृत्य गुंडागर्दी की श्रेणी में आता है। इस घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।