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अनुदान के लिए तोड़ दिए आशियाने, राशि के लिए अटका काम, बेघर हो गए लोग

पुरुषोत्तम पारवानी | शुजालपुर सालों से कच्चे मकान में रह रहे 168 परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना सुविधा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 22, 2018, 06:00 AM IST

पुरुषोत्तम पारवानी | शुजालपुर

सालों से कच्चे मकान में रह रहे 168 परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना सुविधा की जगह मुसीबत बन गई है। अतिक्रमण मुक्त निर्माण का सत्यापन अपडेट न होने से हितग्राहियों को निर्माण की दूसरी किस्त जारी न होने से ये हालत बनी है। कोई बरसाती पन्नी की आड़ में जिंदगी में जी रहा हैं, तो कोई पड़ोसियों के बरामदे में सोकर रात गुजारने को मजबूर हैं। कई घर, तो ऐसे भी हैं जहां पक्के घर की चाह में पूरा परिवार बेघर सा हो गया हैं।

शुजालपुर के 25 वार्डों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 3 हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किए थे। सरकार द्वारा आवासहीन परिवारों को खुद का मकान देने के लिए 2.50 से 3.50 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाना है। योजना के पहले चरण में शुजालपुर में कुल 21 करोड़ 50 लाख के खर्च से 444 आशियाने बनाने ऐसे लोगों का चयन किया गया है, जिनके पास अपनी जमीन का मालिकाना हक के दस्तावेज है। मकान बनाने हेतु शहर के 220 परिवारों को 40 हजार की पहली किस्त जारी की है। इस राशि में मकान की नींव की भराई तक का कार्य होने के सत्यापन के बाद 70 हजार की दूसरी किस्त जारी होना है। कई परिवारों को पहली किस्त का काम पूरा किए 2 महीने से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें दूसरी किस्त नहीं मिली है। ऐसे में मकान बनाने के लिए कच्चा टापरा तोड़कर मकान बनाना शुरू करने वाले इन परिवारों को अब दूसरी किस्त के अभाव में निर्माण रुकने की वजह से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भास्कर ने जब पक्का आशियाना बनाने का सपना संजोए इन परिवारों से बात की, तो कोई तकलीफ बताते बिफर पड़ा, तो किसी की आंख से आंसू बह निकले।

प्रधानमंत्री आवास आवास योजना के तहत पहली किस्त के 40 हजार मिलने के बाद शुजालपुर के अधिकांश आवेदकों ने आवंटित पट्टा भूमि से अधिक जगह में अतिक्रमण कर अतिरिक्त जगह पर निर्माण शुरू कर दिया है और अब यही अतिरिक्त निर्माण योजना की दूसरी किस्त जारी करने में बाधा बन गया है। अतिक्रमण हटाने व निर्धारित क्षेत्र में पहली किस्त का निर्माण पूरा करने के बाद ही 168 हितग्राहियों को निर्माण के लिए अब 70 हजार की दूसरी किस्त जारी करने की बात नगर पालिका उपयंत्री भावेश गगरानी ने कही। इन्होंने बताया दल गठित कर 34 सत्यापन कराए गए है जिनमें 90 फीसदी आवेदकों ने आवंटन से अधिक जगह में निर्माण कर लिया है। इनका अतिक्रमण हटने के बाद ही अगली किस्त मिलेगी।

गंदी बस्ती जेल रोड काकड़ निवासी केवट का परिवार बल्ली की छत के सहारे रह रहा।

जेल रोड निवासी रमेश राठौर व राधाकिशन ने बरसाती पन्नी डालकर बनाया आशियाना।

उपजेल के सामने काकड़ मार्ग पर बसंतीबाई का टापरा टूटा, पड़ोसी के आंगन में सोता है परिवार।

इस तरह परेशान हो रहे आवास योजना के हितग्राही

बारिश में किस तरह रहेंगे बल्ली के सहारे खड़ी छत के नीचे बिना दीवार सोते हैं तब मवेशी परेशान करते हैं। यह बताते हुए गंदी बस्ती जेल रोड काकड़ निवासी प्रेमनारायण केवट की प|ी ने कहा कि जिस झोपड़ी में रहते थे वह तोड़ दी, अब अधूरे बिना दीवार के इस मकान में रात को मवेशी घूस आते हैं और नींद तक नसीब नहीं होती। इनका कहना है हमने अतिक्रमण में कुछ नहीं बनाया फिर भी दूसरी किस्त नहीं दी। पहले पता होता, तो कच्चे मकान में ही जिंदगी गुजार देते पर ये परेशानी नहीं देखते।

उपजेल के सामने काकड़ मार्ग पर अपने विवाहित पुत्र सहित 6 सदस्य परिवार के साथ बसंती केवट बीते 1 माह से बेघर जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है। पक्के मकान के लिए नीव भरने के बाद दूसरी किस्त नहीं मिली और अब इसी अधूरे निर्माण की आड़ में खाना बनाकर रात को पूरा परिवार बिना छत के सामने पड़ोसी के आंगन में सोने को मजबूर है। परेशानी पूछी, तो पति को खो चुकी बसंतीबाई रो पड़ी और बताया सोचा था सरकार की योजना पक्का मकान देगी, लेकिन दूसरी किस्त न मिलने से कच्चे मकान का सूख तक नसीब नहीं हो रहा।

जेल रोड निवासी रमेश राठौड़ व राधाकिशन पिता मेहताब सिंह दोनों को दूसरी किस्त जारी नहीं हुई और अब दोनों परिवार बरसाती पन्नी के सहारे रात गुजारने को मजबूर है। इनकी हालत यह है कि आसपास दोनों परिवारों को अलग-अलग रहने के लिए खाली जगह तक नहीं मिली, तो बरसाती के नीचे एक साथ रह रहे हैं। रमेश ने बताया नगरपालिका के कई चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन दूसरी किस्त के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

प्रधानमंत्री आवास योजना

अतिक्रमण मुक्त निर्माण के सत्यापन के देरी से निर्माण की दूसरी किस्त जारी न होने से परेशान हो रहे 168 परिवार

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