शुजालपुर

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यज्ञ और कर्मकांड करवाती हैं गायत्री परिवार की महिलाएं

नारी सशक्तिकरण के दौर में जिले के गायत्री परिवार की करीब 500 महिला सदस्य सामाजिक सरोकार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों...

Dainik Bhaskar

Mar 08, 2018, 05:20 AM IST
यज्ञ और कर्मकांड करवाती हैं गायत्री परिवार की महिलाएं
नारी सशक्तिकरण के दौर में जिले के गायत्री परिवार की करीब 500 महिला सदस्य सामाजिक सरोकार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भी अग्रणी हैं। गायत्री परिवार के माध्यम से कर्मकांड कराने में महारथ हासिल कर चुकी ये महिलाएं आज मंत्रोच्चार के साथ विभिन्न संस्कारों से लेकर यज्ञ विधियां तक बखूबी करवा रही हैं। अभियान से लेकर पर्व-त्यौहारों के समय सूचना मिलते ही ये भारतीय संस्कृति की परिचायक साड़ी पहनकर, अपने कपड़े के झोले में ढपली रखकर खुद उन स्थलों पर जाती हैं, जहां ये आयोजन होने वाले हैं। शहर में अपने आप में इनका यह कार्य मिसाल बन रहा है। यह सिलसिला लगातार जारी है। बीते साल 29 अक्टूबर को शहर में गायत्री परिवार ने गृहे-गृहे यज्ञ अभियान के दौरान 185 घरों में एक ही समय पर यज्ञ आयोजन किया था। 45 घरों में महिला यज्ञाचार्यों ने ही यज्ञ कराया था।

स्टेशन रोड स्थित गायत्री शक्तिपीठ के प्रमुख ट्रस्टी पं. हरीश शर्मा व गायत्री परिवार के जिला समन्वयक शैलेंद्र श्रीवास्तव बताते हैं गायत्री पद्धति से कर्मकांड और यज्ञ कराने के लिए शहर में करीब 60 तो जिलेभर में 500 महिला सदस्य वर्तमान में सक्रिय हैं। 23 साल से चली आ रही परंपरा को भी इन्होंने जीवंत रखा है। ये महिलाएं यज्ञ के साथ यज्ञोपवीत, पुंसवन, नामकरण, अन्नप्राशन, विद्यारंभ, विवाह आदि संस्कार करवा चुकी हैं। नवरात्रि, वसंत पंचमी, अक्षय तृतीया पर्व के समय अकेले ही मंच से कमान संभालकर आयोजन पूरे करवा देती हैं।

पं. हरीश शर्मा ने बताया 11 मार्च को शुजालपुर में गायत्री परिवार के माध्यम से 108 कुंडी गृहे-गृहे यज्ञ किया जाएगा। इस दौरान लगभग आधे घरों में परिवार की ये प्रशिक्षित महिलाएं ही यज्ञाचार्य बनकर आयोजन करवाएंगी। शहर के 4 केंद्रों में बच्चों में संस्कार को बढ़ावा देने के लिए भी गायत्री परिवार की महिलाएं आगे आ रही हैं। बाल संस्कार केंद्रों का भी विस्तार जल्द किया जाएगा।

धर्म में भी आगे

सामाजिक सरोकार के साथ धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञोपवीत, विद्यारंभ सहित विवाह आदि संस्कार करा चुकी हैं

गत वर्ष अभियान के तहत शहर के घरों में महिला सदस्यों ने करवाए थे यज्ञ। (फाइल फोटो)

कोई शांतिकुंज, कोई शक्तिपीठ से ले चुकी प्रशिक्षण

पं. शर्मा व श्रीवास्तव ने बताया अनुष्ठान कराने वाली परिवार की इन महिला सदस्यों में से अधिकांश शांतिकुंज हरिद्वार में साल में एक बार होने वाले परिव्राजक व युग पुरोहित सत्र में शामिल होकर कर्मकांड संबंधी प्रशिक्षण ले चुकी हैं। तो कुछ सदस्याओं ने शक्तिपीठ पर वर्ष में दो बार होने वाले 10-10 दिनी प्रशिक्षण शिविर में शामिल होकर ये विधियां करना सीखी हैं। मंत्रोच्चारण के तरीके, प्रारंभिक से लेकर कर्मकांड पूरा होने तक की आखिरी विधि करना आदि प्रशिक्षण में सिखाया जाता है।

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