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10 साल पहले ट्रैक्टर खरीदा, दूसरे के नाम किया फायनेंस, अब निकाली 2.2 लाख की पैनल्टी

ट्रैक्टर डीलर-फायनेंस कंपनी की बड़ी गड़बड़ी, किसान ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप भास्कर संवाददाता | शाजापुर ट्रैक्टर...

Dainik Bhaskar

May 16, 2018, 05:30 AM IST
ट्रैक्टर डीलर-फायनेंस कंपनी की बड़ी गड़बड़ी, किसान ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप

भास्कर संवाददाता | शाजापुर

ट्रैक्टर खरीदी के मामले में डीलर और फायनेंस कंपनी द्वारा अरनियाखुर्द (कालापीपल) के एक किसान के साथ धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। 10 साल पहले किसान ने शुजालपुर से 4 लाख 75 हजार रुपए कीमत का ट्रैक्टर खरीदा। 2 लाख रुपए नकद देने के बाद शेष राशि और बीमा आदि मिलाकर 3 लाख 8 हजार 503 का कोटक महेंद्रा बैंक लिमिटेड के शोरूम पर बैठे कर्मचारी के माध्यम से फायनेंस कराने के लिए दस्तावेज सौंपे। कंपनी ने यह फायनेंस किसी दूसरे ही व्यक्ति के नाम से करा दिया।

ट्रैक्टर खरीदने वाले किसान घीसीलाल पिता दीनानाथ पंवार ने पूर्व निर्धारित 14 किश्तों के रूप में 5 लाख 85 हजार 200 रुपए जमा भी करा दिए यानी कुल 2 लाख 76 हजार 699 रुपए ब्याज चुकाने के बाद किसान मई 2015 में बेफिक्र हो गया। हाल ही में घीसीलाल ने अपना पुराना ट्रैक्टर गांव के ही कमल पिता गजराज को बेच दिया। इस पर जब घीसीलाल फायनेंस कंपनी के शुजालपुर स्थित कार्यालय पहुंचे तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। मौजूद कर्मचारियों ने यह बताया आपका फायनेंस को पूरा जमा हो गया है, लेकिन बीच में एक दो बार किश्त देरी से जमा कराई थी। इसकी पैनल्टी 2 लाख 20 हजार रुपए है। यह राशि जमा कराने के बाद ही ट्रैक्टर की एनओसी मिलेगी। इधर, मामले में पीड़ित किसान घीसीलाल ने बताया कि इससे पहले कंपनी ने मुझे कभी किसी पैनल्टी आदि के बारे में नहीं बताया। अब अचानक इतनी बड़ी रकम पैनल्टी कैसे लगा दी गई। घीसीलाल ने कलेक्टर के नाम जिपं सीईओ वंदना शर्मा को सारे दस्तावेजों के साथ लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है।

एनओसी लेने गया तो रिकॉर्ड से तब पता चला दूसरे के नाम से

आवेदक घीसीलाल पिता दीनानाथ पंवार ने बताया ट्रैक्टर मैंने अपने नाम से खरीदा। फायनेंस कराने के लिए भी मैंने अपनी जमीन के दस्तावेज दिए, लेकिन उक्त ट्रैक्टर का फायनेंस कंपनी ने गजराज पिता हमीरसिंह की जमीन पर घीसीलाल पिता गजराजसिंह के नाम कर दिया गया। इसकी मुझे जानकारी भी नहीं दी गई। हाल ही में एनओसी लेने पहुंचा और रिकाॅर्ड निकलवाया तब पता चला कि फायनेंस गांव के ही दूसरे व्यक्ति के नाम से है।

दस साल बाद मुसीबत, दोगुना राशि जमा कराने के बाद निकाली पैनल्टी राशि

सितंबर 2008 में कुल 3 लाख 8 हजार 503 रुपए के ऋण जमा कराने के लिए 6-6 माह के अंतराल पर बनाई गई 41 हजार 800 रुपए किस्त जमा करता रहा। 14 किस्तों के रूप में मैंने 5 लाख 85 हजार 200 रुपए मई 2015 तक जमा कराकर ब्याज सहित ऋण की राशि चुकता करा दी। लेकिन जब एनओसी लेने पहुंचा तो कंपनी कर्मचारियों ने अब 3-4 माह पहले बताया कि अपने वर्ष 2011 में एक-दो किस्त कुछ देरी से जमा कराई थी। इसकी पैनल्टी लगी थी जो आपने जमा नहीं कराई। यह राशि अब 2 लाख 20 हजार रुपए हो गई है। यह जमा कराने के बाद ही एनओसी मिल सकेगी।

कंपनी कर्मचारी ने कहा- शिकायत के लिए किसान इंदौर-भोपाल के आॅफिस जाए

फायनेंस कंपनी कोटक महिंद्रा बैंक के स्थानीय कर्मचारी दीपेंद्र ने इस मामले में सीधे बोल दिया कि संबंधित किसान को कंपनी के इंदौर या भोपाल स्थित कार्यालय जाकर वरिष्ठ अधिकारियों से ही चर्चा करना पड़ेगी। स्थानीय स्तर पर इस मामले में स्थानीय स्तर पर कुछ नहीं हो सकता। इधर, किसान घीसीलाल ने बताया डीलर और कंपनी के कर्मचारियों ने मिलकर धोखाधड़ी की है। एक दो किश्त ओलावृष्टि आदि की स्थिति में फसल खराब हो जाने के कारण 20-25 दिन देरी से जमा की थी। इसकी पैनल्टी के नाम पर अब 2 लाख 20 हजार रुपए बताए जा रहे हैं। मैं प्रताड़ित हो चुका हूं।

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