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एमए पास पर सेल्समैन की नौकरी भी नहीं मिली छात्राएं बोलीं- हम क्यों नहीं बन सकतीं गार्ड

महिला सशक्तिकरण के दौर में लड़कियों को हर क्षेत्र में आगे रखा जा रहा है तो फिर सुरक्षा से जुड़ी नौकरी के अवसर हमारे...

Dainik Bhaskar

Feb 24, 2018, 09:10 AM IST
एमए पास पर सेल्समैन की नौकरी भी नहीं मिली छात्राएं बोलीं- हम क्यों नहीं बन सकतीं गार्ड
महिला सशक्तिकरण के दौर में लड़कियों को हर क्षेत्र में आगे रखा जा रहा है तो फिर सुरक्षा से जुड़ी नौकरी के अवसर हमारे लिए क्यों नहीं। हम सिक्यूरिटी गार्ड क्यों नहीं बन सकती? ये सवाल थे 10 किमी दूर गांव नैनावद से शहर में रोजगार के अवसर तलाशने आई छात्रा सोना सोलंकी और भावना शर्मा के।

लीड बीएसएन शासकीय पीजी कॉलेज में शुक्रवार को लगे रोजगार मेले में आई ये छात्राएं दरअसल घूमते हुए एसआईएस सिक्यूरिटी इंडिया लिमिटेड कंपनी के स्टॉल पर पहुंची थी। प्रतिनिधि धर्मेंद्र व नरेंद्र पाटीदार ने जब उन्हें यह जॉब सिर्फ लड़कों के लिए होने की बात कही तो छात्राओं ने उलटा प्रतिनिधियों से यह सवाल पूछा। हालांकि पूरी बात सुनकर वे सहमत हुईं और दूसरे स्टॉलों पर पहुंची। कृषि उत्पाद व सेलिंग क्षेत्र की शिवशक्ति बायो टेक्नोलॉजी कंपनी के प्रतिनिधि रजनीश मिश्रा को छात्र ललित शास्त्री व मुकेश मेवाड़ा ने एमए पास होकर भी कंपनी के सामान बेचने की नौकरी पाने इंटरव्यू दिए। पनवाड़ी से आए भूपेंद्र कुमार सोनी (36) को मेले में घूमने के बाद भी ओवरएज होने से जॉब अवसर नहीं मिले। फीटर शाखा में आईटीआई डिग्रीधारी शुजालपुर के सजल परसाई (25) को इस क्षेत्र के जॉब ऑफर मेले में कम मिलने से खाली हाथ लौटना पड़ा। जिला व्यापार उद्योग केंद्र पर स्वरोजगार के लिए सिर्फ 20 लोगों ने चर्चाएं कीं।

कंपनियां बढ़ी, ऐन मौके पर पोर्च में लगाने पड़े फर्नीचर

कॉलेज प्रबंधन की अपेक्षा के हिसाब से मेले में ज्यादा कंपनियां आने पर जगह की समस्या आ गई। मुख्य प्रांगण उद्घाटन कार्यक्रम व सरकारी विभागों की प्रदर्शनी के लिए पहले ही सुरक्षित रखने से बाहर से आए कंपनी प्रतिनिधियों को ऐन मौके पर पोर्च में फर्नीचर रखवाकर बैठाना पड़े।

शाजापुर | सिक्यूरिटी गार्ड कंपनी प्रतिनिधियों से सवाल पूछती छात्राएं।

हाथ ♣हिलाकर छात्रों को खाली कुर्सियों पर बैठने के लिए बुलाते डॉ. राठी।

मार्गदर्शन देने वाले को ही हाथ हिलाकर छात्रों को बुलाना पड़ा

स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ भोपाल के पूर्व उप निदेशक डॉ. डी.सी. राठी को विशेष तौर पर छात्रों को मार्गदर्शन देने आमंत्रित किया था। उद्घाटन के बाद दोपहर को जब उनका उद्बोधन होना था तो प्रांगण में गिने-चुने छात्र थे। डॉ. राठी ने एक हाथ में माइक थाम दूसरे हाथ से इशारा कर छात्रों को आगे खाली कुर्सियों पर बैठने बुलाया। अरुचि देख डॉ. राठी बोले सोचा था आपको प्रेरणादाई ट्रिक्स दूंगा। रुचि नहीं है तो मात्र 10 मिनट में उद्बोधन खत्म कर दूंगा।

फैक्ट फाइल


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(स्रोत: मेला आयोजन समिति)

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