--Advertisement--

पुरुषोत्तम पारवानी | शुजालपुर

पुरुषोत्तम पारवानी | शुजालपुर शुजालपुर से 8 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पटलावदा निवासी खामसिंह परमार की 13 साल से...

Danik Bhaskar | Mar 07, 2018, 05:10 AM IST
पुरुषोत्तम पारवानी | शुजालपुर

शुजालपुर से 8 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पटलावदा निवासी खामसिंह परमार की 13 साल से परंपरागत खेती से हटकर उत्पादन करने की जिद ने उन्हें खास मुकाम पर ला खड़ा किया है। खामसिंह ने बचाटा वैरायटी की पीली व मसालिया वैरायटी की लाल मिर्च की पौध एक एकड़ में लगाकर हर सप्ताह दो लाख की कमाई शुरू की है। मध्यप्रदेश में औसत 135 व अन्यत्र 250 रुपए प्रति किलो तक बिकने वाली इस मिर्च का उत्पादन जानने खामसिंह के पास प्रदेशभर से किसान आ रहे हैं।

13 साल से बागवानी के साथ ही नेट हाउस व पॉलीहाउस के माध्यम से संरक्षित कृषि को अपनाते हुए अपनी अलग पहचान बनाने वाले इस कृषक ने सितंबर में रिजवाइन कंपनी की बचाटा वैरायटी की पीली व मसालिया वैरायटी की लाल मिर्च की पौध 1 एकड़ में लगाई। खामसिंह ने बताया 3 एकड़ भूमि में अब तक वे एक करोड़ का निवेश कर पॉलीहाउस, नेट हाउस लगा चुके हैं। इससे हर साल औसतन 35 लाख रुपए की आय पाते हैं।

जिद ने बनाया उन्नत कृषक, मिले तीन अवॉर्ड

बीएससी तक शिक्षित कृषक खामसिंह ने वर्ष 2005 से संरक्षित कृषि को अपनाया और स्ट्रॉबेरी, अनार, अंगूर की खेती को सफलतापूर्वक कर अलग पहचान बनाई। उन्हें अब तक तीन अवॉर्ड मिल चुके हैं। 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल एग्रीकल्चर समिट में वाइब्रेंट गुजरात का अवॉर्ड दिया। इसके अलावा मध्यप्रदेश में राज्य स्तरीय आत्मा परियोजना का 51 हजार रुपए का पुरस्कार 2011 में मिला। उन्नत तकनीक से अनार की खेती करने पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर द्वारा भी पुरस्कृत किया जा चुका है।

सक्सेस स्टोरी

लाल-पीली मिर्च लगाई, हर हफ्ते 2 लाख की कमाई

लाल-पीली मिर्च लगाई, हर हफ्ते 2 लाख की कमाई

पुरुषोत्तम पारवानी | शुजालपुर

शुजालपुर से 8 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पटलावदा निवासी खामसिंह परमार की 13 साल से परंपरागत खेती से हटकर उत्पादन करने की जिद ने उन्हें खास मुकाम पर ला खड़ा किया है। खामसिंह ने बचाटा वैरायटी की पीली व मसालिया वैरायटी की लाल मिर्च की पौध एक एकड़ में लगाकर हर सप्ताह दो लाख की कमाई शुरू की है। मध्यप्रदेश में औसत 135 व अन्यत्र 250 रुपए प्रति किलो तक बिकने वाली इस मिर्च का उत्पादन जानने खामसिंह के पास प्रदेशभर से किसान आ रहे हैं।

13 साल से बागवानी के साथ ही नेट हाउस व पॉलीहाउस के माध्यम से संरक्षित कृषि को अपनाते हुए अपनी अलग पहचान बनाने वाले इस कृषक ने सितंबर में रिजवाइन कंपनी की बचाटा वैरायटी की पीली व मसालिया वैरायटी की लाल मिर्च की पौध 1 एकड़ में लगाई। खामसिंह ने बताया 3 एकड़ भूमि में अब तक वे एक करोड़ का निवेश कर पॉलीहाउस, नेट हाउस लगा चुके हैं। इससे हर साल औसतन 35 लाख रुपए की आय पाते हैं।

