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दो धर्मों को जोड़ने की सीख देता 16वीं शताब्दी का जटाशंकर महादेव

पुरुषोत्तम पारवानी | शुजालपुर जटाशंकर महादेव मंदिर जमधड़ नदी के किनारे शुजालपुर सिटी से 1 किलोमीटर दूर स्थित...

Danik Bhaskar | Feb 13, 2018, 06:45 AM IST
पुरुषोत्तम पारवानी | शुजालपुर

जटाशंकर महादेव मंदिर जमधड़ नदी के किनारे शुजालपुर सिटी से 1 किलोमीटर दूर स्थित है। इस मंदिर की एक खासियत यह भी है कि यहां हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल नजर आती है। मंदिर और दरगाह एक ही दीवार से लगे हुए हैं। दोनों धर्म के लोग श्रद्धा से यहां पहुंचते हैं। मंदिर करीब 400 साल पहले बनाया गया था। 2010 में मुख्यमंत्री ने मंदिर के कायाकल्प व परिसर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 2 करोड़ रुपए की घोषणा की थी। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर यहां भव्य मेला लगता है।

ये है एतिहासिक मंदिर

ये है दरगाह

भास्कर आपको एरियल व्यू से दिखा रहा है शुजालपुर की जमधड़ नदी के किनारे बना शिव मंदिर

निर्माण की कहानी

बताया जाता है मंदिर की स्थापना औरंगजेब के शासनकाल के पूर्व सोलहवीं शताब्दी में हुई थी। लगभग 400 वर्ष पूर्व एक तपस्वी ने इसी स्थान पर घोर तप किया था और उन्हीं की समाधि पर मंदिर बनाया गया था। ऐसी भी मान्यता है कि उन्हीं तपस्वी की जटाएं खुदाई में निकली थीं।

संस्कृत पाठशाला

करीब 8 साल पहले ब्रह्मचारी पं. कृष्णचैतन्य संस्कृत पाठशाला के प्रधान का पद व उड़ीसा निवासी परिवार को छोड़कर शुजालपुर आए। यहां उन्होंने संस्कृत पाठशाला की शुरुआत की। दूर-दूर से विद्यार्थी यहां संस्कृत सीखने आते हैं। कुछ वर्ष पूर्व दिव्यज्योति में लीन हुए कृष्णचैतन्यजी को जमधड़ नदी के किनारे पंचतत्व में विलीन किया गया।

यहां लगता है भव्य मेला

यहां औरंगजेब भी हारा

इतिहासकार शांतिलाल अग्रवाल बताते हैं औरंगजेब ने मंदिर की खुदाई करवाई थी, ताकि शिवलिंग निकाला जा सके। हालांकि वे शिवलिंग को नहीं हटा पाए। खुदाई के दौरान शिवलिंग का सिरा पाने के स्थान पर उनके हाथ केवल जटाएं ही लगीं । तभी से स्थान जटाशंकर महादेव के नाम से जाना जाता है।

ये है जमधड़ नदी