ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर प्रतिबंध से गिद्ध बढ़े, 227 से बढ़कर 421 हुई संख्या

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 04:45 AM IST

Shivpuri News - जिले के वन क्षेत्रों में शनिवार देर शाम तक विलुप्त पक्षियों की श्रेणी में शामिल गिद्धों की गणना की गई। पांच रेंज...

Shivpuri News - mp news increased vulture by restriction on oxytocin injections increased from 227 to 421
जिले के वन क्षेत्रों में शनिवार देर शाम तक विलुप्त पक्षियों की श्रेणी में शामिल गिद्धों की गणना की गई। पांच रेंज एरिया में 250 वन कर्मचारियों ने गिद्धों को खोजा। रेंज एरिया पोहरी, सतनवाड़ा, करैरा और शिवपुरी, कोलारस और बदरवास में गिद्ध खोजे गए। पहले जिले में 227 गिद्ध थे, लेकिन अब बढ़कर 421 हो गए हैं। जिले में पोहरी और सतनवाड़ा में सर्वाधिक गिद्ध मिले। पोहरी और सतनवाड़ा में पिछले सालों तक इनकी संख्या 89 थी। अब इस साल इनकी संख्या बढ़कर 225-230 तक पहुंच गई है। वन विभाग व वन अभ्यारण्य के अधिकारियों और स्टाफ की 9 टीमों ने शनिवार को गिद्धों की खोज की।

इसलिए बढी गिद्धों की संख्या

पोहरी रेंज के वन विभाग के अधिकारी आरके गुप्ता की मानें तो पहले पशुओं को ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन दिए जाते थे। पिछले कुछ समय से भारत सरकार ने इन दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। गुप्ता की मानें तो पशुओं के मरने के बाद इनकी मृत देह का सेवन गिद्ध करते थे और इसलिए वह इन दवाओं के असर में आ जाने के चलते मौत का शिकार हो जाते थे। लेकिन इन दवाओं का प्रतिबंध विलुप्त प्रजाति के लिए जीवनदायक साबित हुआ।

पशुओं को लगाए जाते थे ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन और मृत पशुओं को खाते थे गिद्ध इसका असर गिद्धों पर भी होता था

पेड़ पर बैठे गिद्ध।

दुनिया में 33 तरह के गिद्ध पाए जाते हैं

वन अधिकारी कमालिका मोहंता ने बताया कि दुनिया में कुल 33 तरह के गिद्ध पाए जाते हैं। भारत में अभी तक गिद्धों की 9 प्रजातियों का पता चल पाया है। मप्र में 7 तरह के गिद्ध पाए जाते हैं। इनमें राज, काला, यूरेशियायी, हिमालयी, देशी, चमर तथा जटायु गिद्ध सम्मिलत है। गिद्ध अक्टूबर से दिसंबर के बीच अंडा देते हैं। 45 दिन में बच्चे अंडे से बाहर निकलकर जा जाते हैं। माना जाता है कि यह 5 से 7 महीने में उड़ान भरने लगते हैं। प्रदेश के 33 जिलों में 886 स्थानों पर गिद्ध आवास स्थल के रूप में चिन्हित किए गए हैं।

गिद्धों की गणना करते वन विभाग के कर्मचारी।

4 तरह के गिद्धों की संख्या शिवपुरी जिले में बढी

पोहरी वन अधिकारी गुप्ता की मानें तो जिले में 4 तरह की गिद्ध की प्रजाति ज्यादा देखने में आती है जिनमें देशी गिद्ध, राज गिद्ध, व्हाइट पेक्ट और लोंग बिल्ड़ की प्रजाति शामिल है। इनमें सबसे ज्यादा देशी प्रजाति के गिद्धों की संख्या है। 23 जनवरी 2016 को मप्र में पहली बार गिद्धों की गणना की गई थी। तब पूरे प्रदेश में करीब 6900 गिद्ध मिले थे। उस समय शिवपुरी में 227 गिद्धों को देखा गया था। इसमें 1 राज गिद्ध और बाकी देशी गिद्ध थे। वन संरक्षक चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि संपूर्ण विश्व में मात्र 3 प्रतिशत गिद्ध बचे हैं।

कहां से आते हैं प्रवासी पक्षी : पर्यावरण विद्वानों की मानें तो हिमालय की बर्फबारी से बचने के लिए प्रवासी पक्षी शिवपुरी आ जाते हैं, लेकिन यहां उनका स्थाई ठिकाना नहीं रहता है। ठंड जोरदार पड़ रही है। इस कारण शिवपुरी में प्रवासी पक्षी आसानी से देखे जा सकते हैं। पहली बार जब गिद्धों की गणना हुई थी तब शिवपुरी में गिद्धों का मिलना शुभ संकेत माना गया था।


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