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विकासखंड के 12 स्कूलों में एक शिक्षक पढ़ा रहे 8 कक्षाएं, 5 स्कूल शिक्षक विहीन

भास्कर संवाददाता | शुजालपुर विकासखंड के शहरी व ग्रामीण इलाकों में 12 हजार से अधिक बच्चों को शिक्षा दे रहे 282 सरकारी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 04, 2018, 08:45 AM IST

भास्कर संवाददाता | शुजालपुर

विकासखंड के शहरी व ग्रामीण इलाकों में 12 हजार से अधिक बच्चों को शिक्षा दे रहे 282 सरकारी स्कूलों में से 20 स्कूलों में शिक्षकों की कमी से हाल बेहाल है और शिक्षा विभाग ने नया शिक्षण सत्र शुरू करने के लिए निर्देश दे दिए है। 12 स्कूल ऐसे हैं जहां 1 शिक्षक 8 कक्षाएं अकेला पढ़ा रहा है। वहीं तीन प्राथमिक विद्यालय भी एक शिक्षक शाला के रूप में चिन्हित है। 5 स्कूल ऐसे भी हैं जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है तथा व्यवस्थाएं अतिथि शिक्षकों के भरोसे है।

शुजालपुर विकासखंड में 184 प्राथमिक व 98 माध्यमिक विद्यालय सहित कुल 282 शासकीय शालाएं 12 हजार 705 विद्यार्थियों को शिक्षा देने का काम कर रही है। इन शालाओं में 450 से अधिक अतिथि शिक्षक अध्यापन कार्य कराकर बच्चों का भविष्य बनाने का जिम्मा उठा रहे है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले नए नियम व निर्देश स्कूलों को जारी कर दिए गए, लेकिन शिक्षकों की व्यवस्था के बारे में अभी तक कोई पहल नहीं हुआ है। बीआरसीसी गौरव सक्सेना के अनुसार इलाके के 3 प्राथमिक विद्यालय मलक्साखेड़ी, अवंतिपुरा व कीरपुरा में एक शिक्षक पूरे प्राथमिक स्कूल को संभाल रहा है। इसी तरह 12 माध्यमिक विद्यालयों में भी एक शिक्षक के भरोसे 8 कक्षाएं व स्कूल का पूरा दस्तावेजों का काम बना हुआ है। माध्यमिक विद्यालयों में रीछोदा, टपका बसंतपुर, मंडल- खा, पचावदा, चितोनी, गुंजारी, उगली, खाटसूर, भीमपुरा, निशाना, अमस्याखेड़ी, मोहम्मदपुर पावड़िया में एक शिक्षक व्यवस्था संभाले हुए है।

इसी तरह 5 स्कूल शिक्षक विहीन भी है। जिनमें माध्यमिक विद्यालय खेड़ा बोलदा, प्राथमिक विद्यालय पंथपुरा मंडावर, माध्यमिक विद्यालय मलकसाखेड़ी व माध्यमिक विद्यालय बांका खेड़ी व प्राथमिक विद्यालय अकोदिया शामिल है। शिक्षकों की कमी के बारे में शिक्षा विभाग के गौरव सक्सेना का कहना है कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति से वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है तथा रिक्त पदों के बारे में शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। शासन स्तर से व्यवस्था होने पर ही विद्यालयों में युक्तियुक्तकरण या स्थानांतरण के माध्यम से यह कमी दूर किए जाने का प्रयास किया जाएगा।

प्रवेशोत्सव से पहले घर-घर सर्वे कर स्कूल से वंचित और ड्रॉप आउट बच्चों के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। इस साल 10 फीसदी बच्चों के नए प्रवेश का लक्ष्य शिक्षकों को दिया है। लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई होगी। इस बार स्कूल चलें हम अभियान चार चरणों में होगा। प्रथम चरण में ग्राम वार्ड शिक्षा पंजी, समग्र शिक्षा पोर्टल, समग्र डाटाबेस एवं डाइस डाटाबेस की जानकारी अपडेट की जाएगी। गौरतलब है आरटीई के तहत कई स्कूल संचालक मनमानी कर गरीब पात्र विद्यार्थियों को नियमों का हवाला देते हुए प्रवेश नहीं देते तथा इन सीटों को भी सामान्य तरीके से भरकर छात्र से फीस ले लेते हैं तथा सीट को आरटीई में भरना बता देते हैं।

प्रवेश प्रक्रिया 15 मई से शुरू होगी

शिक्षा का अधिकार कानून के पालन में नए शिक्षण सत्र 2018-19 में प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया 15 मई से शुरू होगी। निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर नि:शुल्क प्रवेश देने के निर्देश जारी किए हैं। इस बार स्कूलों को प्रवेश से पहले फीस की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करना है। गौरव सक्सेना ने बताया गैर अनुदान प्राप्त एवं मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल प्रबंधन को फीस पोर्टल पर दर्ज कराना होगी। इसकी समय सीमा तय की है। आरटीई के प्रवेश के लिए कक्षा एवं सीटें भी पोर्टल पर दर्ज करना होंगी। इन्हें चेक कर पोर्टल पर लॉक किया जाएगा। इसके लिए गठित समिति स्कूल की ग्राम व वार्ड का चिह्नांकन करेगी। दावे-आपत्ति लेकर इनका निर्धारित तारीख तक निराकरण किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग के उपसचिव द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि अनुदान प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन के संबंध में अलग से निर्देश जारी किए जाएंगे।

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