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पहली बार नकली शादी की तो खुद भी हुई ठगी का शिकार , फिर भी जुड़ी रही गिरोह से, 4 दूल्हों को दिया धोखा

भास्कर संवाददाता | शुजालपुर लुटेरी दुल्हन यास्मिन ने जब पहली बार नकली शादी की तो वह खुद भी ठगी का शिकार हुई।...

Dainik Bhaskar

Feb 18, 2018, 07:10 AM IST
पहली बार नकली शादी की तो खुद भी हुई ठगी का शिकार , फिर भी जुड़ी रही गिरोह से, 4 दूल्हों को दिया धोखा
भास्कर संवाददाता | शुजालपुर

लुटेरी दुल्हन यास्मिन ने जब पहली बार नकली शादी की तो वह खुद भी ठगी का शिकार हुई। गिरोह में शामिल बदमाशों ने उसे तय राशि ही नहीं दी। इसके बाद भी गिरोह के सरगना ने 15 दिन बाद ही उसे बातों में उलझाकर वापस काम के लिए राजी किया और चार नकली शादियां करवाईं। दो परिवारों से रिश्ता पक्का कर रकम लेने के बाद भी इसने शादी नहीं की। बाकी दो जगह शादी हुई तो मन्नत के नाम पर पति से दूरी बनाए रखी और फिर माल बटोरकर फरार हो गई। शुजालपुर अनुभाग के ग्राम पेंवची निवासी धनपाल जैन से शादी कर करीब दो लाख की चपत लगाने के आरोप में अब आष्टा निवासी माही उर्फ यास्मीन अब जेल में है।

पांच हजार कमाने का लालच देकर बनाया गिरोह

लुटेरी दुल्हन माही ने बताया राजेंद्र श्रीवास से मेरी मुलाकात भोपाल में गौतम नगर में उसके घर पर हुई थी। तब में वेजिटेबल कटर की मार्केटिंग करती थी। उसने तब मेरा विजिटिंग कार्ड ले लिया था। इस मुलाकात के 2 महीने बाद राजेंद्र ने फोन कर 2 दिन में 5 हजार रुपए कमाने का लालच दिया। फिर मिलने बुलाया और नकली दुल्हन बन ठगी करने के लिए राजी कर लिया। इस तरह दूल्हों को ठगने वाली गैंग तैयार की।

धार में किया था पहला शिकार

लुटेरी दुल्हन ने बताया सबसे पहले हमने शिकार बनाया धार जिले के ग्राम उमरिया निवासी जीवन जाट को। उसने पीथमपुर के पास इंडोरामा में चाय पीते समय एक पंडित से शादी का जिक्र किया था। यहीं से उसे राजेंद्र श्रीवास उर्फ नितिन का नंबर मिला। अगले ही दिन 70 हजार व जेवर में रिश्ता कराने की बातें हुईं और बेटी बताकर एक लड़की को इस युवक को दिखाया गया। लड़की मोटी थी, इसलिए बात नहीं बनी। इसके बाद राजेंद्र ने मुझे भतीजी बताकर मिलवाया। मैं जीवन के घर गई, जहां परिवार ने मुझे पसंद कर लिया। इसके तुरंत बाद जीवन का परिवार फर्जी चाचा राजेंद्र के घर रिश्ता तय करने भोपाल पहुंच गया। यहां 5 हजार रस्म अदायगी के लेकर 31 अक्टूबर की शादी तय की गई। बेटमा के महादेव मंदिर में बकायदा पंडित के सामने माही ने जीवन के साथ सात फेरे लिए और उसके घर दुल्हन बनकर पहुंच गई। जब जीवन मेरे करीब आने लगा तो भैरव महाराज की मन्नत बताकर दर्शन करने के बाद ही पति-प|ी की तरह रहने का हवाला देकर मैंने उससे दूरी बनाई। 3 दिन बाद राजेंद्र ने भोपाल में कार्यक्रम आयोजित करने के बहाने बुलाया। वहां कोर्ट में विवाह अनुबंध के बहाने मुझे अलग ले गए और फिर अपनी गाड़ी में बैठकर पूरा ठग गिरोह फरार हो गया। इसके बाद गौतम नगर वाला मकान भी खाली कर दिया। जीवन ने इसकी शिकायत भोपाल में पुलिस से की। हालांकि मुझे इस ठगी की राशि में से हिस्सा नहीं मिला। मैंने काम करने से मना किया, तो जैसे-तैसे राजेंद्र ने मना लिया।

शुजालपुर पेंवची में जैन परिवार की खुशियों को इस तरह दिया चकनाचूर।

दक्षिणा के लालच में पंडित देता शिकार, उसे भी ठगते

पेशे से ड्राइवर राजेंद्र दूल्हा बनने की ख्वाहिश रखने वाले युवकों को फंसाने के लिए पंडित व रिश्ता कराने में रुचि रखने वालों को 5000 की दक्षिणा देने का लालच देता था। पंडित को शादी एक बाद रकम देने का वादा किया जाता और दक्षिणा की जगह पंडित को रिश्ता टूटने या दुल्हन के भागने की खबर मिलती। गिरोह ने किसी पंडित को एक रुपया तक नहीं दिया।

दो जगह बिन शादी के ऐंठी रकम

माही ने बताया हमारा शिकार आष्टा के भमोरा का परिवार भी बना। यहां सगाई के बहाने 5000 ठगे और बाद में रिश्ते से मना कर दिया। पीथमपुर में भी रिश्ते की बात कर रस्म अदायगी के नाम पर 5000 रुपए लेने के बाद शादी से इनकार किया। चौथा शिकार शुजालपुर के ग्राम पेंवची का जैन परिवार बना।

कार्ड से तैयार किया नकली आधार कार्ड

गिरोह सरगना राजेंद्र ने पुलिस को बताया कि उसके आधार कार्ड को स्कैन कर बाकी सभी बदमाशों के फर्जी आधार कार्ड तैयार कर स्टांप पर अनुबंध कर शादी की लिखापढ़ी की। शुजालपुर में भी राजेंद्र के आधार कार्ड के अलावा चाची-भाई-दुल्हन के नकली आधार कार्ड लगाकर शादी का अनुबंध किया गया।

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