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सेसई की दयोदय गोशाला की पहल: गोबर की लकड़ी बनना शुरू हुई, अंतिम संस्कार के लिए लागत पर मुक्तिधाम काे देंगे, पर्यावरण की भी होगी सुरक्षा

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 09:15 AM IST
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अंतिम संस्कार में 4 से 5 क्विंटल लगती है लकड़ी, गाे काष्ठ की 2 से 3 क्विंटल ही जरूरत पड़ेगी

संजीव बांझल|शिवपुरी

दयोदय गोशाला सेसई में अब गोबर से लकड़ी (गोकाष्ठ) बनेगी। ताकि पर्यावरण सुरक्षा के साथ अहिंसा धर्म का पालन हो सके। यही नहीं इस लकड़ी को लागत दर पर मुक्तिधाम भेजा जाएगा। ताकि मृत व्यक्ति के अंतिम संस्कार में खर्च होने वाली लकड़ी की जगह इस लकड़ी का उपयोग हो। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित होने से बचेगा बल्कि पांच क्विंटल लकड़ी की जगह महज 3 क्विंटल गाे-काष्ठ की ही जरूरत पड़ेगी।

सन 2001 में शहर से 14 किमी दूर स्थित गोशाला में अब गाय के गोबर से लकड़ी और गमले तैयार होने शुरु हो गए हैं। यह न केवल पर्यावरण सुरक्षा के लिए अहम है बल्कि गो काष्ठ से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन भी नहीं होगा। अब से एक साल पहले दयोदय पशु सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण केंद्र गौशाला सेसई ने इसकी तैयारी की थी। इसमें उन्होंने दो मशीनों को उदयपुर से मंगवाया था। इन मशीनों में गाय के गोबर को भूसे के साथ मिक्स करके लकड़ी बनाने की तैयारी की गई और गमले बनाने की मशीन भी आई। इससे गोबर काष्ठ के गमले भी तैयार होंगे।

मशीन ऐसे बना देती है गोबर से काष्ठ

लकड़ी बनाने के लिए ताजे गोबर की जरूरत होती है। 60 क्विंटल गोबर से करीब 15 क्विंटल लकड़ी तैयार हो जाती है। इस तरह एक गोकाष्ठ की लागत करीब 6-8 रुपए प्रति किलो पड़ती है। मशीन में ताजा गोबर डाला जाता है। मशीन के साथ लकड़ी का आकार देने की डाई लगी है, जिससे यह गोबर लकड़ी के टुकड़ों के आकार में बाहर आता है। इसे पांच-छह दिन सुखाया जाता है। इस प्रक्रिया में इसका पानी उड़ जाता है और यह कठोर होकर लकड़ी के रूप में तैयार हो जाता है।

5 क्विंटल लकड़ी से होता है अंतिम संस्कार, गाेकाष्ठ सिर्फ 3 क्विंटल ही लगेगी

गोशाला समिति के अध्यक्ष राजेश जैन की मानें तो एक अंतिम संस्कार में करीब 4-5 क्विंटल लकड़ी की जरूरत पड़ती है। इसके लिए दो बड़े पेड़ काटने पड़ते हैं और करीब चार हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं। वहीं गो काष्ठ का प्रयोग किया जाए तो 2.8 से 3 क्विंटल गो काष्ठ में ही काम हो जाता है। ऐसे में पैसा तो बचेगा ही साथ ही पेड़ों को काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जो पैसा आप देते हैं, उससे करीब 40 गायों के लिए चारे की व्यवस्था हो जाती है। गोबर के जलने से हानिकारक गैसें भी नहीं निकलतीं। इससे पर्यावरण को भी क्षति नहीं पहुंचती।

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