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एक्स-रे कराने दो घंटे लाइन में खड़े रहे मरीज, ये इंतजार हड्‌डी टूटने के दर्द से भी ज्यादा असहनीय

एक वर्ष पहले
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अस्पताल प्रबंधन को फिक्र नहीं क्योंकि डॉक्टरों के निजी सेंटर

जिला अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर की एक्स-रे मशीन पंद्रह दिनों से खराब पड़ी है। अब एक मात्र ओपीडी की मशीन से ही एक्स-रे हो रहे हैं। संख्या बढ़ने से मरीजों को लाइन में लगकर अपनी बारी के लिए दो से ढाई घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। हादसों में हड्‌डी टूटने से जो मरीज दर्द से कराह रहे हैं, उनका दर्द एक्स-रे का इंतजार और बढ़ा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ट्राॅमा सेंटर की खराब पड़ी एक्स-रे मशीन जल्द सुधरवाने पर ध्यान नहीं दे रहा है।

ट्राॅमा सेंटर की एक्स रे मशीन खराब होने के बाद पांच मंजिला नई बिल्डिंग के पहले तल पर ओपीडी में मरीजों के लिए अलग एक्स-रे मशीन है। इसी मशीन पर अब सभी एक्स-रे किए जा रहे हैं। इस कारण मरीजों की संख्या बढ़ने से लाइन लगाकर एक्स-रे कराने पड़ रहे हैं। एक दिन में अधिकतम 70 मरीजों के एक्स-रे संभव हैं। लेकिन गुरुवार को एक ही दिन में 110 मरीजों के एक्स-रे हो चुके हैं। जिससे इस एक्स-रे मशीन के खराब होने का डर सता रहा है।

दो उदाहरणों से समझिए... एक्स-रे कराने के लिए घंटों इंतजार कर करते हैं मरीज

1. बाइक से गिरी महिला, एक्स-रे के लिए एक घंटे इंतजार: गुरिच्छा निवासी महेश्वरी प|ी महेश ओझा बाइक से गिरकर घायल हो गई थी। पांच दिनों से भर्ती महेश्वरी को डॉक्टर के कहने पर शुक्रवार को परिजन स्ट्रेचर पर लिटाकर एक्स-रे कराने पहुंचे। करीब एक घंटे बाद नंबर आया, तब तक स्ट्रेचर पर लेटकर मरीज को इंतजार करना पड़ा। परिजनों ने बताया कि एक्स-रे की वजह से मरीज को समय पर गोली भी नहीं खिला पाए।

2. स्ट्रेचर पर लेटकर दो घंटे इंतजार किया, तब आई बारी: मरीज इमरलाल धाकड़ ने बताया कि सुबह साढ़े दस बजे आकर लाइन में लग गए। इंतजार करते हुए साढ़े बारह बजे के बाद नंबर आया। हादसे में पैर जख्मी हो गया। पैर में रॉड डली थी, शौचालय जाते वक्त फिर से फिसल गया। जिला अस्पताल में तीन महीने से भर्ती हूं, लेकिन अभी तक पैर ऑपरेशन नहीं हो सका है। डॉक्टर ने ऑपरेशन से पहले सीटी स्कैन कराने के लिए भी कहा है।

रेडिएशन ज्यादा आने से एक रेडियोग्राफर ने नौकरी छोड़ी

जिला अस्पताल में एक्स-रे मशीन से निकलने वाली रेडिएशन से रेडियोग्राफर को खतरा है। मई-जून 2019 में आई जांच रिपोर्ट में दो रेडियोग्राफर में रेडिएशन का ज्यादा असर आया। एक रेडियोग्राफर पूरनसिंह जाटव ने नौकरी छोड़ दी है। जबकि एक अभी कार्यरत है। वहीं पुराने रेडियोग्राफर राजेश शर्मा की छह माह पहले कैंसर बीमारी से ग्वालियर में इलाज के दौरान मौत हाे गई। अस्पताल प्रबंधन सुरक्षा तो दूर रेडियोग्राफर को मास्क तक नहीं दे रहा। ग्लब्स, गूगल, एलगार्ड भी नहीं दिए जा रहे। रेडिएशन मापक यंत्र भी तीन माह में उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

खराब लिफ्ट भी अभी तक नहीं सुधरी, सीड़ियों से आना पड़ रहा


पांच मंजिला बिल्डिंग की दूसरी लिफ्ट को खराब हुए भी दो सप्ताह बीत गए हैं। जबकि पहली लिफ्ट आठ महीने से खराब है। प्रबंधन अभी तक मैकेनिक बुलवाकर लिफ्ट ठीक नहीं करा सका है। जिससे बिल्डिंग के ऊपर हड्‌डी रोग और सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीजों को एक्स-रे के लिए रैंप या फिर सीड़ियों के सहारे धीरे-धीरे उतरकर आना पड़ता है।


जिला अस्पताल की ओपीडी में मशीन पर रोज 70 एक्स-रे संभव, लेकिन 110 तक एक्स-रे रोजाना हो रहे


मशीन खराब क्यों है, इस बारे में जानकारी लेता हूं

डॉ. एमएल अग्रवाल, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल शिवपुरी

कंपनी को सूचित किया है, खराबी जल्द दूर कराएंगे

डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर, आरएमओ, जिला अस्पताल शिवपुरी

जिला अस्पताल में एक्स-रे के लिए इंतजार करते मरीज व उनके परिजन।
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