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नसबंदी के लक्ष्य में पिछड़ा ग्रामीण इलाका,1650 का लक्ष्य और अब तक 290 ने ही कराई नसबंदी

भास्कर संवाददाता | शुजालपुर नसीहतों के बाद भी शुजालपुर व आसपास के ग्रामीण इलाके के लोग अब परिवार कल्याण के लिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 23, 2018, 05:55 AM IST

भास्कर संवाददाता | शुजालपुर

नसीहतों के बाद भी शुजालपुर व आसपास के ग्रामीण इलाके के लोग अब परिवार कल्याण के लिए राजी नहीं हो रहे हैं। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग के परिवार कल्याण कार्यक्रम (नसबंदी) का लक्ष्य समय पर पूरा नहीं हो पाया है। शहर में जहां टारगेट समय से पहले पूरा हुआ है। वहीं ग्रामीण इलाके में लक्ष्यनुसार बीस फीसदी लोगों को भी प्रेरित नहीं किया जा सका है।

सिविल अस्पताल शुजालपुर को इस वर्ष शहर के लिए 460 व ग्रामीण ब्लॉक हेतु 1650 नसबंदी करने का लक्ष्य मिला है। परिवार कल्याण कार्यक्रम के लक्ष्य प्राप्ति की प्रगति को देखें, तो माह जनवरी तक शहर में लक्ष्य से बढ़कर 787 नसबंदी ऑपरेशन किए गए। वहीं ग्रामीण इलाके में केवल 290 ही परिवार नियोजन हो पाए हैं। इस प्रकार परिवार कल्याण कार्यक्रम का लक्ष्य चालू वित्तीय वर्ष के 10 माह बीतने के बाद तक सिर्फ 50 फीसदी ही पूरा हो पाया है। लक्ष्य का गहराई से अध्ययन करने पर पता चलता है कि ऑपरेशन के मामले में गिनती के पुुरुषों ने ही नसबंंदी कराई है। परिवार कल्याण कार्यक्रम के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों के पास अब सिर्फ डेढ़ माह का समय और बचा है।

प्रोत्साहन राशि से प्रोत्साहित नहीं होती महिलाएं

परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत ऑपरेशन कराने वाली महिला को स्वास्थ्य विभाग से प्रसव उपरांत नसबंदी करने पर 3 हजार व बाद में करने पर 2 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। 300 रुपए की प्रोत्साहन राशि उस व्यक्ति को मिलती है जो किसी महिला को नसबंदी कराने के लिए प्रेरित कर अस्पताल तक लाता हैं। पुरुषों के मामले में नसबंदी कराने वाले पुरुष को तीन हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। प्रोत्साहन राशि तय होने के बाद भी ग्रामीण इलाकों में महिलाएं व पुरुष नसबंदी के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। इसके चलते परिवार कल्याण कार्यक्रम का लक्ष्य अधूरा पड़ा है।

झूठे प्रलोभन भी बन रहे वजह

बीते वर्षों में सरकारी अमले को नसबंदी का लक्ष्य देकर जिस तरह से काम करने पर मजबूर किया गया, वह अब अभियान के लिए अभिशाप बनता नजर आ रहा है। लोगों को कई तरह के झूठे प्रलोभन देकर नसबंदी कराई गई। इसकी शिकायतें समय-समय पर सामने आईं। अब लोग सरकारी योजना के वास्तविक लाभ देने की जानकारी को भी सहज स्वीकार नहीं करते। स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा के अनुसार नसबंदी को लेकर अभी भी लोगों में भ्रांतियां हैं। कोई चीर-फाड़ से डरता है तो कोई अन्य कारणों से नसबंदी से बचता नजर आता है। इन्होंने बताया गांव में पहले झूठे प्रलोभन दिए गए इसलिए लोग प्रेरक को दूसरे लोगों के उदाहरण देते हुए असहमति जताते है।

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