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डंडों की बौछारों के बीच 20 फीट पेड़ से उठाया गुड़

एक वर्ष पहले
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करैरा क्षेत्र के आदर्श ग्राम सिरसौद में होली पर बांस फाग खेलने की अनूठी परंपरा 100 वर्षों से आज भी चली आ रही है। गांव के लोधी समाज द्वारा बरसों से किए जा रहे इस आयोजन में कस्बे के लोगों की बड़ी तादाद बनी रहती। गौरतलब यह है कि परंपरा के अनुसार एक तेल से लपटे बीस फीट ऊंचे पेड़ को परंपरा के दिन पहले पेड़ को तैयार कर खड़ा कर दिया जाता है। इसमें महिलाएं हाथ में हरे बांस के डंडे लेकर पेड़ पर लगे गुड़ को घेर कर खड़ी रहती हंै और जब कोई शख्स गुड़ को पेड़ से तोड़ने चढ़ता है तो डंडों की बौछार महिलाएं करने लगती हैं। वहीं जाटव समाज के लोगों का तेल से लिपटे गुड़ व इनाम हासिल करने का दबदबा इस वर्ष भी रहा। साथ ही बांस फाग के हजारों डंडे खाकर 20 फीट ऊंचे पेड़ पर बंधे गुड़ को निकालकर इस अनूठे आयोजन में अपना परचम लहरा है।

सिलपुरी में यादव समाज ने मनाई रंग पंचमी

ग्राम सिलपुरी में रंगपंचमी पर झाड़ उखान कार्यक्रम के दाैरान पंच मेवे की भरी पाेटली लूटकर खुशी मनाते युवा।

बांस से गुड़ निकालने दो घंटे की कड़ी मशक्कत

गांव में अनूठे तरीके से खेली जाने वाली होली पर गुड़ तोड़ने के लिए करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जाटव समाज के आधा सैकड़ा लोगों ने मिलकर महिलाओं द्वारा की जा रही डंडों की बौछार के बीच पेड़ के पास पहुंचे और 20 फीट ऊंचे पेड़ पर चढ़ कर 15 मिनट में गुड़ को निकल कर ले आए।

भाईदौज से रंगपंचमी तक चलता है फाग

आदर्श ग्राम सिरसौद भाईदौज से रंगपंचमी तक आयोजित होने वाली इस बांस फाग के बारे राजू पांडा ने बताया की हमारे पूर्वज भी बताते थे की इस गांव को जब बसाया गया था। उसी समय से ये बांस फाग का आयोजन होता है, राजू पांडा ने बताया की हमारे पूर्वजों के अनुसार इस फाग को वृंदावन व मथुरा से देखकर आए थे और उसकी शुरुआत आपने गांव सिरसौद में की तभी से यहां परंपरा प्रचलन में बनी हुई है।
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