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सड़क किनारे खड़े रहने वाले वाहनों से होने वाले हादसे होंगे कम, नए नेशनल हाईवे पर बनेंगे 5 ले-बॉय

भास्कर संवाददाता | शुजालपुर पचोर से आष्टा के बीच लगातार हो रहे सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए 5 ले-बॉय बनाए जाएंगे।...

Dainik Bhaskar

May 09, 2018, 05:35 AM IST
भास्कर संवाददाता | शुजालपुर

पचोर से आष्टा के बीच लगातार हो रहे सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए 5 ले-बॉय बनाए जाएंगे। इससे इस मार्ग पर सड़क किनारे खड़े रहने वाले वाहनों की वजह से होने वाले हादसों पर लगाम लगेगी। साथ ही अब केंद्र व राज्य सरकार द्वारा नवगठित राष्ट्रीय राजमार्ग 752 स के तहत पचोर से आष्टा तक प्रस्तावित 70 किलोमीटर लंबा मार्ग निर्माण का सुपरविजन भी एमपीआरडीसी की जगह लोक निर्माण विभाग को सौंप दिया गया है। 265 करोड़ की लागत से बनने वाले इस मार्ग पर इसी माह काम शुरू होने के आसार है।

केंद्र व राज्य सरकार द्वारा आवागमन को सुलभ करने के लिए नए राष्ट्रीय राज्य मार्गों का गठन कर पचोर-शुजालपुर-आष्टा को राजमार्ग क्रमांक 752 श्रेणी स का नाम दिया है। पचोर से आष्टा तक 70 किलोमीटर तक दो अलग-अलग कंपनियां 265 करोड़ की लागत से मार्ग निर्माण के लिए तय की जा चुकी है, लेकिन अब इस मार्ग का निर्माण लोक निर्माण विभाग के तहत होना है। एमपीआरडीसी के एजीएम अतुल कुमार ने बताया शासन स्तर से नवगठित राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण लोक निर्माण विभाग को दे दिया गया है। इन्होंने बताया पचोर से शुजालपुर तक 30-30 किलोमीटर निर्माण के मध्य 2 व इसी तरह शुजालपुर से आष्टा तक 40.5 किलोमीटर निर्माण के मध्य 3 ले-बाॅय बनेंगे। इन पर ट्रक-बस खड़े हो सकेंगे ताकि भारी आवागमन के दौरान बीच सड़क पर खड़े वाहनों की वजह से हादसे न हो। हालांकि ये सभी 5 ले-बाॅय शहरी इलाके में नहीं होंगे। एजीएम पाठक के अनुसार 10 मीटर सीमेंट-कांक्रीट रोड तथा रोड के दोनों ओर 4 मीटर की पटरी के सहित कुल 14 मीटर के इस मार्ग पर ले-बाॅय बनाने के स्थल का सर्वे भी किया जा रहा है। वर्तमान में आष्टा-पचोर के बीच ट्रक व भारी वाहनों के लिए एक भी ले-बाॅय नहीं है। ऐसे में सड़क के दोनों ओर वाहन आड़े-तिरछे खड़े होने से कई हादसे हो चुके हैं। ले-बाॅय की कमी से लगातार दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। विशेषकर शुजालपुर से आष्टा के बीच मार्ग पर कई जगह पर ट्रक एवं भारी वाहन बेतरतीब खड़े रहते हैं।

शुजालपुर के अंदरूनी फोरलेन पर भी ले-बाॅय की जरूरत

शुजालपुर के अंदरूनी फोरलेन पर लक्ष्मीबाई पार्क के सामने, शहर के बाहर आष्टा मार्ग पर प्लांट के सामने जाम की स्थिति बनी रहती है। लक्ष्मीबाई पार्क के सामने ट्रक, बस व अन्य वाहनों के गैरेज हैं। इन दुकानदारों के पास जगह कम होने के कारण वाहनों को सड़क किनारे खड़े कर ठीक किया जाता है। इसी मार्ग पर प्रमुख दुकानें होने से सिटी क्षेत्र में भी दिनभर वाहनों का जमावड़ा रहता है। ऐसे में नेशनल हाइवे शहर से निकलने के दौरान यातायात का दबाव बढ़ने से वाहनों को जगह नहीं मिलने से शहरी इलाके में भी ले-बाॅय की जरूरत है। क्रॉसिंग या ओवरटेक के चक्कर में दुर्घटना हो जाती है। इस पर भी अब तक किसी ने ध्यान नहीं दिया गया।

अंदर मार्ग किनारे बढ़ रहा अतिक्रमण

शहर के बीच से होकर निकले हाईवे को राजमार्ग का दर्जा मिलने के बाद सड़क किनारे अतिक्रमण भी बढ़ता जा रहा है। सिटी से मंडी तक 3 किमी मार्ग पर नई गुमटियां व दुकानों की संख्या बढ़ती जा रही है। मार्ग के दोनों तरफ 50 से अधिक दुकानें और गुमटी हैं। ऐसे में यहां से गुजरने वाले वाहनों को ओवरटेक की जगह तक नहीं मिलती है और फोरलेन पर दोनों ओर एक-एक अघोषित पार्किंग बनकर रह गई है। जल्दबाजी में वाहन चालक निकलने का प्रयास करता है इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

शुजालपुर के अंदरूनी फोरलेन पर भी ले-बाॅय की जरूरत

शुजालपुर के अंदरूनी फोरलेन पर लक्ष्मीबाई पार्क के सामने, शहर के बाहर आष्टा मार्ग पर प्लांट के सामने जाम की स्थिति बनी रहती है। लक्ष्मीबाई पार्क के सामने ट्रक, बस व अन्य वाहनों के गैरेज हैं। इन दुकानदारों के पास जगह कम होने के कारण वाहनों को सड़क किनारे खड़े कर ठीक किया जाता है। इसी मार्ग पर प्रमुख दुकानें होने से सिटी क्षेत्र में भी दिनभर वाहनों का जमावड़ा रहता है। ऐसे में नेशनल हाइवे शहर से निकलने के दौरान यातायात का दबाव बढ़ने से वाहनों को जगह नहीं मिलने से शहरी इलाके में भी ले-बाॅय की जरूरत है। क्रॉसिंग या ओवरटेक के चक्कर में दुर्घटना हो जाती है। इस पर भी अब तक किसी ने ध्यान नहीं दिया गया।

अंदर मार्ग किनारे बढ़ रहा अतिक्रमण

शहर के बीच से होकर निकले हाईवे को राजमार्ग का दर्जा मिलने के बाद सड़क किनारे अतिक्रमण भी बढ़ता जा रहा है। सिटी से मंडी तक 3 किमी मार्ग पर नई गुमटियां व दुकानों की संख्या बढ़ती जा रही है। मार्ग के दोनों तरफ 50 से अधिक दुकानें और गुमटी हैं। ऐसे में यहां से गुजरने वाले वाहनों को ओवरटेक की जगह तक नहीं मिलती है और फोरलेन पर दोनों ओर एक-एक अघोषित पार्किंग बनकर रह गई है। जल्दबाजी में वाहन चालक निकलने का प्रयास करता है इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

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