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बिना नारी पुरुष की कल्पना नहीं की जा सकती है: डॉ शर्मा

एक वर्ष पहले
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महिला दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्रीय विद्यालय में नारीशक्ति का किया सम्मान

साइकिल के दो पहियों की तरह हैं नर-नारी। समाज में इनका योगदान बराबर का है। बिना नारी के पुरुष की कल्पना की भी नहीं जा सकती। यदि एक पहिया पंचर होने पर साइकिल आगे नहीं बढ़ती उसे चलाने वाले का संतुलन बिगड़ जाता है ठीक उसी तरह बिना महिला के समाज के साथ हर घर और परिवार का अस्तित्व बिगड़ जाता है इसलिए अकेले महिला दिवस पर ही नहीं हमेशा हमें महिलाओं का सम्मान करना चाहिए। यह बात अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के एक दिन पूर्व केंद्रीय विद्यालय में आयोजित हुए सम्मान समारोह के दौरान प्राचार्य डॉ संजय शर्मा ने कही।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति पूजन की प्राचीन परंपरा रही है। जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपना परचम लहराया है। गार्गी, विद्योत्तमा, लता मंगेशकर, पीटी उषा, कल्पना चावला, पीवी सिंधु, साइना नेहवाल, मेरीकाम, टेसी थॉमस, हीमा दास आदि के योगदान को क्या समाज भुला सकता है। कदापि नहीं। समाज में नारियों को उचित स्थान दिलाए बिना समुचित विकास की परिकल्पना नहीं की जा सकती। इस प्रकार के अनूठे आयोजन के लिए विद्यालय की वरिष्ठतम शिक्षक पूनम सक्सेना ने महिलाओं की तरफ से प्राचार्य का आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन मोहन मुरारी मिश्रा ने किया।

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