--Advertisement--

बीमा पाॅलिसी के नियमों और शर्तों को हिंदी में कराएं

Shujalpur News - भास्कर संवाददाता | कालापीपल अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ब्लाॅक इकाई कालापीपल के प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर को...

Dainik Bhaskar

May 16, 2018, 05:30 AM IST
बीमा पाॅलिसी के नियमों और शर्तों को हिंदी में कराएं
भास्कर संवाददाता | कालापीपल

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ब्लाॅक इकाई कालापीपल के प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर को बीमा पाॅलिसी के नियम व शर्तें हिंदी या अन्य स्थानीय भाषाओं एवं पढ़ने योग्य अक्षरों में लिखे जाने हेतु ज्ञापन सौंपा। ग्राहक पंचायत के प्रांतीय सदस्य केशव आचार्य ने बताया हमारे देश में किसी भी प्रकार के बीमा करवाने पर ग्राहकों को अंग्रेजी भाषा में लिखा हुआ अनुबंध-पत्र दिया जाता है। जबकि देश के अधिकांश लोगों को अंग्रेजी भाषा का कम ही ज्ञान है, ऐसे में पाॅलिसी में क्या लिखा हुआ है जान नहीं पाते हैं। साथ ही पाॅलिसी में कुछ नियम व शर्तें इतने छोटे अक्षरों में होते हैं कि नग्न आंखों से पढ़ ही नहीं पाते हैं, इन पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता है।

ग्राहक पंचायत के सदस्यों ने बताया किसी भी व्यक्ति को ये जानने का पूर्ण अधिकार है कि उसकी बीमा पाॅलिसी में क्या लिखा है? यदि पाॅलिसी की भाषा अंग्रेजी के साथ ही हिंदी या अन्य स्थानीय भाषाओं में हो तो उसे समझ पाने में किसी भी प्रकार की कोई असुविधा नहीं होगी। आज के समय में बीमाधारक की किसी कारण असमय मृत्यु या दुर्घटना में अंग-भंग हो जाता है तो परिवारजन पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ता है, ऐसे में परिवार को बीमा पाॅलिसी में जमा धन का सहारा लेना होता है, लेकिन ऐसे कई उदाहरण देखने व सुनने में आते हैं कि जब किसी व्यक्ति के साथ कोई दुर्घटना होती है और उसे बीमा कंपनी द्वारा नियमों व शर्तों का हवाला देकर उसके द्वारा सुरक्षा के लिए पाॅलिसी में जमा किए राशि से वंचित होना पड़ा है। इस अवसर पर जगदीश गुरु (मानवाधिकार आयोग सदस्य), हरिचरण परमार, श्रीकांत (अभा ग्राहक पंचायत शुजालपुर ब्लाॅक अध्यक्ष), राजेंद्र परमार आदि उपस्थित थे।

राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते ग्राहक पंचायत सदस्य।

भास्कर संवाददाता | कालापीपल

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ब्लाॅक इकाई कालापीपल के प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर को बीमा पाॅलिसी के नियम व शर्तें हिंदी या अन्य स्थानीय भाषाओं एवं पढ़ने योग्य अक्षरों में लिखे जाने हेतु ज्ञापन सौंपा। ग्राहक पंचायत के प्रांतीय सदस्य केशव आचार्य ने बताया हमारे देश में किसी भी प्रकार के बीमा करवाने पर ग्राहकों को अंग्रेजी भाषा में लिखा हुआ अनुबंध-पत्र दिया जाता है। जबकि देश के अधिकांश लोगों को अंग्रेजी भाषा का कम ही ज्ञान है, ऐसे में पाॅलिसी में क्या लिखा हुआ है जान नहीं पाते हैं। साथ ही पाॅलिसी में कुछ नियम व शर्तें इतने छोटे अक्षरों में होते हैं कि नग्न आंखों से पढ़ ही नहीं पाते हैं, इन पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता है।

ग्राहक पंचायत के सदस्यों ने बताया किसी भी व्यक्ति को ये जानने का पूर्ण अधिकार है कि उसकी बीमा पाॅलिसी में क्या लिखा है? यदि पाॅलिसी की भाषा अंग्रेजी के साथ ही हिंदी या अन्य स्थानीय भाषाओं में हो तो उसे समझ पाने में किसी भी प्रकार की कोई असुविधा नहीं होगी। आज के समय में बीमाधारक की किसी कारण असमय मृत्यु या दुर्घटना में अंग-भंग हो जाता है तो परिवारजन पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ता है, ऐसे में परिवार को बीमा पाॅलिसी में जमा धन का सहारा लेना होता है, लेकिन ऐसे कई उदाहरण देखने व सुनने में आते हैं कि जब किसी व्यक्ति के साथ कोई दुर्घटना होती है और उसे बीमा कंपनी द्वारा नियमों व शर्तों का हवाला देकर उसके द्वारा सुरक्षा के लिए पाॅलिसी में जमा किए राशि से वंचित होना पड़ा है। इस अवसर पर जगदीश गुरु (मानवाधिकार आयोग सदस्य), हरिचरण परमार, श्रीकांत (अभा ग्राहक पंचायत शुजालपुर ब्लाॅक अध्यक्ष), राजेंद्र परमार आदि उपस्थित थे।

X
बीमा पाॅलिसी के नियमों और शर्तों को हिंदी में कराएं
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..