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सरकारी मदद से पिता का ऑपरेशन होता उससे पहले ही बेटे के दिल का वॉल्व हुआ खराब

राशनकार्ड क्रमांक के भ्रम में पिता व संविदा कर्मियों की हड़ताल से बेटे को नहीं मिल रही थी उपचार सहायता ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 30, 2018, 05:50 AM IST

राशनकार्ड क्रमांक के भ्रम में पिता व संविदा कर्मियों की हड़ताल से बेटे को नहीं मिल रही थी उपचार सहायता

सीएमएचओ ने वॉल्व रिप्लेसमेंट कराने बेटे के लिए स्वीकृत की 1.80 लाख की मदद

भास्कर संवाददाता | शुजालपुर

सरकारी मदद से खुद के दिल के ऑपरेशन के लिए 6 माह से परेशान हो रहे भीलखेड़ी निवासी निर्धन पिता को इलाज की मदद मिलने से पहले ही उसके बेटे के दिल का वॉल्व खराब होने का पता चला।

राशनकार्ड के क्रमांक में कर्मचारी को भ्रम होने से पिता को मदद नहीं मिली और संविदाकर्मियों की हड़ताल से बेटे के वॉल्व रिप्लेसमेंट के लिए उपचार सहायता अटक गई। सरकारी योजना में पात्रता के बाद भी इलाज को तरसते परेशान परिवार को भास्कर की खबर के बाद राहत मिली है। बेटे कमल के इलाज के लिए सीएमएचओ ने 1.80 लाख की मदद स्वीकृत की है लेकिन पिता की हार्ट सर्जरी का प्रकरण अब भी लंबित है।

शुजालपुर अनुभाग के बीपीएल परिवार के मुखिया ग्राम भीलखेड़ी निवासी देवकरण मालवीय ने जून 2017 में स्वयं के हार्ट सर्जरी के लिए राज्य बीमारी सहायता योजना में दस्तावेजों के साथ आवेदन किया था। गरीबी रेखा राशन कार्ड पर दर्ज बीपीएल क्रमांक व सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज क्रमांक में से सहायता नहीं मिल पाने व हाल ही में उसके बेटे कमल के वॉल्व के उपचार के लिए संविदा कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से सहायता न मिलने की परेशानी भास्कर ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी।

खबर के बाद जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी जीएल सोढ़ी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कमल के इलाज के लिए 28 मार्च को 1 लाख 80 हजार की मदद स्वीकृत की। कमल का इंदौर में निजी अस्पताल में आपरेशन होगा। कमल को गंभीर ह्रदय रोग होने के साथ ही दोनों वॉल्व खराब है।

पिता के इलाज का प्रकरण अब भी अटका

देवकरण मालवीय ने महीनों से अटके खुद के इलाज के प्रकरण के निराकरण के लिए भी गरीबी रेखा कार्ड में दर्ज नंबर का जनपद पंचायत व ग्राम पंचायत से प्रमाणीकरण बनवाकर जिला मुख्यालय पर दोबारा देना चाहा, तो विभाग ने पहले बेटे का इलाज कराने व बाद में आने का कहकर रवाना कर दिया। खुद की बीमारी के साथ जैसे-तैसे अब बेटे के साथ इंदौर इलाज कराने रवाना हुए देवकरण ने कहा उसका इलाज का प्रकरण अभी भी लंबित है। इस बारे में जिला मुख्या चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करना चाहा, तो उनका नंबर रिसीव नहीं हुआ।

कमल।

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