जिद ने बनाया उन्नत कृषक, मिले तीन अवॉर्ड

बीएससी तक शिक्षित कृषक खामसिंह ने वर्ष 2005 से संरक्षित कृषि को अपनाया और स्ट्रॉबेरी, अनार, अंगूर की खेती को सफलतापूर्वक कर अलग पहचान बनाई। उन्हें अब तक तीन अवॉर्ड मिल चुके हैं। 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल एग्रीकल्चर समिट में वाइब्रेंट गुजरात का अवॉर्ड दिया। इसके अलावा मध्यप्रदेश में राज्य स्तरीय आत्मा परियोजना का 51 हजार रुपए का पुरस्कार 2011 में मिला। उन्नत तकनीक से अनार की खेती करने पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर द्वारा भी पुरस्कृत किया जा चुका है।

स्ट्रॉबेरी, अनार और अंगूर की खेती भी कर चुके, नरेंद्र मोदी कर चुके हैं पुरस्कृत, अब तक मिले कई अवार्ड

पीली व मसानिया वैरायटी की लाल मिर्च के साथ कृषक खामसिंह। 7049604500

एेसे समझें एक एकड़ में लगाई फसल का गणित

7000 रुपए : बीज

03 रुपए : एक पौधा

90 दिन में फसल तैयार हो जाएगा

15 क्विंटल : हर सप्ताह उत्पादन

02 लाख प्रति एकड़ साप्ताहिक आय

135 रुपए : प्रति किलो के दाम से इंदौर-भोपाल में बिक रही मिर्च

250 रुपए : प्रति किलो रंगीन मिर्च महानगर और विदेशों में बिकती है

पुरुषोत्तम पारवानी | शुजालपुर

शुजालपुर से 8 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पटलावदा निवासी खामसिंह परमार की 13 साल से परंपरागत खेती से हटकर उत्पादन करने की जिद ने उन्हें खास मुकाम पर ला खड़ा किया है। खामसिंह ने बचाटा वैरायटी की पीली व मसालिया वैरायटी की लाल मिर्च की पौध एक एकड़ में लगाकर हर सप्ताह दो लाख की कमाई शुरू की है। मध्यप्रदेश में औसत 135 व अन्यत्र 250 रुपए प्रति किलो तक बिकने वाली इस मिर्च का उत्पादन जानने खामसिंह के पास प्रदेशभर से किसान आ रहे हैं।

13 साल से बागवानी के साथ ही नेट हाउस व पॉलीहाउस के माध्यम से संरक्षित कृषि को अपनाते हुए अपनी अलग पहचान बनाने वाले इस कृषक ने सितंबर में रिजवाइन कंपनी की बचाटा वैरायटी की पीली व मसालिया वैरायटी की लाल मिर्च की पौध 1 एकड़ में लगाई। खामसिंह ने बताया 3 एकड़ भूमि में अब तक वे एक करोड़ का निवेश कर पॉलीहाउस, नेट हाउस लगा चुके हैं। इससे हर साल औसतन 35 लाख रुपए की आय पाते हैं।

जिद ने बनाया उन्नत कृषक, मिले तीन अवॉर्ड

बीएससी तक शिक्षित कृषक खामसिंह ने वर्ष 2005 से संरक्षित कृषि को अपनाया और स्ट्रॉबेरी, अनार, अंगूर की खेती को सफलतापूर्वक कर अलग पहचान बनाई। उन्हें अब तक तीन अवॉर्ड मिल चुके हैं। 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल एग्रीकल्चर समिट में वाइब्रेंट गुजरात का अवॉर्ड दिया। इसके अलावा मध्यप्रदेश में राज्य स्तरीय आत्मा परियोजना का 51 हजार रुपए का पुरस्कार 2011 में मिला। उन्नत तकनीक से अनार की खेती करने पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर द्वारा भी पुरस्कृत किया जा चुका है।

45 टन प्रति एकड़ रंगीन मिर्च का उत्पादन

4.50 लाख फसल तैयार करने में खर्च

45.5 लाख शुद्ध मुनाफा