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फुलटैंक, तेज गर्मी और घर्षण से जली बाइक, आग बेटे की ओर बढ़ी पर मिट्‌टी ने बचा लिया... लोग देखते रहे पर बचा नहीं पाए

भास्कर संवाददाता | शुजालपुर अकोदिया-शुजालपुर मार्ग पर शुक्रवार सुबह हुई कार-बाइक की टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक...

Dainik Bhaskar

Apr 21, 2018, 07:20 AM IST
फुलटैंक, तेज गर्मी और घर्षण से जली बाइक, आग बेटे की ओर बढ़ी पर मिट्‌टी ने बचा लिया... लोग देखते रहे पर बचा नहीं पाए
भास्कर संवाददाता | शुजालपुर

अकोदिया-शुजालपुर मार्ग पर शुक्रवार सुबह हुई कार-बाइक की टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक चला रहा पुत्र बलराम 15 फीट दूर खेत में जा गिरा। पीछे बैठा पिता केदार सिंह बाइक के साथ जा गिरा। विशेषज्ञों का मानना है कि बाइक में पेट्रोल क्षमता से ज्यादा था। तेज गर्मी से प्रेशर बनता गया। घर्षण से चिंगारियां भी निकली होंगी। तभी पेट्रोल रिसने लगा और बाइक ने आग पकड़ ली।

मौके पर मौजूद लोगों का कहना था हादसा तेज रफ्तार के कारण हुआ। दोनों वाहनों की गति तेज थी। अचानक गाड़ी सामने आ जाने के कारण दोनों का संतुलन बिगड़ा और हादसा हो गया। घटना के बाद कार सवार लोग अन्य वाहन में बैठकर भाग गए। इससे पहले उन्होंने कार की नंबर प्लेट भी तोड़ दी, ताकि उसकी पहचान न हो सके। मृतक के रिश्तेदार अरविंद ने बताया कि पूरा परिवार घटना से उजड़ गया। कमाने वाले एकमात्र पिता की मौत हो गई तथा बड़ा बेटा बलराम गंभीर है। दो छोटे बेटे हैं, जिन्होंने पिता को मुखाग्नि दी। घायल बेटे को पिता की मौत की जानकारी भी नहीं है। पुलिस थाना के सेवानिवृत्त प्रधान आरक्षक व वाहनों की मैकेनिकल रिपोर्ट देने के लिए अधिकृत डिप्लोमाधारी औसाफ खान ने बताया वाहन टकराने से भी इंजिन में पेट्रोल की सप्लाई चालू रहती है। घर्षण होने से चिंगारी या वाहन की वायरिंग में स्पार्किंग होने से आग लग जाती है।

तेज टक्कर से सड़क से 15 फीट दूर खेत में जा गिरे थे दोनों बाइक सवार

एक साल पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा

17 मई 2017 को शुजालपुर मुख्यालय से 5 किमी दूर आष्टा-शुजालपुर स्टेट हाईवे पर किसोनी जोड़ के पास दो बाइक व एक कार की भिड़ंत हो गई थी। तब लेगगार्ड में पैर फंसने से बाइक चला रहा बदलपुर निवासी 35 वर्षीय केसरसिंह परमार बीच सड़क पर जिंदा जल गया था। पीछे बैठा 30 वर्षीय ज्ञानसिंह पिता प्रसादीलाल भी गंभीर झुलसने से घायल हुआ था। इसी घटना में 60 वर्षीय लुकमान पिता नबीबक्स की बाइक भी पीछे से कार में आ टकराई थी व घटना स्थल पर उसकी भी मौत हुई थी।

टैंक पूरा भरवाने से फूटता-रिसता है, इसलिए होते हैं हादसे

वाहन निर्माता कंपनियां ईंधन टैंक की क्षमता का वाहन के चेसिस-डायरी में उल्लेख करती हैं। वाहन का वास्तविक टैंक भराव क्षमता से बढ़ा रखा जाता है, ताकि पूर्ण क्षमता का भराव होने के बाद भी ईंधन टैंक में कुछ जगह खाली रहने से प्रेशर मैनेज हो सके। टैंक खाली रहे तो ऐसी घटनाओं में ईंधन टैंक फटने या लीकेज होने की आशंका कम रहे। अधिकांश वाहन चालक फ्यूल टैंक फुल करवाने के चक्कर में ऊपर तक भरवा लेते हैं। इससे घटनाओं में टैंक फटने या टूटने की आशंका अधिक होती है। तभी आग भी लग जाती है।

एक्सपर्ट व्यू

पेट्रोल का 20 फीसदी टैंक खाली रखें

सभी पेट्रोल डीलर्स को उनके स्टोरेज टैंक पूर्ण क्षमता तक न भरने के निर्देश दिए जाते हैं। वाहन चालकों को भी अपने टैंक का 20% हिस्सा खाली रखना चाहिए। जिस तरह कपूर खुले में रखने पर नष्ट हो जाता है, ऐसी ही पेट्रोल की भी प्रकृति होती है। ईंधन टैंक में वेफर्स बंद होने की वजह से पेट्रोल खत्म नहीं होता, लेकिन प्रेशर को लिक्विड व स्टोरेज टंकी के बीच में जगह मिलना जरूरी है। लोग टैंक फुल करवाने के चक्कर में ऊपर तक भरवा लेते हैं। इससे वाहन टकराने की स्थिति में टैंक में प्रेशर अधिक रहने से टैंक फटने या टूटने के मामले बढ़ जाते हैं। अब इस विषय को वरिष्ठों तक पहुंचाने के साथ ही पेट्रोल पंपों को भी निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि वे वाहन चालकों को पूरा टैंक न भरवाने के संबंध में समझाइश दे सकें।

आंखोंदेखी

बचाना चाह रहे थे पर घास दूर तक जलने से आगे नहीं बढ़ पाए

हादसा होते देख मैं और कई लोग दौड़े। बाइक वाले खेत में जा गिरे थे। उनके गिरते ही बाइक ने आग पकड़ ली। लोगों की भीड़ लग गई। करीब 50 लोग थे। हम चाह रहे थे कि घायल को कैसे भी बचा लें, लेकिन आसपास फैली सूखी घास के कारण आग का फैलाव ज्यादा था। लपटें भी तेज उठने लगीं। उसकी चपेट में जो व्यक्ति आया, उसका पैर टूटकर ऊपर की ओर उठ गया था। वह बेसुध था, तभी वो न खुद को बचाने के लिए चिल्ला पाया और न वहां से हट पाया। आग की लपटें दूर पड़े युवक की तरफ भी बढ़ रही थीं। शुक्र है कि वहां खेत की मिट्‌टी थी और घास वहां तक नहीं थी। इससे उसकी जान बच गई। हालांकि वो भी गंभीर घायल हो गया था और बेहोश था। हमने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस आई और घायल को अस्पताल पहुंचाया।

-जैसा मोहम्मद खेड़ा के बाबूलाल ने भास्कर को बताया

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