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अष्टान्हिका पर्व में नंदीश्वर विधान की भक्ति अतिशय फलदायी: रामप्रकाश

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 04:55 AM IST

Shivpuri News - कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ़ माह के जो अंतिम आठ दिन होते है। वह अष्टान्हिका पर्व कहलाते है। और इन अष्टान्हिका पर्व...

Shivpuri News - mp news the worship of nandishwar legislation is very fruitful in ashtanhika festival ram prakash
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कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ़ माह के जो अंतिम आठ दिन होते है। वह अष्टान्हिका पर्व कहलाते है। और इन अष्टान्हिका पर्व में भक्त सुबह से लेकर रात तक भगवान भक्ति में खुद को समर्पित कर जीवन को श्रेष्ठ बनने की प्रक्रिया से गुजरता है। अष्टान्हिका पर्व का यह आयोजन हमें यही संदेश देता है कि इस दौरान हम भगवान की भक्ति में खुद को समर्पित कर सहज बनें। यह बात अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर आदिनाथ जिनालय में आयोजित हो रहे नंदीश्वर विधान की भक्ति के दौरान प्रतिष्ठाचार्य पंडित रामप्रकाश जैन भिंड वालों ने कही।

उन्होने कहा कि इस बार शहर के अधिकांश जिनालयों में भक्ति उत्सव के आयोजन किए जा रहे है। उसी क्रम में आदिनाथ जिनालय पर भी भक्ति उत्सव नंदीश्वर द्वीप विधान का किया जा रहा है। जिसमें आयोजन की शुरुआत में ध्वजारोहण वीरेंद्र जैन पत्ते वालों ने किया और मरुदेवी महिला मंडल,दिगंबर जैन महिला महासमिति सहित महिला मंडल के पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा नंदीश्वर दीप विधान की पूजा और अर्घ समर्पण किए जा रहे है।

वहीं छत्री जैन मंदिर पर पंडित राजकुमार शास्त्री शाढोरा के प्रतिष्ठाचार्यत्व में आयोजित हो रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान की आराधना के दौरान शनिवार को 128 अर्घ समर्पण करके सिद्ध प्रभु की आराधना की गई। इस दौरान श्रावक के महत्वपूर्ण कर्तव्यों को बताते हुए उन्होंने कहा कि दान और पूजा श्रावक का मुख्य धर्म है। जो प्रतिदिन दान और पूजा नहीं करता। वह श्रावक की श्रेणी में नहीं है। विशिष्ट पर्वों पर हमें पूजा विधान के अवसर पर भक्ति अवश्य करनी चाहिए। वहीं महावीर जिनालय में त्रिशला महिला मंडल के आयोजन में हो रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान के दौरान पंडित सुगनचंद जैन आमोल द्वारा विधान की संपूर्ण क्रियाएं कराई गई। जिसमें मांडना पर 64अर्घों का समर्पण कर सिद्धों की पूजा की गई। इस दौरान पंडित जी ने अष्टान्हिका पर्व में सिद्ध भक्ति का विशेष महत्व बताया।

विष्णु मंदिर पर वेदांत सम्मेलन का हुआ आयोजन।

64 अर्घों के माध्यम से सिद्धों का किया गुणानुवाद

चंद्र प्रभ जिनालय पर आयोजित हो रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अवसर पर विधान के दौरान 64 अर्घों का समर्पण विभिन्न धार्मिक क्रियाओं के साथ पंडित अजित जैन अरिहंत ने कराया। इस दौरान जहां दिन में अलसुबह से लेकर दोपहर तक भगवान की आराधना में एक सैकड़ा लोग अर्घ समर्पण कर रहे हैं। वहीं रात्रि में भी भगवान की विशिष्ट भक्ति कर भक्त मंडल अपना समर्पण दर्शा रहे है।

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