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मंच पर जीवंत की कुप्रथा की पीड़ा, पड़ोसी के बच्चे को नजर लगी तो पंचायत ने डायन बताकर बंद कर दिया हुक्का-पानी

शासकीय जेएनएस कॉलेज में नाटक प्रस्तुत कर बताया विधि के विद्यार्थियों ने डायन प्रथा से लड़ने का कानूनी तरीका ...

Dainik Bhaskar

Jan 18, 2018, 07:25 AM IST
शासकीय जेएनएस कॉलेज में नाटक प्रस्तुत कर बताया विधि के विद्यार्थियों ने डायन प्रथा से लड़ने का कानूनी तरीका

भास्कर संवाददाता | शुजालपुर

पड़ोसी के बच्चे को नजर लगी, तो एक महिला को डायन बताकर पंचायत ने पूरे परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया। इसके बाद गांव के शिक्षित युवाओं ने पहले नजर लगने से बीमार बच्चे का उपचार कराकर ग्रामीणों को सही तथ्य बताया और उसके बाद विधिक सहायता कर पंचायत को हुक्का-पानी बंद करने के गलत फरमान को वापस लेने पर राजी कर डायन करार दी गई महिला को सम्मान से जीने का अधिकार वापस दिलाया। जब ये हुआ तो मौजूद सैकड़ों लोगों ने भी एक साथ डायन प्रथा के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया।

शाजापुर और राजगढ़ जिले में डायन प्रथा से लड़ने के कानूनी तरीके व शिक्षित उपायों पर आधारित नाटिका प्रस्तुत करते हुए ये सब जेएनएस कॉलेज के वार्षिकोत्सव में विधि संकाय के विद्यार्थियों ने बुधवार को मंच पर प्रस्तुत किया। नारी सशक्तिकरण का मजबूत संदेश छोड़ते इस आयोजन को सैकड़ों विद्यार्थियों ने सराहते हुए समाज में डायन कुप्रथा के खिलाफ लड़ने में सहयोग का संकल्प लिया। आयोजन में अन्य रंगारंग नृत्य व गायन की प्रस्तुतियां भी हुई। दीपिका परमार, निकिता पाटीदार ने फिल्मी गीत पर प्रस्तुति दी। शासकीय जवाहरलाल नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्रारंभ हुए वार्षिक उत्सव के दूसरे दिन बुधवार को मंचीय कार्यक्रम में सर्वाधिक सराहना डायन कुप्रथा के खिलाफ विधि संरक्षण प्रदान करते हुए महिलाओं को सशक्त करने की नाटिका को मिली।

लोगों ने ली शपथ

नाटक के मंचन में जब डायन प्रथा को खत्म करने मंच पर शपथ ली जा रही थी तब आयोजन स्थल के सदन पर मौजूद सैकड़ों लोगों ने भी हाथ आगे कर इसी प्रकार कुप्रथा के खिलाफ समाज में जागृति लाने का संकल्प लिया। इस नाटिका का निर्देशन विधि संकाय के संजय मिश्रा व गुलाब सिंह मेवाड़ा ने किया। मंचन करने वाले कलाकारों में गोपाल चौहान, हेमंत, देवराज, अर्जुन, सतीश, कीर्ति सिकरवार, दयावंती मेवाड़ा, निशा सूर्यवंशी, आनंद मालवीय, अखिलेश मालवीय, अर्पित जैन, रजनीश बमुरिया, स्तुति खन्ना, कृतिका गेहलोत शामिल थेे। इससे पूर्व आयोजन में एकल नृत्य, समूह नृत्य की प्रस्तुतियों ने खूब लुभाया। आज गुरुवार को वार्षिक उत्सव के तहत साहित्यिक स्पर्धाएं होंगी। 24 जनवरी को वार्षिक उत्सव का पुरस्कार वितरण समारोह रखा गया है।

डायन प्रथा के विरुद्ध नाटिका प्रस्तुत करते विद्यार्थी कलाकार।

वार्षिक उत्सव में उपस्थित विद्यार्थियों का जनसमूह।

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