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दर्द: सरसों-गेहूं की कटाई करते समय बरसने लगे ओले, आंखों के सामने झड़ गई फलियां
29 फरवरी, 4-5 व 6 मार्च को अंचल में हुई ओलावृष्टि से नुकसान का सर्वे कंप्लीट होते ही शनिवार को अंबाह क्षेत्र के एक दर्जन गांवों में फिर से ओले गिर पड़े। शाम 3 बजे के करीब अंबाह क्षेत्र के रछेड़, हिंगोटियाई, विजयगढ़, आमली का पुरा, कसमढ़ा, रुधावली, उसैद विंडवा, रूअर, बिजलीपुरा, पिपरई, ढकपुरा, महुआ, पालि गांवों में तेज बारिश के साथ 2 से 3 मिनट चना व बेर के साइज के ओले गिरने से खेतों में पककर खड़ी सरसों की फसल में 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है।
महुआ के किसान जितेंद्र तोमर ने बताया कि 6 मार्च को हुई ओलावृष्टि के बाद मैं अपनी 150 बीघा में खड़ी सरसों की फसल को मजदूरों से कटवा रहा था। शनिवार को शाम 3 बजे के करीब पहले बारिश शुरू हुई। इसके बाद 3.20 बजे के करीब चने फिर बेर के साइज के ओले बरसने लगे। ओलावृष्टि शुरू होते ही मजदूर पेड़ों के नीचे शरण लेकर खड़े हो गए और ओले बंद होने के बाद सरसों की पकी हुई फसल पूरी तरह से फैल गई। सरसों की आधी से अधिक फलियां टूटकर खेतों में बिखर गईं। इसी प्रकार पिपरई के किसान कालीचरन दुबे, अवध बिहारी के खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह से फैल गई।
मुरैना के अंबाह के रछेड़ गांव में सड़क पर बिछे ओले।
92 गांवों में 4697 हेक्टेयर में खड़ी फसल में नुकसान, मुआवजा बांटने 8.48 करोड़ मांगे
मार्च का महीना किसानों के लिए आफत लेकर आया है। 29 फरवरी सहित 4, 5 व 6 मार्च को सुमावली, जौरा, मुरैना, दिमनी व अंबाह क्षेत्र के 92 गांवों में हुई ओलावृष्टि से 7 हजार किसानों की 4 हजार 697 हेक्टेयर में खड़ी सरसों-गेहूं की फसल में व्यापक नुकसान हुआ है। सबसे अधिक नुकसान 6 मार्च को हुई ओलावृष्टि में मुरैना, अंबाह व दिमनी क्षेत्र के गांवों में हुआ है। जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई सर्वे टीम की रिपोर्ट आने के बाद कलेक्टर ने 7 हजार किसानों को प्रभावित मानते हुए 8 करोड 48 लाख रुपए बतौर मुआवजा बांटने प्रस्ताव राहत आयुक्त को भेजा है।
दिल्ली में बारिश का असर, मुरैना में चली ठंडी हवा, बदल छाए
11 मार्च को हुई बूंदाबांदी के बाद 12, 13 मार्च को 2 दिन मौसम साफ रहा और तेज धूप खिली। लेकिन शनिवार को सुबह तेज धूप तो खिली लेकिन दोपहर होते-होते बादल छा गए और ठंडी हवा चलने लगी।