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शुभ मुहूर्त में जली होली, आज गुलाल का हुड़दंग
शुभ मुहूर्त में होलिका दहन शहर के एक सैकड़ा से अधिक स्थान पर देर शाम से लेकर मध्य रात्रि तक किया गया। सोमवार को हुए होलिका दहन के बाद अब मंगलवार को सूखे रंग से लोग होली खेलेंगे प्रशासन ने भी सूखी होली खेलने की अपील की है। जिससे मौसम के कारण बदलाव होने ठंडक होने से सर्दी, जुकाम की बीमारी के साथ त्वचा रोगों से बच सकेंगे। यही नहीं इससे एक सप्ताह का पानी भी बचाया जा सकेगा।
रसायन शास्त्र के प्राध्यापक डॉ. एपी गुप्ता की मानें तो डिब्बे वाले रासायनिक रंग लगाकर अगर सूखे चेहरे पर दो बार लेप कर दिया जाए तो 45 लीटर पानी से भी रंग साफ नहीं होता है। औसतन किसी भी रंग को छुड़ाने में 34 लीटर पानी खर्च होता है। उसके बाद भी रंग पूरी तरह नहीं छूटता है। सैंपू, सर्फ, साबुन का खर्च उठाना पड़ता है। तीन चार दिन तक चेहरे की सफाई में औसत 60 लीटर पानी का खर्च होता है।
वहीं नपा के मुताबिक औसत एक व्यक्ति की पानी की जरूरत 135 लीटर आंकी गई है, लेकिन 70 लीटर प्रति व्यक्ति पानी ही सप्लाई होती है। होली में रंग छुड़ाने के लिए यह खपत बढ़ाकर अनुमानतः 90 लीटर प्रति व्यक्ति कर दी जाती है। अगर दो तीन दिन तक इसी तरह सप्लाई बढ़ाई जाए तो पानी की मात्रा का बजट बिगड़ता है। लोग अगर गुलाल से सूखी होली खेलें तो एक सप्ताह का पानी बचाया जा सकता है।
सूखी होली के फायदे
{सर्दी,जुकाम,बुखार जैसी बीमारियां नहीं होंगी। वायरस के संक्रमण का खतरा भी नहीं रहेगा।
{त्वचा पर रासायनिक रंग नहीं लगेंगे जिससे त्वचा के रोग होने की संभावना समाप्त हो जाएगी।
{प्रेम और सौहार्द की होली होगी, जिससे विवाद की स्थिति नहीं बनेगी।
{रंग लगाने एवं रंग छुड़ाने में लगने वाला समय बचेगा, इससे समय की बर्बादी नहीं होगी।
{पानी की बचत होगी। अगर एक व्यक्ति 60 लीटर पानी बचाएगा तो नगर के लिए एक सप्ताह की जल व्यवस्था हो जाएगी।
{नदी, तालाब के पानी में रंगों का प्रदूषण नहीं होगा।