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कंट्रोल रूम बनाए, नंबर डायल करते ही दूर होगी पानी की किल्लत

लगातार गिरते भू-जल स्तर के देख इस बार जिले में ज्यादा जलसंकट गहराने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए पेयजल...

Dainik Bhaskar

Mar 26, 2018, 05:30 PM IST
लगातार गिरते भू-जल स्तर के देख इस बार जिले में ज्यादा जलसंकट गहराने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए पेयजल संबंधी परेशानियों का निराकरण करने के लिए पीएचई विभाग ने इस बार नई पहल शुरू की है। इसके तहत नंबर डायल करते ही संबंधित क्षेत्र की पेयजल समस्या का निपटारा करा दिया जाएगा। इसके लिए सभी ब्लॉक स्तरों पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। वहां से परेशानी हल नहीं होने की स्थिति में जिला स्तर पर भी कंट्रोल रूम बनाया गया है। पानी की समस्याओं का निपटारा कराने के लिए जिले में इस तरह की यह पहल पहली बार की गई है।

ज्ञात रहे अंधाधुंध पेड़ कटाई के कारण अल्प वर्षा होने से जिले का भू-जल स्तर पाताल में पहुंच गया है। हर साल 5-10 फीट गहराई में पहुंचने वाला जल स्तर इस बार अब तक के सबसे रिकॉर्ड 180 फीट नीचे पहुंच गया। पेयजल स्रोत भी सूखे पड़े हैं। दम तोड़ते कुएं, बावड़ी, नदी, तालाब और ट्यूबवेल के कारण अभी से कई गांवों में पानी की समस्या विकराल रूप लेने लगी है। जिलेवासियों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पीएचई विभाग ने सभी ब्लॉक स्तरों पर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए हैं। इनके नंबर सार्वजनिक कर दिए हैं। ताकि किसी भी गांव में पानी संबंधी परेशानी आते ही तत्काल निराकरण कर दिया जा सके। कंट्रोल रूम पर सूचना आते ही संंबंधित अधिकारियों को उस गांव में पहुुंचकर समस्या का निपटारा कराया जाना है। ऐसा नहीं होने की स्थिति में मॉनीटरिंग करने के लिए जिला स्तर पर भी कंट्रोल रूम रहेगा। यदि ब्लॉक स्तर से निराकरण नहीं हुआ तो संबंधित व्यक्ति सीधे जिला स्तर के कंट्रोल रूम में फोन लगाकर अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं।

जिले में औसत बारिश व गिरता जल स्तर

वर्ष औसत बारिश जल स्तर फीट में

2007 60.54 100

2008 20.32 110

2009 41.28 105

2010 22.68 120

2011 46.6 100

2012 36.75 120

2013 48.42 120

2014 31.6 150

2015 56.56 140

2016 44.92 150

2017 27.65 180

(नोट- बारिश के आंकड़े इंच में है। जिले की औसत बारिश 39.60 इंच है।)

800 फीट में भी नहीं मिलता पानी

जिले में लगातार भू-जल स्तर गिरता जा रहा है। स्थिति यह है कि कई गांवों में जमीन के अंदर भी पानी नहीं है। इतनी गहराई से आने वाले पानी का स्वाद भी नहीं है। बावजूद लोगों को इसी के सहारे प्यास बुझाना पड़ रही है। जिले का औसत भू-जल स्तर भी इस बार 180 फीट पर पहुंच गया है।

यहां दर्ज करा सकेंगे समस्या

शाजापुर, मो. बड़ोदिया क्षेत्र के लिए- 07364-228003, सहायक यंत्री- 8839894366, उपयंत्री- 9926820530, समन्वयक - 8817017999.

शुजालपुर व कालापीपल क्षेत्र के लिए- सहायक यंत्री- 8821035100, उपयंत्री - 9406678811, समन्वयक- 9826992582, उपयंत्री कालापीपल- 9424856634, समन्वयक - 7580923142.

तो सीधे जिला स्तर पर दें सूचना

ब्लॉक स्तरों पर समस्या दर्ज कराने के बाद भी यदि ग्रामीणों की समस्या का निपटारा नहीं होता है तो वे सीधे जिला स्तर पर बनाए कंट्रोल रूम पर 07364-228862, ईई पीएचई रवि देहरिया- 94258-55746, 7000097270 पर संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस दौरान वे ब्लॉक स्तर पर शिकायत दर्ज कराने पर मिले अधिकारियों के रिस्पोंस की फीडबैक भी वरिष्ठ अफसरों तक पहुंचा सकेंगे।

बांध में 8 फीट पानी, आ सकती है परेशानी- करीब 1 लाख आबादी वाले शहर की जलापूर्ति करने वाले चीलर बांध में इस साल सिर्फ 10 फीट पानी की जमा हो सका। हालांकि शहरवासियों की प्यास बुझाने के लिए यह पानी पर्याप्त है, लेकिन हर सप्लाई (एक दिन छोड़कर) के लिए खर्च होने वाले 100 लाख लीटर पानी के लिए नहर और नदी में बहाते हुए वाटर वर्क्स तक पानी पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया में इतना ही पानी व्यर्थ खराब हो जाता है। डेम में फिलहाल करीब 8 फीट पानी जमा है, लेकिन ऐसे हाल में भी यहां पानी चोरी को नहीं रोका जा रहा। यदि डेम से ऐसे ही पानी चोरी होती रही तो आने वाले दिनों में शहरवासियों को भी पेयजल संकट से जूझना पड़ सकता है।

2 करोड़ 41 लाख से बुझेगी प्यास

पेयजल संकट से निपटने के लिए इस बार बड़े स्तर पर रूपरेखा तैयार की गई है। इसके तहत बंद पड़ी नल जल योजनाओं को चालू कराने सहित मुख्यमंत्री पेयजल योजना के नाम से प्रत्येक ब्लॉक के 8-8 गांवों में पानी के सारे इंतजामात किए जाने है। 40 नए बोरवेल खनन किए जाएंगे। जबकि 200 हैंडपंप जो जल स्तर गिरने के कारण बंद हो चुके हैं, उनमें सिंगल फेस मोटरें डाली जाएंगी। इन सब पर जिले में 2 करोड़ 41 लाख 76 हजार रुपए खर्च होंगे।

जलस्तर गिरने के कारण हांफने लगे 500 हैंडपंप

जिले में कुल 4660 हैंडपंप हैं। इसमें से जल स्तर गिरने के कारण 500 हैंडपंप की सांसें फुल गई है। ऐसे में इन गांवों में अभी से पेयजल संकट के आसार बनने लगे हैं।

ताकि समस्याअों का तत्काल निराकरण हो सके


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