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मंगल विहार कॉलोनी के रहवासी ने मप्र भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण

मंगल विहार कॉलोनी के रहवासी ने मप्र भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण में खुद की पैरवी की और जीता मुकदमा भास्कर...

Dainik Bhaskar

Apr 04, 2018, 05:45 AM IST
मंगल विहार कॉलोनी के रहवासी ने मप्र भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण में खुद की पैरवी की और जीता मुकदमा

भास्कर संवाददाता | शुजालपुर

लोगों को बिना विकास कार्य किए कॉलोनियों में प्लॉट बेचने के मामले में जिले में पहली बार रेरा कानून के तहत शुजालपुर के कालोनाइजरों पर कार्रवाई हुई। रेरा ने कॉलोनाइजर के प्लॉटों को बंधक बनाने के साथ इन्हें बेचकर बचे हुए विकास कार्य कराने के आदेश जिला प्रशासन को दिए। ज्ञात रहे शहर की मंगल विहार कॉॅलोनी के रहवासी संतोष परमार ने खुद पैरवी की और मुकदमा जीत लिया।

दरअसल शुजालपुर के आष्टा पहुंच मार्ग पर मूनवॉक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के संचालक उत्तम शर्मा से मंगल विहार कॉलोनी में लोगों ने भूखंड व बंगले खरीदे थे। कॉलोनाइजर ने उस समय कॉलोनी में ड्रेनेज, पानी, बिजली, सड़क, पार्क सहित अन्य सुविधाएं सुलभ कराने का उल्लेख करते हुए बेहतर आवासीय जीवन का माहौल देने का वादा किया था। लोगों ने प्लाॅट-बंगले खरीदे और यहां रहने भी लगे, लेकिन कॉलोनी में विकास कार्य पूरा नहीं हुआ। हाल ही में कॉलोनी में निवेश करने वाले शुजालपुर निवासी संतोष परमार ने रेरा एक्ट के तहत रेरा के अध्यक्ष एंटोनी डिसा व सदस्य दिनेश कुमार नायक, अनिरुद्ध डी कपाले के समक्ष शिकायती आवेदन प्रस्तुत किया।

आवेदक संतोष ने प्रकरण की पैरवी भी खुद की और प्राधिकरण को बताया कि 6 जून 2012 को 1000 वर्ग फीट का भूखंड क्रय किया था। अब तक कॉलोनी में विकास कार्य नहीं हुआ। इसके लिए कॉलोनाइजर जिम्मेदार है और विकास कार्य न होना शासन की अनुमतियों के प्रतिकूल है। सुनवाई के दौरान कॉलोनाइजर की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ और एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए प्राधिकरण ने कलेक्टर शाजापुर व एसडीएम शुजालपुर को निर्देश दिए कि बंधक रखे गए 7 प्लाॅट जब्त कर उससे प्राप्त राशि से विकास कार्य कराया जाए। आदेश में उल्लेख किया कि नगर एवं ग्राम निवेश देवास की स्वीकृति के अनुसार कॉलोनाइजर को प्रावधानों के तहत आधारभूत सुविधाओं का पूर्ण विकास कर सक्षम अधिकारी से पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करना था। इसके लिए 17 जनवरी 2012 को एसडीएम शुजालपुर द्वारा मंगल विहार कॉलोनी के भूखंड क्रमांक 166 से 172 तक के 7 भूखंड बंधक रखे गए। जिला प्रशासन एवं एसडीएम शुजालपुर विकास कार्य में कमी के कारण बंधक रखे गए सभी 7 भूखंडों को जब्त कर उससे प्राप्त राशि से शेष विकास कार्य पूर्ण कराएं। आदेश में रेरा सचिव ने इस संबंध में कलेक्टर व एसडीएम को प्राधिकरण के आदेशों से अवगत कराकर 6 महीने में विकास का शेष कार्य पूर्ण करने की समय सीमा निर्धारित की है।

अधूरा विकास कार्य छोड़ने वाले कॉलोनाइजर के खिलाफ रेरा का फैसला, 7 भूखंड जब्त कर एसडीएम कराएंगे बचा हुआ काम

पहले भी ठगी की शिकायत, आज तक नहीं हुई कार्रवाई

6 अगस्त 2016 को एसडीओपी को व 17 मई 2017 को जनसुनवाई में एसडीएम को आधा दर्जन उपभोक्ताओं ने शिकायत की व बताया कि उन्होंने 2011 में इंदौर निवासी कॉलोनाइजर उत्तम पिता विश्वनाथ शर्मा से प्लाॅट और दो मंजिला भवन खरीदने का करार किया था। भूखंड व भवन निर्माण के लिए बैंक से स्वीकृत ऋण राशि के अलावा भी कॉलोनाइजर ने सभी से अतिरिक्त राशि ली व भवन निर्मित कर देने का आश्वासन दिया। पांच साल बाद अब तक भवन निर्माण पूरा नहीं हुआ और कॉलोनाइजर काम को बीच में ही छोड़कर चला गया। कॉॅलोनी मेंं बिजली, पानी, सड़क और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया नहीं कराई गई। कॉलोनाइजर पर अनुबंध का उल्लंघन कर राशि लेकर भागने व धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ताओं ने आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग शिकायत में की थी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। कॉॅलोनी के नंद किशोर शर्मा, सुशील जेसवानी, प्रवीण बैस, रमेश चंद्र गर्ग, कैलाश परमार, अशोक सलूजा सहित अन्य ने बताया शिकायत की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

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